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अफ़्रीका: अपार सम्भावनाओं को साकार करने के लिए, 'अतीत के अन्यायों से निपटने' का आहवान

यूएन महासचिव ने इथियोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में अफ़्रीकी संघ की शिखर बैठक को सम्बोधित किया.
UNECA/Daniel Getachew
यूएन महासचिव ने इथियोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में अफ़्रीकी संघ की शिखर बैठक को सम्बोधित किया.

अफ़्रीका: अपार सम्भावनाओं को साकार करने के लिए, 'अतीत के अन्यायों से निपटने' का आहवान

आर्थिक विकास

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि अफ़्रीका महाद्वीप व यहाँ की युवा आबादी सम्भावनाओं से परिपूर्ण है, जिन्हें साकार करने के लिए अतीत के अन्यायों से निपटना और वैश्विक सुधारों को अपनाए जाने की ज़रूरत है. उन्होंने शनिवार को इथियोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में अफ़्रीकी संघ की उच्चस्तरीय शिखर बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि हिंसक टकरावों व जलवायु संकट पर लगाम कसनी होगी, न्यायसंगत वित्तीय तंत्र को विकसित करना होगा और टैक्नॉलॉजी के लाभ हर किसी तक पहुँचाने होंगे. 

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने संयुक्त राष्ट्र और अफ़्रीकी संघ के बीच मज़बूत साझेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि यहाँ युवाओं की सबसे बड़ी आबादी है, जो उद्यमी है और फल-फूल रही है. अफ़्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र, क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नया आकार दे रहा है.

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि यह नहीं भूलना होगा कि अफ़्रीका ने दो विशाल अन्यायों को झेला है: औपनिवेशवाद और पार-अटलांटिक दास व्यापार. औपनिवेशवाद का इतिहास कई सदियों पुराना है, जिसके दुष्परिणाम आज भी अफ़्रीका व अफ़्रीकी मूल के लोगों को भुगतने पड़ रहे हैं.

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उन्होंने ध्यान दिलाया कि औपनिवेशिक शासन का समाप्त होना अपने आप में कोई समाधान साबित नहीं हुआ और मुआवज़े के लिए न्याय तंत्रों को विकसित किया जाना होगा.

महासचिव के अनुसार, जब बहुपक्षीय प्रणाली को तैयार किया जा रहा था तो अफ़्रीकी देश, औपनिवेशिक बोझ में दबे हुए थे औ​र यह अन्याय अब भी मौजूद है.

यूएन प्रमुख ने कहा कि 21वीं सदी में सुरक्षा परिषद में अफ़्रीका के लिए स्थाई प्रतिनिधित्व ना होने के लिए कोई बहाना नहीं है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अतीत के अन्यायों को सही करना, मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए बेहद ज़रूरी है. इस क्रम में, उन्होंने अफ़्रीकी संघ व सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर प्रयास करने की बात कही, ताकि अफ़्रीका के लिए ज़रूरी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके. इनमें सुरक्षा परिषद में दो स्थाई सीट भी हैं.

यूएन प्रमुख ने वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सुधारों पर भी बल दिया, और एक कारगर, न्यायसंगत व नए सिरे से तंत्र विकसित करने के लिए प्रयास जारी रखने पर बल दिया. एंतोनियो गुटेरेश ने अपने सम्बोधन में कार्रवाई के लिए चार अहम क्षेत्रों का उल्लेख किया.

चार क्षेत्रों में कार्रवाई

पहला, शान्ति व सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी और अपार मानव पीड़ा को दूर करने के लिए प्रयास जारी रखने होंगे.

“सूडान, हमारी आँखों के सामने ढह रहा है और विश्व में सबसे बड़ा विस्थापन व अकाल संकट है. रमदान के महीने से पहले, यह हिंसक टकराव पर तुरन्त विराम लगाने का समय है.” उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि देश में हथियारों की ख़रीद-फ़रोख़्त और रक्तपात के लिए धनराशि के प्रवाह पर रोक लगानी होगी.

यूएन प्रमुख ने कहा कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य के साउथ कीवू में एम23 लड़ाकों का आगे बढ़ना व हमले करना जारी है, जिससे पूरे देश के हिंसा के गर्त में धँसने का ख़तरा है. इस क्षेत्रीय टकराव से हर हाल में बचा जाना होगा. उन्होंने कहा कि इसका कोई सैन्य समाधान नहीं है.

दूसरा, अफ़्रीकी संघ के 2063 एजेंडा और टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा को हासिल करने के लिए एक साथ मिलकर काम करना होगा और वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था की जानी होगी.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि विकसित देशों की तुलना में अफ़्रीकी देश, कर्ज़ चुकाने के लिए आठ गुना अधिक भुगतान करते हैं और इस महाद्वीप पर 20 देशों को कर्ज़ संकट से जूझना पड़ रहा है.

तीसरा, जलवायु संकट. अफ़्रीकी देश जलवायु आपदाओं का दंश भुगत रहे हैं, जिससे ज़िन्दगियाँ व अर्थव्यवस्थाएँ तबाह हो रही हैं और हिंसक टकरावों को हवा मिल रही है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, आदिस अबाबा में अन्य अफ़्रीकी देशों के नेताओं के साथ.
UNECA/Daniel Getachew
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, आदिस अबाबा में अन्य अफ़्रीकी देशों के नेताओं के साथ.

महासचिव ने कहा कि अफ़्रीकी देशों का जलवायु संकट में कोई योगदान नहीं है, मगर उन्हें सूखे, बाढ़ व अभूतपूर्व गर्मी के रूप में इसकी विशाल क़ीमत चुकानी पड़ रही है. इसके मद्देनज़र, उन्होंने अनुकूलन में व्यापक निवेश पर बल दिया, जिसमें अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की भी एक बड़ी ज़िम्मेदारी है.

चौथा, महासचिव गुटेरेश ने कृत्रिम बुद्धिमता समेत अन्य नई टैक्नॉलॉजी के लाभ हर किसी तक पहुँचाने के लिए भी क़दम उठाने की आवश्यकता है. फ़िलहाल, दो-तिहाई अफ़्रीकी आबादी के पास इंटरनैट तक भरोसेमंद पहुँच नहीं है.

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता के फ़ायदों को मानवता के लिए सुनिश्चित करने का यह एक ऐतिहासिक अवसर है, ताकि इसकी क्षमता केवल चुनिन्दा देशों व कम्पनियों तक ही सीमित ना रह सके.