अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस: जल सुरक्षा में अग्रणी महिलाएँ
संयुक्त राष्ट्र का परियोजना सेवा कार्यालय UNOPS, भारत सरकार के प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘जल जीवन मिशन’ में क्षमता निर्माण, जल गुणवत्ता परीक्षण पर प्रशिक्षण, वर्तमान प्रणाली और स्रोत के संचालन व रखरखाव जैसी तकनीकी सहायता दे रहा है. इस पहल से उत्तर प्रदेश, असम, राजस्थान और तमिलनाडु में 40 लाख से अधिक परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हुआ है, साथ ही महिला मज़बूती की एक नई बयार भी बहती नज़र आ रही है. अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर इस अभियान से बदलाव ला रही कुछ महिलाओं की प्रेरक कहानियाँ.
भारत में UNOPS, सामूहिक व्यवहार परिवर्तन और क्षमता निर्माण के लिए रणनैतिक और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करता है.
UNOPS ने, भारत सरकार के जल-जीवन मिशन के लिए, पंचायत राज संस्थाओं की क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक संचालन व रखरखाव के लिए प्रशिक्षण विकल्प विकसित किए हैं.
भारत में UNOPS के देश प्रबन्धक विनोद मिश्रा कहते हैं, "इस महिला दिवस पर, हम जल जीवन मिशन को आगे बढ़ाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का जश्न मना रहे हैं. घरेलू स्तर पर पानी का प्रबन्धन अधिकतर महिलाएँ ही करती रही हैं.
इसलिए गाँव स्तर पर निर्णय लेने में भागेदारी सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं को मज़बूत बनाना महत्वपूर्ण है. नेतृत्व के ज़रिए महिलाओं की मज़बूती केवल एक दृष्टिकोण भर नहीं है - यह जल स्थिरता और सामुदायिक सहनसक्षमता को आकार देने के लिए एक अनिवार्यता है.”
जल-परीक्षण प्रशिक्षण से मज़बूती - भारती
उत्तर प्रदेश के झाँसी ज़िले के बबीना विकासखंड के ग्राम बामेर की भारती, एक साधारण परिवार की गृहिणी हैं. बुन्देलखंड में पानी की गम्भीर कमी थी, विशेषकर गर्मियों में स्थिति और भी विकट हो जाती थी.
भारती बताती हैं कि पहले उनके गाँव में पानी हासिल करने के लिए रोज़ाना झगड़े होते थे. जब जल जीवन मिशन लागू हुआ, तो लोगों ने इसे बड़े उत्साह से अपनाया.
भारती ने जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए फ़ील्ड-टेस्टिंग किट के उपयोग पर विशेष परीक्षण लिया और पानी की नियमित जाँच का काम करने लगीं. वह साथ ही, अन्य गाँवों में जाकर महिलाओं को जल परीक्षण की तकनीक सिखाकर, उन्हें हुनरमन्द बना रही हैं.
अब बामेर गाँव में हर घर में पीने का पानी पहुँच रहा है, और पानी को लेकर होने वाले झगड़ों से निजात मिल गई है.
पानी भरने के घंटे कम होने से, इस बदलाव से विशेषकर महिलाओं की ज़िन्दगी में बड़ा परिवर्तन आया है. अब महिलाएँ अपने लिए समय निकाल रही हैं और जल जीवन मिशन के कार्यों में भाग लेकर अपनी ख़ुद की ज़िन्दगी में बदलाव ला रही हैं.
जल स्वच्छता की प्रहरी - रीना अहिरवार
झांसी ज़िले के बबीना विकासखंड के ग्राम इमिलिया में कुल 356 परिवार रहते हैं. जल जीवन मिशन के लागू होने के बाद हर घर में नल से जल पहुँचने लगा. लेकिन इसके साथ ही गाँव में जलभराव की समस्या भी गम्भीर हो गई.
नालियाँ, ग्रे वाटर (गन्दे पानी) से लबालब भरी रहने लगीं. हर रास्ते और सार्वजनिक जगहों पर पानी जमा होने लगा. इस समस्या के समाधान के लिए 'संयुक्त राष्ट्र के परियोजना सेवाएँ कार्यालय' - UNOPS की पहल पर गाँव की महिलाओं ने एकजुट होकरकाम शुरू किया.
