सामाजिक न्याय क्या है, और इसे वास्तविकता बनाने में संयुक्त राष्ट्र किस तरह मदद कर रहा है?
हाल के वर्षों में सामाजिक न्याय, सार्वजनिक बहस का एक अहम मुद्दा बन चुका है, और इसे अक्सर समानता, मानवाधिकार और सामाजिक सुधारों की चर्चाओं में उठाया जाता है. लेकिन वास्तव में सामाजिक न्याय का अर्थ क्या है, और यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
संयुक्त राष्ट्र इस सिद्धान्त को स्थापित करने के लिए कई तरीक़ों से काम करता है. इसमें अर्थिक असमानता घटाना, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना, तथा मानवाधिकारों की रक्षा करना शामिल है. इसका उद्देश्य एक ऐसे विश्व का निर्माण करना है जहाँ सर्वजन को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें.
सामाजिक न्याय सभी के लिए है, इसलिए संयुक्त राष्ट्र हाशिए पर रहने वाले विशिष्ट समुदायों - शरणार्थियों, आदिवासियों और विकलांग व्यक्तियों और कमज़ोर समुदायों की आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देता है.
सामाजिक न्याय के अन्तर्गत कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं, जिन्हें हर साल 20 फ़रवरी को मनाए जाने वाले सामाजिक न्याय के विश्व दिवस के दौरान दोहराया जाता है.
समता, एकजुटता और मानवाधिकार
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ सामाजिक न्याय की परिभाषा है - राष्ट्रों के भीतर और उनके बीच, शान्तिपूर्ण एवं समृद्ध सह-अस्तित्व का एक मूलभूत सिद्धान्त." इसके मायने ये हैं कि एक ऐसा विश्व जहाँ समाज, समानता और एकजुटता के सिद्धान्तों पर आधारित हों, मानवाधिकारों को समझा जाए व महत्व दिया जाए, और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा को मान्यता दी जाए.
सामाजिक न्याय के पाँच प्रमुख सिद्धान्तों को अक्सर इस प्रकार परिभाषित किया जाता है:
- यह मानना कि विभिन्न लोगों की भिन्न-भिन्न आवश्यकताएँ एवं परिस्थितियाँ होती है (समता),
- यह सुनिश्चित करना कि हर किसी को सफल होने के लिए आवश्यक संसाधनों व अवसरों तक पहुँच हासिल हो (पहुँच),
- सभी व्यक्तियों को अपने समुदायों के राजनैतिक, आर्थिक एवं सामाजिक जीवन में भाग लेने का अवसर प्रदान करना (भागेदारी),
- सभी व्यक्तियों के मानव अधिकारों की सुरक्षा करना (अधिकार), और
- लोगों के बीच, जाति, लिंग, तथा यौन प्राथमिकता जैसी भिन्नताओं को समझना व उनका सम्मान करना, (विविधता).
सामाजिक न्याय, संयुक्त राष्ट्र की महत्वपूर्ण बुनियाद है. यह शान्ति, सुरक्षा और मानव अधिकारों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के मिशन का हिस्सा है और इसे 2030 के सतत विकास एजेंडा में शामिल किया गया है, जो शान्ति और समृद्धि का अन्तरराष्ट्रीय ख़ाका है.
यह एजेंडा, 17 महत्वाकांक्षी लक्ष्यों में विभाजित है, जिन्हें अगले पाँच वर्षों में हासिल करने की योजना है. कुछ प्रगति हुई है, विशेष रूप से अत्यधिक निर्धनता में कमी लाने और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में सुधार के सन्दर्भ में, लेकिन फ़िलहाल ये लक्ष्य प्राप्ति से बहुत दूर हैं.
लेकिन, ये लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को ऐसे स्पष्ट एवं वस्तुनिष्ठ लक्ष्य उपलब्ध करने में मददगार साबित हुए हैं, जिनसे उनके नागरिकों का जीवन बेहतर हो सके.
सभ्य कामकाज को प्रोत्साहन
संयुक्त राष्ट्र द्वारा सामाजिक न्याय को समर्थन देने का एक प्रमुख तरीक़ा है – गरिमापूर्ण आय और परिस्थितियों वाले कामकाज और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देना.
अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO), इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का सम्मानजनक कामकाज सुनिश्चित करने का लक्ष्य, रोज़गार सृजन, कार्यस्थल पर अधिकारों की गारंटी, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार, तथा सामाजिक संवाद को बढ़ावा देने पर केन्द्रित है.
ILO, न्यासंगत वेतन, कामकाज के लिए सुरक्षित परिस्थितियों, और जबरन मज़दूरी व बाल मज़दूरी ख़त्म करने की पैरोकारी करके, यह सुनिश्चित करता है कि विश्वभर के श्रमिकों के साथ गरिमा एवं सम्मान का बर्ताव किया जाए.
सभ्य कामकाज को बढ़ावा देना, 2030 एजेंडा के सतत विकास लक्ष्यों में से एक है: यानि लक्ष्य 8, जो सतत विकास लक्ष्यों (SDG 8) सर्वजन के लिए समावेशी एवं टिकाऊ आर्थिक विकास, रोज़गार एवं सभ्य कामकाज को बढ़ावा देने की मांग करता है.
लैंगिक समानता को बढ़ावा
लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय का एक और महत्वपूर्ण पहलू है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सक्रिय रूप से बढ़ावा देता है. यह एक मौलिक मानव अधिकार है और एक स्वस्थ समाज के लिए आवश्यक है.
UN Women, लैंगिक समानता और महिलाओं की मज़बूती के लिए समर्पित संयुक्त राष्ट्र संस्था है, जो महिलाओं व लड़कियों के ख़िलाफ़ भेदभाव को समाप्त करने, महिलाओं को सशक्त बनाने, तथा लैंगिक समानता हासिल करने के लिए HeForSheअभियान और Spotlight Initiativeजैसे अभियान चला रही है.
सतत विकास लक्ष्य, SDG 5 लैंगिक समानता और सभी महिलाओं व लड़कियों की मज़बूती सुनिश्चित करने की मांग करता है: संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से, बाल विवाह और महिला ख़तना जैसी समस्याओं में गिरावट देखने को मिली है. लेकिन बहुत सी महिलाएँ और लड़कियाँ अब भी अपनी आर्थिक व सामाजिक मज़बूती के रास्ते में असीम चुनौतियों का सामना कर रही हैं.
शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करना
हालाँकि हाल के वर्षों में बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की दर में थोड़ी प्रगति हुई है, फिर भी ऐसा अनुमान है कि वर्ष 2030 तक, लगभग 30 करोड़ बच्चों और युवजन के, गणित एवं साहित्य के बुनियादी कौशल से वंचित रह जाएंगे.
शिक्षा, असमानताएँ घटाने, लैंगिक समानता एवं सामाजिक न्याय हासिल करने का एक शक्तिशाली उपकरण है. संयुक्त राष्ट्र, सतत विकास लक्ष्य, SDG 4 हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो सर्वजन के लिए समावेशी व समता व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने तथा जीवन भर सीखने के अवसरों को बढ़ावा देने पर केन्द्रित है.
संयुक्त राष्ट्र, शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी प्रोत्साहन देता है, जिसका उद्देश्य, सामाजिक न्याय की पैरोकारी के लिए युवाओं में सहिष्णुता, समझ व सहनशीलता का निर्माण करना है.
मानवाधिकारों की रक्षा
संयुक्त राष्ट्र का प्राथमिक उद्देश्य है, मानव अधिकारों की रक्षा, और इसकी सबसे बड़े उपलब्धियों में से एक है, सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा (UDHR) का मसौदा तैयार करना और इसे अपनाना, जिससे मानवाधिकार क़ानून की एक व्यापक व्यवस्था के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ.
मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR), सर्वजन के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए काम करता है. साथ ही, मानवाधिकारों के उल्लंघनों की निगरानी व रिपोर्टिंग करता है, सरकारों को तकनीकी सहायता प्रदान करता है, तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के काम का समर्थन करता है.
OHCHR का काम यह सुनिश्चित करने के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि सभी व्यक्ति, भेदभाव, हिंसा, और दमन से मुक्त जीवन जी सकें.