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‘यूक्रेन की सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सर्वोपरि’, सुरक्षा परिषद में चर्चा

यूएन एजेंसियाँ युद्धग्रस्त देश यूक्रेन के विभिन्न इलाक़ों में, मानवीय सहायता पहुँचाने में सक्रिय हैं.
© WFP/Niema Abdelmageed
यूएन एजेंसियाँ युद्धग्रस्त देश यूक्रेन के विभिन्न इलाक़ों में, मानवीय सहायता पहुँचाने में सक्रिय हैं.

‘यूक्रेन की सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सर्वोपरि’, सुरक्षा परिषद में चर्चा

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र के राजनैतिक मामलों के एक वरिष्ठ अधिकारी मिरोस्लाव जेनका ने कहा है कि यूक्रेन में किसी भी शान्ति समझौते में, यूएन चार्टर और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार देश की सम्प्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना होगा.

संयुक्त राष्ट्र के राजनैतिक व शान्तिनिर्माण विभाग (DPPA) में, योरोप मामलों के अवर महासचिव मिरोस्लाव जेनका ने, सोमवार को सुरक्षा परिषद की बैठक में ज़ोर देकर कहा कि कूटनैतिक प्रयासों को न्यायपूर्ण और स्थाई शान्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केन्द्रित करना होगा.

मिरोस्लाव जेनका ने, यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के तीन वर्ष पूरे होने के अवसर पर, सुरक्षा परिषद की इस बैठक में यह बात कही है.

यूक्रेन व रूस की पूर्ण भागेदारी

उन्होंने कहा, "संयुक्त राष्ट्र सभी हितधारकों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करता है और शान्ति वार्ता में, यूक्रेन व रूसी संघ की पूर्ण भागेदारी के साथ, ऐसे सभी वास्तविक प्रयासों और पहलों का स्वागत करता है, जो आम लोगों पर युद्ध के प्रभाव को कम करें और युद्ध को कम करें."

उन्होंने महासचिव महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के इस रुख़ को भी दोहराया कि "किसी भी शान्तिपूर्ण समझौते में, संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून व महासभा के प्रस्तावों के अनुरूप, यूक्रेन की सम्प्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना होगा."

सुरक्षा परिषद का यह सत्र उसके प्रस्ताव 2202 की 10वीं वर्षगाँठ के साथ मेल खाता है, जिसने 2015 में हुए और अब निष्क्रिय हो चुके मिंस्क समझौते को स्वीकृत किया था.

मिंस्क समझौते पर, रूस द्वारा क्रीमिया पर क़ब्ज़ा किए जाने के बाद के हालात में, योरोपीय सुरक्षा समझौते – OSCE, रूस, यूक्रेन और क्रीमिया में रूस समर्थक अलगाववादियों ने दस्तख़त किए थे.

सर्वसम्मति से अपनाए गए प्रस्ताव 2202 में “उपायों का एक पैकेज” शामिल था जिसमें यूक्रेन के दोनेत्स्क औरर लूहांस्क क्षेत्रों में तत्काल और व्यापक युद्धविराम लागू किए जाने के साथ-साथ, दोनों पक्षों द्वारा एक सुरक्षा क्षेत्र बनाने के लिए, समान दूरी पर सभी भारी हथियारों को वापस लेने जैसे उपाय भी शामिल थे.

एक कठोर अनुस्मारक

मिरोस्लाव जेनका ने कहा कि यह वर्षगाँठ, रूस और यूक्रेन के बीच तनाव कम करने के लिए पिछले कूटनैतिक प्रयासों की कठोर याद दिलाती है,

और यह समय, अन्तरराष्ट्रीय कूटनीति के माध्यम से, शान्ति स्थापित करने में विफल रहने के परिणामों पर विचार करने का अवसर है.

उन्होंने युद्धविराम उल्लंघनों पर नज़र रखने और संवाद को सुविधाजनक बनाने में आठ वर्षों के काम के लिए, OSCE विशेष निगरानी मिशन की सराहना की, और कहा कि यह अनुभव भविष्य के कूटनैतिक प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण सबक़ देता है.

मिरोस्लाव जेनका ने कहा, "मिंस्क समझौतों ने हमें सिखाया है कि युद्धविराम पर सहमत होना या केवल किसी समझौते पर हस्ताक्षर करना ही, हिंसा का स्थाई अन्त सुनिश्चित नहीं करता है."

"यह सुनिश्चित करना कि युद्ध फिर से नहीं हो और ना ही बढ़े, इसके लिए यूक्रेन और क्षेत्र के लिए वास्तविक राजनैतिक इच्छाशक्ति व इसकी बहुआयामी जटिलता की समझ की आवश्यकता होगी."