बहुपक्षवाद: यह क्या है और यह क्यों अहम है?
बहुपक्षवाद एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल संयुक्त राष्ट्र में अक्सर किया जाता है, लेकिन यह ऐसी अवधारणा नहीं है जो केवल उन गलियारों और सम्मेलन कक्षों के लिए प्रासंगिक है जहाँ अन्तरराष्ट्रीय कूटनीति होती है.
संयुक्त राष्ट्र से परे बहुपक्षवाद, लोगों के दैनिक जीवन को कई तरह से प्रभावित करता है. यह टकरावों और युद्धों को कम करने, हमारी अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ाने और हमें दुनिया भर में सुरक्षित यात्रा करने में मदद करता है. यह जलवायु परिवर्तन और अनियमित कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी बड़ी वैश्विक समस्याओं से निपटने के लिए भी महत्वपूर्ण है.
"बहुपक्षीय" का वास्तव में क्या अर्थ है?
मूल रूप से, "बहुपक्षीय" रेखागणित का एक शब्द जिसका अर्थ होता "अनेक-पक्षीय".
अब यह शब्द, अन्तरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति को बयान करता है, जहाँ अलग-अलग विचारों और लक्ष्यों वाले अनेक देश एक साथ काम करते हैं.
संयुक्त राष्ट्र प्रणाली एक ऐसा प्रमुख बहुपक्षीय मंच है जहाँ देश वैश्विक समस्याओं को हल करने के लिए एक साथ आते हैं. वे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने के लिए सम्मेलन, शिखर सम्मेलन और बैठकें आयोजित करते हैं.
सहयोग, समझौता और समन्वय
अन्तररराष्ट्रीय मामलों में, देश मिलकर काम करते हैं (सहयोग), किन्हीं मुद्दों पर सहमते होते हैं (समझौता), और समस्याओं को हल करने के लिए अपने प्रयासों को व्यवस्थित करते हैं (समन्वय) जिन्हें कोई एक देश अकेले नहीं संभाल सकता.
ये तीन "C" विश्वास निर्माण और विवादों को शान्तिपूर्ण तरीक़े से निपटाने में मदद करते हैं.
आधुनिक दुनिया को मुमकिन बनाना
कल्पना करें कि अगर हर देश ने फ़ोन कॉल, एयरलाइंस, नौपरिवहन या पत्राचार के लिए अपनी ख़ुद की प्रणाली विकसित की होती और अन्य देशों के साथ समन्वय नहीं किया होता तो क्या होता. वैश्विक यात्रा, संचार और व्यापार एक गड़बड़ी वाली स्थिति होती. बहुपक्षवाद की बदौलत, हमारे पास अन्तरराष्ट्रीय प्रणालियाँ हैं जो इन चीज़ों को सम्भव बनाती हैं.
यह तथ्य कि हमारे पास स्वास्थ्य से लेकर डाक प्रणाली और यात्रा तक की दैनिक गतिविधियों के लिए वैश्विक मानक मौजूद हैं, बहुपक्षवाद और बहुपक्षीय संगठनों की एक श्रृंखला के निर्माण का परिणाम है, जिनमें से कई तो, 19वीं शताब्दी में स्थापित किए गए थे, और अब संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का हिस्सा बन गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र के गठन से पहले भी दो बहुपक्षीय संगठन मौजूद थे:
अन्तरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU): यह विश्व संगठन, टैलीग्राफ नैटवर्क को मानकीकृत करने के लिए, 1865 में शुरू किया गया. अब, यह रेडियो आवृत्तियों, उपग्रहों और इंटरनैट के लिए शासन में मदद करता है.
अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO): श्रमिकों के अधिकारों को बढ़ावा देने, अच्छे रोज़गार के अवसरों को प्रोत्साहित करने, सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाने और कार्य-सम्बन्धी मुद्दों पर संवाद को मज़बूत करने के लिए, 1919 में स्थापित किया गया था.
बहुपक्षीय नीतियाँ बनाना
1945 से, संयुक्त राष्ट्र ने देशों को एक साथ काम करने और महत्वपूर्ण समझौतों को वजूद में लाने में मदद की है.
इस विश्व संगठन की केन्द्रीय नीति-निर्माण शाखा महासभा है, जो अन्तरराष्ट्रीय मुद्दों पर बहुपक्षीय चर्चाओं के लिए एक अनूठा मंच है.
संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से प्रत्येक के पास समान वोट है, चाहे उनकी अर्थव्यवस्था, जनसंख्या या सैन्य शक्ति का आकार कुछ भी हो. उदाहरणस्वरूप मोनाको का वोट चीन के वोट के बराबर है.
संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियाँ
बहुपक्षवाद की एक और विशेषता - मानक-निर्धारण है. यूएन महासभा की यह मानक भूमिका है और इसने निरस्त्रीकरण, मानवाधिकार व पर्यावरण संरक्षण पर कई अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और सन्धियाँ बनाए हैं.
इसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है मानवाधिकारों की अभूतपूर्व सार्वभौमिक घोषणा का मसौदा तैयार करना और उसे पारित करना, जिसने मानवाधिकार क़ानून के एक व्यापक निकाय का मार्ग प्रशस्त किया.
दुनिया के सभी क्षेत्रों से अलग-अलग क़ानूनी और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले प्रतिनिधियों द्वारा तैयार किए गए इस घोषणा-पत्र को, महासभा ने, 1948 में घोषित किया था.
इस घोषणा-पत्र ने पहली बार मौलिक मानवाधिकारों को सार्वभौमिक रूप से संरक्षित करने की बात कही और इसने कई नए स्वतंत्र देशों व नए लोकतंत्रों के संविधानों को प्रेरित किया.
शीत युद्ध
संयुक्त राष्ट्र ने, शीत युद्ध (1940 के दशक के अन्त से 1990 के दशक के शुरू तक) के दौरान शान्ति स्थापना और हथियार नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
परमाणु युद्ध के ख़तरे के बावजूद तीसरा विश्व युद्ध रूप से टाला जा सका क्योंकि उसमें कुछ हाथ इस वास्तविकता का भी था कि संयुक्त राष्ट्र ने चर्चा और निर्णय लेने के लिए एक मंच मुहैया कराया.
संयुक्त राष्ट्र इस समय
लगभग 80 साल बाद, संयुक्त राष्ट्र अब भी दुनिया का प्राथमिक बहुपक्षीय संगठन है, जो शान्ति स्थापना से लेकर आर्थिक विकास और व्यापार तक के क्षेत्रों में अन्तरराष्ट्रीय कार्रवाई का सामंजस्य और समन्वय करता है.
संयुक्त राष्ट्र द्वारा मुहैया कराई गई और समन्वित की गई मानवीय सहायता की बदौलत, लाखों लोगों की जान बचाई गई है, जिससे टकरावों व युद्धों और आपदा क्षेत्रों में भोजन, स्वास्थ्य और आश्रय पहुँचाया गया है.
बहुपक्षीय ढाँचे का, देशों से आगे बढ़कर नागरिक समाज, युवाओं और व्यवसाय के प्रतिनिधियों को शामिल करने के लिए विस्तार किया गया है.
भविष्य का मार्ग?
सदस्य राष्ट्र अक्सर आज के वैश्विक ख़तरों और चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए संघर्ष करते हैं, जिसमें विनाशकारी गृहयुद्ध और सीमा पार युद्धों से लेकर, देशों के बीच और उनके भीतर बढ़ती आर्थिक असमानता और अनियमित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और जलवायु परिवर्तन के अस्तित्व सम्बन्धी ख़तरे शामिल हैं.
यह सुनिश्चित करना एक प्रमुख मुद्दा है कि संयुक्त राष्ट्र आने वाले दशकों में बहुपक्षवाद के लिए दुनिया के प्रमुख मंच के रूप में अपने उद्देश्य के लिए उपयुक्त बना रहे.
इसी मुद्दे के मद्देनज़र, 2020 में सदस्य राष्ट्रों ने महासचिव एंतोनियो गुटेरेश को, वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए मज़बूत वैश्विक शासन की ख़ातिर एक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए आमंत्रित किया था.
शान्ति स्थापना से लेकर अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना, शिक्षा और नीति निर्माण में युवाओं की भागेदारी जैसे क्षेत्रों में नीतिगत सुधारों जैसे विषयों को, हमारे साझा एजेंडे में शामिल किया गया.
इसमें उन्नत संयुक्त राष्ट्र के लिए सिफ़ारिशें शामिल थीं, जो अन्ततः भविष्य के लिए ऐतिहासिक समझौते में शामिल हुईं. यह समझौता सितम्बर 2024 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में हुए, ‘भविष्य के लिए शिखर सम्मेलन’ में विश्व नेताओं ने अपनाया था.
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की कार्रवाई पुकार
एंतोनियो गुटेरेश ने, महासचिव के रूप में अपने पहले वर्ष में कहा था कि क़ानून और सम्मेलन ही काफ़ी नहीं है.
उन्होंने आग्रह किया: "हमें नियम-आधारित व्यवस्था के लिए मज़बूत प्रतिबद्धता की आवश्यकता है, जिसके केन्द्र में संयुक्त राष्ट्र हो, जिसमें चार्टर को जीवन्त करने वाली विभिन्न संस्थाएँ और सन्धियाँ हों."
उन्होंने अन्य अन्तरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों के साथ आपस में गुँथे हुए बहुपक्षवाद और एक समावेशी बहुपक्षवाद का आहवान किया जो आज और आने वाले कल के परीक्षणों व ख़तरों का सामना कर सके.