DRC के लोग, विस्थापन भूख और असुरक्षा से त्रस्त, घर लौटने में भयभीत
काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के सबसे बड़े शहर गोमा में जारी युद्ध के बीच, करीब़ 7 लाख लोग शहर छोड़कर जा चुके हैं. इस साल जनवरी में रवांडा समर्थित एम23 विद्रोहियों द्वारा युद्ध छेड़े जाने के बाद, लोगों को मजबूरन विस्थापित होना पड़ा है, जो अब भी लगातार जारी है. इस बीच असुरक्षा के कारण, लोगों में अपने घरों को वापिस लौटने को लेकर भय व्याप्त है.
एम23 विद्रोहियों ने बुलेन्गो विस्थापन शिविर में रहने वाले लोगों को, 9 फ़रवरी को गोमा में 72 घंटे की चेतावनी जारी की थी, जिसमें लोगों को अपने गाँवों को वापस लौट जाने के लिए कहा गया था.
इस आदेश के बाद, 6 बच्चों की माँ तिमूसीफ़ू को कुछ ही सप्ताहों के भीतर, दूसरी बार अपना सामान उठाकर विस्थापित होना पड़ रहा है. वो उन हज़ारों लोगों में शामिल है, जिन्होंने गोमा पर एम23 का क़ब्ज़ा होने के बाद बुलेन्गो में शरण ली थी.
लेकिन बुलेन्गो भी अब सुरक्षित नहीं है. लोगों के लिए शहरी क्षेत्र में वापस जाना ही एकमात्र विकल्प हो सकता है, लेकिन यह विकल्प ख़तरे से भरा है.
तिमूसीफ़ू ने संयुक्त राष्ट्र सहायता कर्मियों से कहा, "हम अपने घरों को लौटने से डर रहे हैं. हमारे गाँव में ब भी लड़ाई चल रही है. हम भूख से त्रस्त हैं. हमारे पास धन नहीं हैं."
एम23 विद्रोहियों ने, गोमा के बाद, डीआरसी के दूसरे सबसे बड़े शहर बुकावू और अन्य प्रमुख शहरों पर क़ब्जा़ कर लिया जिसके बाद हज़ारों लोग विस्थापित हो गए.
गोमा में आक्रमण और अपहरण सहित अपराध व हिंसा की ख़बरें आई हैं. डीआरसी के लिए संयुक्त राष्ट्र शान्ति मिशन, MONUSCO ने एम23 विद्रोहियों द्वारा ज़ब्त किए गए क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति को "अस्थिर और अत्यधिक अप्रत्याशित" बताया है.
भूख से दम तोड़ रहे हैं बच्चे
मौजूद संकट और असुरक्षा के बावजूद, तीमूसीफ़ू और उनका परिवार, गोमा के पास अपने गाँव वापस लौट गए. उन्होंने कहा, ''अभी भोजना हमारी सबसे बड़ी ज़रूरत है...कुछ बच्चे भूख से दम तोड़ रहे हैं... दवाइयाँ नहीं हैं क्योंकि क्लीनिक बन्द हैं.
गोमा में WFP के दो गोदामों से 70 प्रतिशत (9 हज़ार मीट्रिक टन) खाद्य भंडार की लूटपाट के बाद, खाद्य राहत कार्य प्रभावित हुए हैं. लूटपाट ने मानवीय सहायता कार्यों को गम्भीर रूप से बाधित कर दिया है, जिससे 4 लाख 50 हज़ार से ज़्यादा लोग आश्रय, भोजन या पानी से वंचित रह गए हैं.
डीआरसी में WFP की प्रवक्ता शेली ठकराल ने कहा, "विस्थापित लोगों को 6 सप्ताह से सहायता नहीं मिली है...खाद्य मदद लाना ज़रूरी है.
लुढ़कता बाज़ार और बढ़ती मंहगाई
दबाव के कारण बाज़ार ढह रहे हैं. WFP के एक हाल के अध्ययन में पाया गया कि इस क्षेत्र के मुख्य खाद्य पदार्थों में से एक, मक्का के आटे की क़ीमतों में लगभग 70 प्रतिशत वृद्धि हुई है. साथ ही नमक और मूंगफली तेल की क़ीमत में भी वृद्धि दर्ज की गई है.
परिवहन क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित है. गोमा का हवाई अड्डा दो सप्ताह से अधिक समय से बन्द है, जिसके कारण अहम मानवीय आपूर्ति मार्ग कट गए है.
WFP द्वारा संचालित संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी वायु सेवा (UNHAS) को धन संकट का सामना करना पड़ रहा है. अगर एजेंसी 3 करोड़ 31 लाख डॉलर की रक़म नहीं जुटा पाती, तो मार्च के अन्त तक सेवाओं को निलंबित करना पड़ सकता है.
महिलाओं को यौन हिंसा और शोषण का ख़तरा
बिगड़ते हालात के बीच महिलाओं और लड़कियों को यौन हिंसा व शोषण का ख़तरा बढ़ जाता है. जलाऊ लकड़ी की खोज में निकली महिलाओं और लड़कियों को हमलों का निशाना बनाया जाता. कई गम्भीर मामलों में, महिलाओं को अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए यौन शोषण का शिकार होना पड़ता है.
गोमा में WFP की खाद्य सहायता जारी है. शेली ठकराल ने कहा, "महिलाओं को खाद्य मदद और आजीविका के अवसर प्रदान करके उन्हें लक्षित हिंसा से बचाना ज़रूरी है. "
बहरहाल, तमाम कठिनाइयों के बीच, विस्थापन शिविरों में रहने के लिए मजबूर लोगों का, अपने घरों को वापिस लौटने का सपना बरक़रार हैं.