इसराइल द्वारा ग़ाज़ा में सहायता सामग्री के प्रवेश पर रोक से खाद्य क़ीमतें उछलीं
ऐसी ख़बरें मिली हैं कि इसराइल ने, हमास द्वारा युद्धविराम के पहले चरण को आगे बढ़ाने की योजना को स्वीकार करने से कथित तौर पर इनकार करने के बाद, ग़ाज़ा पट्टी में सभी सहायता सामग्री के दाख़िल होने पर रोक लगी दी है जिसका तत्काल प्रभाव ये हुआ है कि खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में भारी उछाल आया है.
ख़बरों के अनुसार, ग़ाज़ा पट्टी में, आटे और सब्ज़ियों की क़ीमतों में 100 गुना तक वृद्धि देखी गई है.
संयुक्त राष्ट्र के सहायता समन्वय कार्यालय - OCHA ने सोमवार को बताया कि कैरेम शालॉम, एरेज़ और ज़िकिम सीमा चौकी बन्द होने का मतलब है कि महत्वपूर्ण मानवीय सहायता सामग्री ज़रूरतमन्द लोगों तक नहीं पहुँचाई जा सकती है. इसमें हज़ारों टैन्ट भी हैं.
मिस्र, क़तर और अमेरिका की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम का प्रथम चरण शनिवार को समाप्त हो गया, जिसमें हमास ने इसराइल से अगले सहमत चरण पर आगे बढ़ने का आहवान किया.
मगर इसराइल ने प्रथम चरण को ही जारी रखने पर ज़ोर दिया है जैसाकि क्षेत्र में शीर्ष अमेरिकी दूत ने, प्रथम चरण को ही पवित्र रमदान महीने के अन्त तक जारी रखे जाने का प्रस्ताव रखा है.
19 जनवरी को हुए युद्धविराम समझौते के तहत, 33 इसराइली बन्धकों को रिहा किया गया है, जिन्हें 7 अक्टूबर के आतंकवादी हमलों के बाद से बन्दी बनाकर रखा गया था. साथ ही लगभग 1,900 फ़लस्तीनी कैदियों को भी इसराइली जेलों से रिहा किया गया है.
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने न्यूयॉर्क में संवाददाताओं को बताया, "युद्धविराम ने भोजन, पानी वितरित करने, साथ ही आश्रय सहायता और चिकित्सा सहायता वितरित करने का अवसर मुहैया कराया है, जिससे ग़ाज़ा में लगभग सभी लोगों तक भोजन के पैकेट पहुँचाने में मदद मिली है."
उन्होंने कहा, "हमारे मानवीय सहायता साझीदारों ने बताया है कि ग़ाज़ा में रविवार को सीमा चौकी बन्द होने के बाद, आटे और सब्ज़ियों की क़ीमतों में 100 गुना से अधिक का उछाल आया है. मानवीय साझीदार फ़िलहाल उपलब्ध भंडार का आकलन कर रहे हैं."
युद्धविराम, 'एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा'
संयुक्त राष्ट्र की बाल एजेंसी, यूनीसेफ़ ने आगाह किया है कि ग़ाज़ा में सहायता वितरण को रोकने से, उन बच्चों और परिवारों के लिए विनाशकारी परिणाम होंगे, जो केवल जीवित रहने के लिए भी, जद्दोजेहद कर रहे हैं.
मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए यूनीसेफ़ के क्षेत्रीय निदेशक एडुआर्ड बीगबेडेर ने कहा है कि इसराइल द्वारा रविवार को सहायता राशि के ग़ाज़ा में प्रवेश पर घोषित की गई रोक, आम लोगों के लिए जीवन रक्षक कार्यों को गम्भीर रूप से प्रभावित करेगी."
"यह ज़रूरी है कि युद्धविराम जोकि बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा है, वो लागू रहे, और सहायता सामग्री की आपूर्ति को स्वतंत्र रूप से प्रवाहित होने दिया जाए, ताकि हम मानवीय सहायता कार्रवाई जारी रख सकें."
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा कि 19 जनवरी को युद्धविराम लागू होने के बाद, यूनीसेफ़ और भागीदारों ने ग़ाज़ा में एक लाख 50 हज़ार बच्चों को गर्म कपड़े प्रदान किए हैं और अधिक दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लगभग पाँच लाख लोगों के लिए, दैनिक जल वितरण को बढ़ाया है.
युद्धविराम लागू होने के बाद से लगभग ढाई लाख बच्चों और हज़ारों गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को, पोषण सम्बन्धी पूरक आहार मुहैया कराए गए हैं.
स्कूली कक्षाएँ खुलीं
ग़ाज़ा में 100 से अधिक सरकारी स्कूल फिर खुल गए हैं, जिससे लगभग एक लाख छात्र फिर से कक्षाओं में आ गए हैं.
ग़ाज़ा शहर और उत्तरी ग़ाज़ा में, संयुक्त राष्ट्र के भागीदार यह सुनिश्चित करने के लिए टैन्टों का उपयोग करेंगे ताकि बच्चे अपनी शिक्षा जारी रख सकें.
OCHA की टीमों ने सोमवार को ख़ान यूनिस में एक विस्थापन स्थल का दौरा किया, जहाँ लगभग 1,200 लोग रह रहे हैं. इन समुदायों को अपने घरों को लौटने की अनुमति नहीं दी गई है, जो बफ़र ज़ोन में स्थित हैं.
OCHA एजेंसी, उनकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सहायता जुटाने के लिए काम कर रही है.
इस बीच OCHA ने, इसराइल के क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट पर के बारे में ख़बर दी है कि इसराइली द्वारा जारी सैन्य अभियान, उत्तरी क्षेत्रों में मानवीय ज़रूरतों को बढ़ा रहा है. मानवीय सहायता कर्मियों को, आवाजाही पर प्रतिबन्धों का सामना करना पड़ रहा है.