महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) क्या है और यह क्यों अहम है?
1940 के दशक में अमेरिका की प्रथम महिला और मानवाधिकार समर्थक ऐलेनोर रूज़वेल्ट ने महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के पहले उप-आयोग की नींव रखने की प्रेरणा दी थी. तब से हर साल मार्च में, दुनिया भर से हज़ारों महिलाएँ, विश्व की स्थिति का आकलन करने और अपनी आवाज़ बुलन्द करने के लिए, न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एकत्र होती हैं.
महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र आयोग (CSW) की वार्षिक बैठक में, दुनिया भर में महिलाओं के ख़िलाफ़ व्याप्त असमानताओं, हिंसा व भेदभाव से निपटने के प्रयासों पर विचार किया जाता है.
महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) से जुड़े पाँच महत्वपूर्ण तथ्य यहाँ प्रस्तुत हैं:
1. परिवर्तनकारियों के 80 वर्ष
1946 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली बैठक के कुछ दिनों बाद, ऐलेनोर रूज़वेल्ट ने जब विश्व की महिलाओं को सम्बोधित एक खुला पत्र पढ़ा, तब से आयोग का कार्य शुरू हुआ.
ऐलेनोर रूज़वेल्ट ने देशों की सरकारों से आग्रह किया कि वे “महिलाओं को राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय मामलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करें.”
साथ ही “मौजूदा अवसरों के प्रति जागरूक महिलाओं से आहवान किया कि वो आगे आकर, शान्ति एवं पुनर्निर्माण के कार्यों में बिल्कुल उसी तरह योगदान करें, जैसाकि उन्होंने युद्ध व विरोधों के समय किया था.”
इसके तुरन्त बाद, संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक मामलों की परिषद (ECOSOC) ने एक उप-आयोग की स्थापना की.
इसके छह सदस्य – चीन, डेनमार्क, डोमिनिकन गणराज्य, फ्रांस, भारत, लेबनान और पोलैंड थे. सदस्य देशों को यह ज़िम्मेदारी दी गई कि वे “महिलाओं की स्थिति से सम्बन्धित समस्याओं का आकलन करें” और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (जिसने बाद में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का रूप लिया) को सलाह दें.
इसमें शुरू से ही कार्रवाई के आहवान किए गए थे, जिसमें राजनैतिक अधिकारों को प्राथमिकता देना शामिल था, “क्योंकि उनके बिना प्रगति होना सम्भव नहीं था.”
उप-आयोग की पहली रिपोर्ट में, नागरिक, शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में सुधार के लिए सिफ़ारिशें भी की गईं. साथ ही, इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए, संयुक्त राष्ट्र महिला सम्मेलन आयोजित करने की भी मांग की गई.
जून 1946 तक, इसने ECOSOC (आर्थिक और सामाजिक परिषद) की एक सहायक संस्था के तौर पर संयुक्त राष्ट्र की महिला स्थिति आयोग (CSW) का रूप ले लिया.
1947 से 1962 तक, इस आयोग ने भेदभावपूर्ण क़ानूनों को बदलने और महिलाओं के मुद्दों के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिए मानक स्थापित करने तथा अन्तरराष्ट्रीय समझौते तैयार करने पर ध्यान केन्द्रित किया.
2. ऐतिहासिक अन्तरराष्ट्रीय समझौते
आयोग की स्थापना के शुरुआती दिनों से ही, इसकी सदस्यता बढ़नी शुरू हो गई, जिससे संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में कुछ सबसे व्यापक सहमति वाले अन्तरराष्ट्रीय समझौते हुए. इनमें से कुछ प्रमुख समझौते इस प्रकार हैं:
- मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा, 1948: महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) ने, घोषणा-पत्र की मसौदा समिति की अध्यक्ष, ऐलेनोर रूज़वेल्ट के साथ काम करते हुए, मानवता के पर्याय के लिए ‘पुरुष’ शब्द का उपयोग करने के विरोध में सफलतापूर्वक तर्क दिया. इसके परिणाम स्वरूप, महासभा द्वारा अपनाए गए अन्तिम संस्करण में समावेशी भाषा को शामिल किया गया. पुरुष शब्द के स्थान पर मानव शब्द का प्रयोग किए जाने का सुझाव, भारतीय राजदूत डॉक्टर हंसा मेहता का था.
महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभाव उन्मूलन के लिए घोषणा-पत्र, 1967: महिलाओं के अधिकारों पर मानकों को मज़बूत करने के प्रयासों के कारण, महासभा ने महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) से इस घोषणा-पत्र का मसौदा तैयार करने का अनुरोध किया.