इस अभियान की कमान सम्भाली रीना अहिरवार ने जिन्होंने महिलाओं को, पीने के पानी को ना केवल सहेजने के लिए प्रेरित किया, बल्कि गाँव की सड़कों और गलियों को जलभराव से मुक्त करने में भी अहम भूमिका निभाई.
UNOPS की मदद से गाँव में दो लीच पिट बनाए गए, जिनसे ग्रे वाटर प्रबन्धन में मदद मिली. रीना ने इसकी सफलता देखकर पंचायत के साथ मिलकर पूरे गाँव में सोक पिट और लीच पिट निर्माण की माँग उठाई और लोगों को जागरूक करने के लिए सभाएँ कीं तथा जनभागेदारी से अभियान को आगे बढ़ाया.
इन्हीं प्रयासों का परिणाम था कि पंचायत ने गाँव में 13 सोक पिट बनवाए, जिससे जलभराव की समस्या का स्थाई समाधान सम्भव हो सका. अब इमिलिया गाँव के रास्ते और सार्वजनिक स्थान पूरी तरह जलभराव से मुक्त हैं.
रीना अहिरवार की यह मुहिम अब आसपास के गाँवों के लिए मिसाल बन गई है.
जल परीक्षण ने दिलाई रामकुमारी को पहचान
झाँसी ज़िले के बबीना ब्लॉक में इमिलया गाँव की रामकुमारी, कभी एक साधारण ग्रामीण महिला थीं. शिक्षा हासिल करने का मौक़ा नहीं मिला, सपने भी अधूरे रह गए. लेकिन जल जीवन मिशन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी.
इस अभियान के तहत, हर घर स्वच्छ एवं सुरक्षित पानी पहुँचाने और जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए, गाँव की पाँच महिलाओं को पानी की जाँच करने का प्रशिक्षण दिया गया. रामकुमारी भी इस टीम का हिस्सा थीं.
हालाँकि यह ज़िम्मेदारी निभानी आसान नहीं था. शुरुआत में लोग हँसते, ताने देते थे – “ये क्या कर पाएगी?”
लेकिन रामकुमारी ने पूरी मेहनत के साथ अपना काम करना शुरू किया. जल परीक्षण करके वो अपनी जाँच रिपोर्ट सरकारी पोर्टल पर अपडेट करती हैं, पंचायत की बैठकों में शामिल होकर पानी की गुणवत्ता पर अपने सुझाव रखती हैं. ख़ास बात यह है कि अब न केवल पंचायत उनके सुझावों को सुनती है, बल्कि उन पर अमल भी करती है.
पानी की हर जाँच के लिए उन्हें 20 रुपए की राशि मिलती है, जिससे उनकी आमदनी भी बढ़ी है. लेकिन उन्हें असली गर्व इस बात पर है कि उनकी मेहनत से गाँव में अब पानी से होने वाली बीमारियाँ ख़त्म होने लगी हैं. अब हर घर में नल से शुद्ध पानी पहुँच रहा है.
रामकुमारी कहती हैं, " UNOPS के साथ से एक नया हौसला मिला. अब लोग मुझे इज़्ज़त से देखते हैं, नाम से पुकारते हैं. पहले जहाँ सपने देखना मुश्किल था, अब वही सपने सच होते नज़र आ रहे हैं.
बेबी के हौसलों से नई राह
झाँसी ज़िले के बुन्देलखंड क्षेत्र में स्थित बाजना गाँव, ज़िला मुख्यालय से लगभग 21 किलोमीटर पश्चिम में बसा है. यह गाँव प्राकृतिक सुन्दरता से भरपूर है. लेकिन यहाँ लोग पानी की क़िल्लत से परेशान रहते थे. गाँव की आबादी, पाँच किलोमीटर के दायरे में फैले अलग-अलग टोले और मजरों में बसी है. हर रोज़ पानी के लिए लम्बा सफ़र तय करना लोगों की मजबूरी रही है.
