विश्व हिन्दी दिवस: वैश्विक भाषाई कुंजी के रूप में हिन्दी की महत्ता का जश्न
संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक संचार विभाग (DGC) की मुखिया और अवर महासचिव मैलिसा फ़्लेमिंग ने कहा है कि भाषा दुनिया के लिए हमारी कुंजी है जो विभिन्न संस्कृतियों को आपस में जोड़ती है, नवाचार को स्फूर्ति देती है, और राजनय व बहुपक्षवाद के लिए टिकाऊ बुनियाद तैयार करती है. इसी कारण से, हिन्दी भाषा भी संयुक्त राष्ट्र के लिए बहुत अहम है.
मैलिसा फ़्लेमिंग ने, यह बात विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर कही जिसका आयोजन, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन ने, गुरूवार (13) फ़रवरी को न्यूयॉर्क में किया.
विश्व हिन्दी दिवस हर वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है और इसका आरम्भ 2006 में हुआ था.
संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक संचार विभाग की प्रमुख मैलिसा फ़्लेमिंग ने कहा कि आज के समय में, दुनिया भर में लगभग 60 करोड़ लोग हिन्दी बोलते और समझते हैं, जिससे इस भाषा की विशालता नज़र झलकती है जोकि दुनिया में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है.
मैलिसा फ़्लेमिंग ने अपना सम्बोधन हिन्दी में – ‘नमस्कार दोस्तो’ के साथ आरम्भ करते हुए कहा कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र समाचार की एक भाषा बनाए जाने से, इस विश्व संगठन की गतिविधियाँ हिन्दी भाषियों के और निकट पहुँचने लगी हैं.
इससे नए दृष्टिकोण आसान होते हैं और बहुभाषावाद के साथ-साथ बहुपक्षवादी दुनिया में योगदान मिलता है. साथ ही, विभिन्न संस्कृतियों के लोगों के बीच, विचारों का आदान-प्रदान मज़बूत होता है.
उन्होंने कहा कि हम इसी सन्दर्भ में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी के प्रयोग का विस्तार करने के प्रयासों का उत्सव मना रहे हैं.
भारत के स्थाई मिशन व संयुक्त राष्ट्र के सार्वजनिक सूचना विभाग के सहयोग से 2018 से चलाए जा रही Hindi@UN परियोजना के ज़रिए, हिन्दी भाषियों में भी, संयुक्त राष्ट्र के बारे में और अधिक जागरूकता फैलाई जा रही है और संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था में हिन्दी के प्रयोग का विस्तार किया जा रहा है.
बहुभाषावाद और बहुपक्षवाद
मैलिसा फ़्लेमिंग ने कहा कि आज की दुनिया में कोई भी देश, हमारे साझा लक्ष्यों को अकेले प्राप्त नहीं कर सकता, या वैश्विक समस्याओं पर पार पा सकता है.
“इसीलिए संयुक्त राष्ट्र, बहुपक्षवादी व्यवस्था में एक नई जान फूँकने और हमारे साझा भविष्य को फिर से पटरी पर लाने लिए प्रयास कर रहा है.”
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों में अन्तरराष्ट्रीय ढाँचों में नई स्फूर्ति भरने और सुधार लागू करने के रास्तों की तलाश भी शामिल है, ताकि इन्हें वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए, सटीक और उपयुक्त बनाया जा सके.
मैलिसा फ़्लेमिंग ने कहा, “इसलिए आइए, हम अपनी नज़रें उस भविष्य पर टिकाएँ और मुझे आशा है कि आप यह सन्देश दुनिया में, हिन्दी और अन्य तमाम भाषाओं में फैलाने में, मेरी आवाज़ में आवाज़ मिलाएंगे.”
उन्होंने एक बेहतर दुनिया की ख़ातिर रचनात्मक समाधानों पर अपने ध्यान केन्द्रित करने की पुकार लगाई और ऐसे विचारों का जश्न मनाने पर ज़ोर दिया जिससे हमें अपने वादे पूरे करने में मदद मिले – निर्धनता की समाप्ति, पृथ्वी ग्रह का संरक्षण, और किसी को भी पीछे नहीं छोड़ देने के वादे.
हिन्दी की वैश्विक भाषाई महत्ता
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत पी हरीश ने भी विश्व हिन्दी दिवस पर ध्यान आकर्षित किया कि हिन्दी भाषा को इस विश्व संगठन की ग़ैर-आधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल किया गया है, जिससे हिन्दी भाषा की महत्ता और भी बढ़ती है.
उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दी दिवस उस दिन की याद दिलाता है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में 1949 में पहली बार हिन्दी बोली गई थी, और इसका उद्देश्य हिन्दी भाषा के बारे में जागरूकता बढ़ाना, इसके उपयोग को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर इस भाषा के विद्वानों व लेखकों के योगदान को मान्यता प्रदान करना है.
राजदूत पी हरीश ने कहा कि इस वर्ष का विश्व हिन्दी दिवस – “एकता और सांस्कृतिक गौरव की वैश्विक आवाज़” थीम के तहत मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य हिन्दी भाषा के उपयोग द्वारा भाषाई और वैश्विक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना है.
उन्होंने कहा कि हिन्दी, भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है जिसे लगभग 45 करोड़ लोग, अपनी मूल भाषा के रूप में प्रयोग करते हैं.
अंग्रेज़ी और मन्दारिन (चीनी) भाषाओं के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी भाषा हिन्दी, भारत के जीवन्त सांस्कृतिक परिदृश्य का पर्याय बन गई है, और भारत के प्रवासी समुदाय तथा बॉलीवुड और उच्च कोटि के साहित्य की लोकप्रियता के बल पर, भौगोलिक सीमाओं को पार करके, दुनिया भर में एक लोकप्रिय भाषा के रूप में उभरी है.