- महिलाओं के ख़िलाफ़ सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर कन्वेंशन (CEDAW), 1979: महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) ने इस क़ानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते का मसौदा तैयार किया.
- बीजिंग घोषणा और कार्रवाई का मंच, 1995: महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) ने इस ऐतिहासिक घोषणा को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो लैंगिक समानता पर आज भी एक प्रमुख वैश्विक नीति दस्तावेज़ बना हुआ है.
CSW सत्रों के बार में अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है.
3. अधिक देश, अधिक आवश्यकताएँ
संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता में वृद्धि और 1960 के दशक में यह प्रमाणित होने के बाद कि महिलाएँ ग़रीबी से असमान रूप से प्रभावित हो रही हैं, महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) ने समुदाय एवं ग्रामीण विकास, कृषि कार्य, परिवार नियोजन तथा वैज्ञानिक व तकनीकी प्रगति में महिलाओं की आवश्यकताओं पर ध्यान केन्द्रित किया.
इसके ज़रिए, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली, ख़ासतौर पर विकासशील देशों में महिलाओं की प्रगति आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी सहायता का विस्तार करने का भी प्रोत्साहन दिया गया.
संयुक्त राष्ट्र ने 1975 को अन्तरराष्ट्रीय महिला वर्ष घोषित किया और मैक्सिको में पहला विश्व महिला सम्मेलन आयोजित किया.
1977 में, संयुक्त राष्ट्र ने औपचारिक रूप से अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस को मान्यता दी, जो हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है.
वर्षों की बातचीत के बाद, 2010 में महासभा ने एक प्रस्ताव अपनाया, जिसमें संगठन के सम्बन्धित अनुभागों और विभागों को एकीकृत कर, लैंगिक समानता व महिला मज़बूती के लिए संयुक्त राष्ट्र संस्था (UN Women) की स्थापना की गई, जो आज भी CSW के साथ निकट सहयोग में काम करती है.
4. नई चुनौतियों का समाधान
CSW की वार्षिक बैठकों में ‘बीजिंग कार्रवाई मंच’ के कार्यान्वयन में हुई प्रगति और कमियों का आकलन करने के साथ-साथ, नई व उभरती चुनौतियों पर भी चर्चा की जाती है.
इसके बाद सदस्य देश प्रगति तेज़ करने के लिए भावी क़दमों पर सहमति बनाते हैं.
आयोग ने जलवायु परिवर्तन, लैंगिक-आधारित हिंसा जैसी चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाई है. साथ ही, यह सुनिश्चित करने में मदद की है कि निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं व सतत विकास रणनीतियों में महिलाओं को पूर्ण भागेदारी मिले.
हर साल, महिलाओं की स्थिति पर आयोग, सदस्य देशों द्वारा सहमत हुए निष्कर्ष, कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक व सामाजिक परिषद (ECOSOC) को भेजता है.
सभी महिलाओं तक पहुँचने और किसी को भी पीछे नहीं छोड़ने के दृष्टिकोण के साथ, CSW लैंगिक समानता व महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य तेज़ी से हासिल करने व टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा की निगरानी व अनुसरण में भी योगदान देता है.
5. कार्रवाई करके दिखाना
महिलाओं के बीच व्याप्त ग़रीबी समाप्त करने के समाधान, व्यापक रूप से पहचाने गए हैं. इनमें लैंगिक असमानताएँ दूर करने वाली नीतियों व कार्यक्रमों में निवेश करना तथा महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देते हुए, रोज़गार में लैंगिक अन्तर को ख़त्म करना प्रमुख हैं.
इन क़दमों से, 10 करोड़ से अधिक महिलाएँ और लड़कियाँ निर्धनता के गर्त से बाहर निकल सकती हैं, 30 करोड़ नए रोज़गार पैदा हो सकते हैं और सभी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 20 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है.
2025 का CSW69 सत्र, 10 से 21 मार्च तक संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (UN Headquarters) में आयोजित होगा, जिसमें 45 सदस्य देश और दुनिया भर के हज़ारों प्रतिभागी शामिल होंगे.
इस बार सत्र में जिन मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा, उनमें प्रमुख हैं:
बीजिंग घोषणापत्र व कार्रवाई मंच के कार्यान्वयन की समीक्षा एवं मूल्यांकन, जिसमें लैंगिक समानता और महिला मज़बूती हासिल करने में मौजूद वर्तमान चुनौतियों का आकलन तथा पूर्ण रूप से 2030 एजेंडा हासिल करने में इसका योगदान शामिल होगा.
CSW69 के बारे में अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है.