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एशिया-प्रशान्त, SDG और जलवायु लक्ष्यों पर पीछे, मगर कुछ अच्छे नतीजे भी

एशिया प्रशान्त के देशों में, जलवायु परिवर्तन के गहन परिणाम देखने को मिल रहे हैं, और इन देशों की एसडीजी प्रगति भी प्रभावित हो रही है.
© UNICEF/Lasse Bak Mejlvang एशिया प्रशान्त के देशों में, जलवायु परिवर्तन के गहन परिणाम देखने को मिल रहे हैं, और इन देशों की एसडीजी प्रगति भी प्रभावित हो रही है.

एशिया-प्रशान्त, SDG और जलवायु लक्ष्यों पर पीछे, मगर कुछ अच्छे नतीजे भी

एसडीजी

एशिया प्रशान्त के लिए संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि यह क्षेत्र, टिकाऊ विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के मार्ग पर महत्वपूर्ण स्तर पर पीछे छूट रहा है. अलबत्ता, विभिन्न हैसियत वाले आर्थिक वर्गों के बारे में डेटा उपलब्धता में मौजूद अन्तराल को भरने के लिए नवाचारी और समावेशी कार्यक्रमों के कुछ अच्छे नतीजे भी मिल रहे हैं.

इस आयोग की वर्ष 2025 एसडीजी प्रगति रिपोर्ट दर्शाती है कि एक तरफ़ तो समुदाय-प्रेरित नवाचार, नीति-निर्माण प्रक्रियाओं में हाशिए पर छूटने वाली आबादी की भागेदारी सुनिश्चित करके, महत्वपूर्ण डेटा अन्तराल को भरने में मदद कर रहे हैं. 

मगर इस प्रगति के बावजूद, 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने के रास्ते में अहम चुनौतियाँ बरक़रार हैं.

एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में ज़मीनी स्तर की पहलों के ज़रिए, स्थानीय एवं समावेशी दृष्टिकोणों से डेटा की कमियों को दूर किया जा रहा है. 

भारत में ख़ानाबदोश आदिवासी जनजातियों के व्यापक सर्वेक्षण और इंडोनेशिया में सचल स्वास्थ्य निगरानी ऐप जैसी पहलों ने यह प्रदर्शित किया है कि नवाचारी कार्यप्रणालियाँ, एसडीजी की निगरानी को अधिक प्रभावी बना सकती हैं.

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संयुक्त राष्ट्र की अवर महासचिव और ESCAP की कार्यकारी सचिव, आर्मिदा साल्सिया अलिसजाहबाना ने कहा है, “डेटा उपलब्धता में अन्तराल अब भी बने हुए हैं, जिससे कुछ सबसे कमज़ोर आबादियाँ आधिकारिक आँकड़ों में जगह पाने से रह जाती हैं."

"इससे नीति निर्माता उनकी आवश्यकताओं पर प्रभावी रूप ध्यान नहीं कर पाते हैं. सांख्यिकीय प्रणालियों के आधुनिकीकरण के लिए सीमित संसाधनों के कारण, अतिरिक्त बाधाएँ उत्पन्न होती हैं. यदि प्रगति को तेज़ करने के लिए तत्काल क़दम नहीं उठाए गए, तो कई सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति अधूरी रह जाएगी.”

हालाँकि रिपोर्ट में आमदनी से सम्बन्धित निर्धनता में कमी (लक्ष्य 1), कुपोषण से निपटने (लक्ष्य 2), लघु उद्योगों को बढ़ावा देने (लक्ष्य 9), भूमि क्षरण घटाने (लक्ष्य 15), और मानव तस्करी से निपटने (लक्ष्य 16) में प्रगति हुई है. 

लेकिन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (लक्ष्य 4), सभ्य कामकाज व आर्थिक प्रगति (लक्ष्य 8), तथा सतत खपत और उत्पादन (लक्ष्य 12) को हासिल करने में महत्वपूर्ण चुनौतियाँ बनी हुई हैं.

पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ

रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरणीय क्षरण, जीवाश्म ईंधन के अनुदान में वृद्धि, और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता से,जलवायु कार्रवाई (लक्ष्य 13), जल के नीचे जीवन (लक्ष्य 14) और भूमि पर जीवन (लक्ष्य 15) जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के क्षेत्रीय प्रयासों में बाधा पड़ रही है. 

इसके अतिरिक्त, ग्रामीण, निम्न-आय व हाशिए पर रहने वाली आबादी के लिए, स्वच्छ जल, स्वच्छता व ऊर्जा जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुँच में असमानताएँ बनी हुई है.

रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार, आयु, लिंग, शिक्षा और आर्थिक स्थिति जैसे कारक असमानताओं को और अधिक गहरा बना रहे हैं. 

इससे ग़रीबी व शिक्षा का स्तर, अवसरों में असमानता का प्रमुख कारण बन गया है. शिक्षा के कम स्तर वाले ग्रामीण समुदाय महत्वपूर्ण संसाधनों तक पहुँचने में सबसे अधिक बाधाओं का सामना कर रहे हैं.

उन्नत डेटा प्रणाली की आवश्यकता

ESCAP ने, सरकारों से नवाचारी और समावेशी डेटा संग्रह विधियों में संसाधन निवेश करने का आग्रह किया है, ताकि अधिक विस्तृत एवं विभाजित डेटा के ज़रिए, साक्ष्य-आधारित नीतिगत निर्णय लिए जा सकें. 

राष्ट्रीय सांख्यिकीय प्रणालियों को सशक्त बनाना, विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना, और राजनैतिक तथा वित्तीय प्रतिबद्धता सुनिश्चित करना, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति को तेज़ करने के लिए आवश्यक है.

एक वार्षिक प्रमुख प्रकाशन के रूप में, एशिया और प्रशान्त एसडीजी प्रगति रिपोर्ट 2025 में, नवीनतम एसडीजी संकेतक डेटा का उपयोग करके क्षेत्रीय प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है. 

यह रिपोर्ट, नीति-निर्माताओं को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मार्गदर्शन प्रदान करती है. 

यह रिपोर्ट साथ ही, डेटा की उपलब्धता में अन्तराल पाटने और सतत विकास निगरानी को मज़बूत करने के लिए चल रहे प्रयासों को भी मान्यता देती है.