इसी गाँव की निवासी 29 वर्षीय बेबी, जन्म से ही पैरों की विकलांगता की शिकार हैं. जब गाँव में जल जीवन मिशन की शुरुआत हुई, तो बेबी भी इस अभियान से जुड़ीं और उन्होंने पानी की समस्या को दूर करने का बीड़ा उठाया.
वर्ष 2019 में उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक पूरे गाँव में हर घर तक पानी नहीं पहुँचेगा, तब तक वो शादी नहीं करेंगी. वे जल जाँच समिति का हिस्सा बनीं और पूरे उत्साह के साथ गाँव के हर मोहल्ले, हर घर में जाकर यह सुनिश्चित करने लगीं कि कहीं भी कोई परिवार सुरक्षित पेयजल से वंचित न रह जाए.
बेबी ने, UNOPS की टीम के साथ मिलकर, पानी की बर्बादी रोकने के लिए घर-घर जाकर लोगों को समझाया और जल-परीक्षण के ज़रिए पानी की गुणवत्ता की निगरानी की. पानी में बैक्टीरिया मिलने पर, तुरन्त ग्रामीणों को सचेत करके, समाधान भी सुझाए गए.
बेबी का कहना है, "पानी की कमी की वजह से हमारे गाँव की लड़कियाँ शिक्षा से वंचित रह जाती थीं. मैं चाहती हूँ कि गाँव की हर बेटी पढ़े-लिखे और अपने सपनों को पूरा करे."
हर घर तक शुद्ध पानी पहुँचाने का संकल्प – शीला परिहार
झाँसी ज़िले के बबीना ब्लॉक के सिजवाहा गाँव की महिलाएँ, वर्षों से पानी की कमी से जूझ रही थीं. उनके लिए साल 2019 में जल जीवन मिशन, एक नई उम्मीद बनकर आया.
गाँव में इस अभियान के नेतृत्व की ज़िम्मेदारी उठाई शीला परिहार ने. शीला ने तय कर लिया कि अब गाँव की हर गली, हर घर तक साफ़, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पानी पहुँचेगा. उन्होंने, UNOPS की मदद से जल परीक्षण की तकनीक सीखी और नियमित रूप से हर छह महीने में पानी की जाँच करने लगीं.
वो न केवल पानी की शुद्धता की जाँच करतीं, बल्कि लोगों को यह भी समझातीं कि साफ़ पानी क्यों ज़रूरी है और जलजनित बीमारियों से कैसे बचा जा सकता है.
हालाँकि शुरुआत में लोगों को समझाना थोड़ा मुश्किल रहा, लेकिन शीला की मेहनत रंग लाई. गाँव की कई महिलाएँ उनके साथ जुड़ गईं और देखते ही देखते यह एक मज़बूत टीम बन गई. अब शीला और उनकी साथी महिलाएँ केवल पानी की गुणवत्ता पर ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण पर भी काम कर रही हैं.
उन्होंने पंचायत के साथ मिलकर तालाबों की मरम्मत, मेड़बन्दी जैसे कामों को पूरा किया ताकि पानी के स्रोत टिकाऊ बनें और भविष्य में गाँव में पानी की समस्या न हो.
शीला कहती हैं, "गुणवत्तापूर्ण पानी केवल एक ज़रूरत नहीं, बल्कि सबका हक़ है. जब महिलाएँ आगे आती हैं, तो बदलाव मुमकिन हो जाता है."
और जैसाकि झाँसी में UNOPS की ज़िला सलाहकार, अनुज्ञा परमार बताती हैं, “हमने कुछ महिलाओं का चयन किया था – पाँच महिलाओं को गाँव के हैंड पम्प की जाँच करके यूपी पोर्टल पर अपलोड करना सिखाया, जिससे उन्हें ₹20 प्रति टेस्ट के हिसाब से आमदनी हुई. अब सरकार ने निर्देश दिया है कि हर पाँच घर के बाद भी टेस्टिंग करनी है, तो उसके परिणाम भी वो अपलोड करके धन अर्जित कर रही हैं.
रक़म छोटी है, लेकिन यह उनकी ख़ुद की आय है. इससे वो एक अलग ही तरह का गर्व महसूस करती हैं.”