डीआरसी: हिंसक टकराव, यौन हिंसा के बीच 80 हज़ार नागरिकों ने छोड़ा देश
काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के पूर्वी हिस्से में असुरक्षा और भयावह यौन हिंसा के कारण हज़ारों लोग शरण की तलाश में देश की सीमा पार करके जा रहे हैं, और इस विस्थापन के रुकने के फ़िलहाल संकेत नज़र नहीं आ रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने मंगलवार को बिगड़ते हालात के प्रति आगाह किया है.
यूएन एजेंसी में अन्तरराष्ट्रीय संरक्षण प्रभाग के उपनिदेशक पैट्रिक ऐबा ने बताया कि लड़ाई के अग्रिम मोर्चों के नज़दीक पर यौन हिंसा व मानवाधिकार उल्लंघन के मामले निरन्तर सामने आ रहे हैं. स्थानीय लोगों के घरों और व्यवसायों में लूटपाट हो रही है और उन्हें बर्बाद किया जा रहा है.
काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वी हिस्से में स्थित नॉर्थ कीवू व साउथ कीवू प्रान्तों पर विद्रोही गुट एम23 की सरकारी सुरक्षा बलों से लड़ाई हो रही है, और एम23 लड़ाकों ने कई इलाक़ों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया है.
UNHCR अधिकारी ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि इन दोनों प्रान्तों में अस्थिरता व्याप्त है, 80 हज़ार से अधिक लोग सशस्त्र टकराव के कारण अपनी जान बचाने के लिए बेघर हुए हैं और जनवरी महीने के बाद से अब तक 60 हज़ार से अधिक लोगों ने बुरूंडी में प्रवेश किया है.
यूएन शरणार्थी एजेंसी के अनुसार, फ़रवरी महीने के अन्तिम दो सप्ताह में बलात्कार के 895 मामले दर्ज किए गए, जोकि एक दिन में औसतन 60 मामलों को दर्शाता है.
यौन हिंसा के अलावा स्थानीय नागरिकों को विस्फोटक सामग्री के अवशेष की चपेट में आने का जोखिम भी झेलना पड़ रहा है, विशेष रूप से बच्चों और अपने खेतों की देखभाल में जुटे किसानों को.
यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) ने सोमवार को बताया था कि हथियारबन्द लड़ाकों ने नार्थ कीवू की राजधानी गोमा में कम से कम दो अस्पतालों पर धावा बोला और बड़ी संख्या में मरीज़ों को अगवा कर लिया.
लड़ाई के कारण बेघर, विस्थापित लोगों के लिए मानवीय सहायता प्रयास भी प्रभावित हुए हैं. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, हिंसक टकराव से प्रभावित इलाक़ों में सहायता अभियान रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
हालांकि नॉर्थ कीवू के कुछ हिस्सों में आपात खाद्य सहायता को फिर से शुरू किए जाने की बात कही गई है, जिसके तहत क़रीब दो लाख लोगों को खाद्य सामग्री वितरित की जाएगी.
जबरन घर से निकालने की घटनाएँ
नॉर्थ कीवू व साउथ कीवू प्रान्तों में बड़े पैमाने पर आबादी की आवाजाही हो रही है. इसकी वजह एम23 विद्रोही गुट द्वारा आन्तरिक रूप से विस्थापित लोगों को गोमा के पास स्थित शिविरों को छोड़कर जाने के लिए दिए गए आदेश हैं.
पूर्वी डीआरसी में पसरी असुरक्षा के कारण सुरक्षा व शरण की तलाश में अनेक अन्य लोगों के सीमा पार करने की सम्भावना है.
यूएन एजेंसी ने बताया है कि हिंसक टकराव से जान बचाकर भाग रहे डीआरसी के नागरिक, और देश के बाहर मौजूद वे नागरिक जो हिंसा प्रभावित इलाक़ों से हैं, उन्हें अन्तरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय क़ानूनी फ़्रेमवर्क के अनुसार, शरणार्थी संरक्षण की आवश्यकता हो सकती है.
संगठन ने ज़ोर देकर कहा है कि हिंसक प्रभावित इलाक़ों में स्वेच्छा से वापिस लौटने का निर्णय, पर्याप्त जानकारी के आधार पर ही किया जाना होगा.
सहायता धनराशि पर पाबन्दी से छूट
यूएन शरणार्थी एजेंसी के प्रवक्ता यूजिन बियुन से जब मानवीय सहायता धनराशि पर अमेरिका द्वारा लगाई गई रोक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कुछ आपात हालात वाले देशों को 90 दिनों के लिए इस पाबन्दी से छूट मिली है. इनमें काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य भी है.
खनिज सम्पदा से परिपूर्ण डीआरसी, पिछले कई दशकों से संकट में सुलग रहा है, जहाँ मानवीय सहायता अभियान के लिए धनराशि की उपलब्धता चुनौतीपूर्ण रही है.
UNHCR प्रवक्ता ने आशा जताई कि उनका संगठन देश में आपात हालात के बीच ज़रूरतमन्दों तक समर्थन पहुँचाता रहेगा.
अफ़्रीका के कई देशों में 10 लाख से अधिक डीआरसी के शरणार्थी हैं, जिनमें से अधिकाँश पड़ोसी देशों से हैं. इनमें से क़रीब पाँच लाख से अधिक युगांडा में हैं, वहीं जनवरी में एम23 लड़ाकों के हमलों के बाद हज़ारों लोगों ने बुरूंडी में शरण ली है.
मौजूदा संकट से पहले, डीआरसी की सीमाओं के भीतर 67 लाख लोग अपने घरों से विस्थापित थे.