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यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी, UNFPA के लिए अमेरिकी सहायता में बड़ी कटौती

हरे रंग का हिजाब पहने एक युवा अफगानी लड़की बैसाखियों के एक जोड़े के बगल में एक कुर्सी पर बैठी है, जिसके सामने UNFPA का लोगो वाला एक डिब्बा रखा है।
© UNFPA Afghanistan अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं व लड़कियों को UNFPA द्वारा समर्थन प्रदान किया जाता रहा है. (फ़ाइल)

यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी, UNFPA के लिए अमेरिकी सहायता में बड़ी कटौती

महिलाएँ

संयुक्त राज्य अमेरिका ने यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य मामलों के लिए यूएन एजेंसी (UNFPA) के लिए वित्तीय योगदान में 37.7 करोड़ डॉलर की कटौती करने की घोषणा की है. यूएन एजेंसी ने गुरूवार को इस आशय की जानकारी दी है, जिससे महिलाओं व लड़कियों पर गम्भीर असर होने की आशंका व्यक्त की गई है.

UNFPA ने एक वक्तव्य जारी करके बताया कि 26 फ़रवरी को उन्हें सूचित किया गया कि अमेरिकी संस्था USAID और अमेरिकी विदेश विभाग के ज़रिये उन्हें मिलने वाले लगभग सभी अनुदान (क़रीब 48) ख़त्म कर दिए गए हैं.

संगठन के अनुसार इस निर्णय का महिलाओं व लड़कियों के स्वास्थ्य पर गहरा असर होगा, और उन सहायताकर्मियों पर भी, जो विश्व में बेहद कठिन परिस्थितियों में संकटग्रस्त इलाक़ों में सेवारत हैं.

USAID के अनुदान के ज़रिये अति-महत्वपूर्ण मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ, हिंसा से बचाव व संरक्षण, बलात्कार पीड़ितों के लिए उपचार और अन्य मानवतावादी उद्देश्यों के लिए जीवनरक्षक सहायता प्रदान की जाती रही हैं.

यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी, मातृत्व मौतों का अन्त करने, प्रसव के दौरान माँ व नवजात शिशु के जीवन की रक्षा करने के लिए प्रयासरत है. साथ ही, ग़ाज़ा, सूडान और यूक्रेन समेत अन्य हिंसक टकराव से प्रभावित देशों व क्षेत्रों में भयावह हिंसा से जूझ रही महिलाओं को समर्थन दिया जाता है.

अफ़ग़ानिस्तान से यूक्रेन तक

यूएन एजेंसी की 150 देशों के साथ साझेदारी है, जिसके तहत विविध प्रकार की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराई जाती हैं.

संगठन का लक्ष्य परिवार नियोजन सम्बन्धी आवश्यकताओं को पूरा करना, लिंग-आधारित हिंसा और बाल विवाह व महिला जननांग विकृति समेत अन्य हानिकारक प्रथाओं से निपटना है.

यूएन एजेंसी ने बताया कि वित्तीय योगदान समाप्त किए जाने की अधिसूचना में वे अनुदान भी शामिल हैं, जिन्हें पहले मानवतावादी उद्देश्यों के लिए छूट के तौर पर दिया जाता था. सम्वेदनशील हालात में जीवन गुज़ार रही लड़कियों व महिलाओं की ज़िन्दगी बचाने के लिए इन्हें अहम माना जाता है.

ऐसे अनुदानों द्वारा पोषित कार्यक्रम अफ़ग़ानिस्तान, चाड, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, हेती, माली, सूडान, सीरिया, यूक्रेन समेत अन्य देशों में संचालित किए जाते रहे हैं.