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2050 तक स्तन कैंसर के मामलों में 40% की वृद्धि का अनुमान, WHO

घाना में, स्तन कैंसर के बारे में जाकरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं. हर साल लाखों महिलाएँ स्तन कैंसर की बीमारी की चपेट में आती हैं.
© UNICEF Ghana
घाना में, स्तन कैंसर के बारे में जाकरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं. हर साल लाखों महिलाएँ स्तन कैंसर की बीमारी की चपेट में आती हैं.

2050 तक स्तन कैंसर के मामलों में 40% की वृद्धि का अनुमान, WHO

महिलाएँ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक विशेष शाखा - अन्तरराष्ट्रीय कैंसर शोध एजेंसी (IARC) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2050 तक दुनिया भर में स्तन कैंसर के मामलों में 38 प्रतिशत तक की वृद्धि होने का अनुमान है.

रिपोर्ट के अनुसार इसी अवधि के दौरान, स्तन कैंसर बीमारी से होने वाली वार्षिक मृत्यु दर में भी, 68 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है.

ये निष्कर्ष, नेचर मेडिसिन नामक पत्रिका में सोमवार को प्रकाशित हुए हैं जिनमें चेतावनी दी गई है कि यदि वर्तमान रुझान जारी रहे, तो दुनिया में मध्य शताब्दी तक हर साल स्तन कैंसर के 32 लाख नए मामले होंगे और इससे सम्बन्धित मौतों की संख्या 11 लाख होने का अनुमान है.

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निम्न और मध्यम आय वाले देशों में यह बोझ असमान रूप से महसूस किया जाएगा, जहाँ स्तन कैंसर की प्रारम्भिक अवस्था की पहचान करना, उसके उपचार और देखभाल तक, मरीज़ों की पहुँच सीमित है.

IARC की एक वैज्ञानिक और रिपोर्ट की सह-लेखिका डॉक्टर जोआन किम ने कहा है, "हर मिनट, दुनिया भर में चार महिलाओं में, स्तन कैंसर का निदान किया जाता है और हर मिनट इस बीमारी से एक महिला की मृत्यु हो जाती है. ये आँकड़े और भी बदतर होते जा रहे हैं."

उन्होंने बताया, "देश प्राथमिक रोकथाम नीतियों को अपनाकर इन प्रवृत्तियों को कम कर सकते हैं या उलट सकते हैं. मसलन, WHO द्वारा ग़ैर-संचारी रोग की रोकथाम के लिए सिफ़ारिशों और समय पर पता लगाने व उपचार में संसाधन निवेश करके."

एक बढ़ता वैश्विक बोझ

स्तन कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में, कैंसर की सबसे आम बीमारी बनी हुई है और कुल मिलाकर यह दूसरी सबसे आम कैंसर बीमारी है.

केवल वर्ष 2022 में ही, कैंसर के अनुमानित 23लाख नए मामलों का निदान किया गया. इस वर्ष में स्तन कैंसर के कारण 6 लाख 70 हज़ार मौतें भी हुईं. 

हालाँकि, रिपोर्ट में दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण असमानताओं को उजागर किया गया है.

सबसे अधिक दर ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, उत्तरी अमेरिका और उत्तरी योरोप में दर्ज की गई, जबकि सबसे कम दरें दक्षिण-मध्य एशिया और अफ़्रीका के कुछ हिस्सों में पाई गईं.

इस बीच, सबसे अधिक मृत्यु दर मेलानेशिया, पोलिनेशिया और पश्चिमी अफ़्रीका में दर्ज की गई, जहाँ स्वास्थ्य सेवा तक सीमित पहुँच होने की स्थिति, ख़राब परिणामों में योगदान करती है.

स्तन कैंसर से बचाव और आर्थिक विकास के बीच सम्बन्ध बहुत स्पष्ट है: उच्च आय वाले देशों में, निदान की गई 83 प्रतिशत महिलाओं की ज़िन्दगी बच जाती हैं, जबकि निम्न आय वाले देशों में, स्तन कैंसर से पीड़ित आधी से अधिक महिलाएँ इससे मृत्यु की शिकार हो जाती हैं.

कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता

WHO ने वर्ष 2021 में वैश्विक स्तन कैंसर पहल शुरू की थी, जिसका लक्ष्य स्तन कैंसर की मृत्यु दर को प्रति वर्ष 2.5 प्रतिशत कम करना है, जिससे 2040 तक 25 लाख मौतों को रोका जा सकता है.

यह पहल, शुरुआती स्तर पर ही स्तन कैंसर की पहचान करने, समय पर निदान और गुणवत्तापूर्ण उपचार तक पहुँच मुहैया कराने पर केन्द्रित है.

IARC की कैंसर निगरानी शाखा की उप प्रमुख डॉक्टर ईसाबेल सोर्जोमैटरम ने निम्न आय वाले क्षेत्रों में बेहतर नीतियाँ बनाने के लिए, उच्च गुणवत्ता वाले कैंसर डेटा की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है.

उन्होंने कहा, "स्तन कैंसर में वैश्विक अन्तर को दूर करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि दुनिया भर के सभी देश स्तन कैंसर से होने वाली पीड़ा और मृत्यु को कम करने का लक्ष्य प्राप्त कर सकें, प्रारम्भिक निदान व उपचार तक बेहतर पहुँच मुहैया कराने में निरन्तर प्रगति आवश्यक है." 

आगे का रास्ता

रिपोर्ट में मज़बूत स्वास्थ्य प्रणालियों, स्तन कैंसर की जाँच और उपचार के लिए अधिक धन मुहैया कराने व किफ़ायती रोकथाम नीतियों को अपनाए जाने के महत्व पर ज़ोर दिया गया है.

अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय, स्तन कैंसर के मामलों और उससे होने वाली मौतों में अनुमानित वृद्धि के रूप में, एक तत्काल चुनौती का सामना कर रहा है - जिसके लिए समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाखों लोगों का जीवन, ऐसी बीमारी से ख़त्म नहीं जाए जिसकी तेज़ी से रोकथाम की जा सकती है और इस बीमारी का उपचार भी किया जा सकता है.