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पश्चिमी तट में इसराइल के निरन्तर हमलों की निन्दा

एक लड़का वेस्ट बैंक के जेनिन शरणार्थी शिविर में एक ध्वस्त इमारत के मलबे से होकर गुजर रहा है।
© UNICEF/Alaa Badarneh ग़ाज़ा

पश्चिमी तट में इसराइल के निरन्तर हमलों की निन्दा

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय - OHCHR ने पश्चिमी तट के उत्तरी हिस्से में, इसराइल के सैन्य हमलों की निन्दा की है और चेतावनी दी कि हिंसा और विनाश की “ख़तरनाक लहर” के बीच लगभग 40 हज़ार फ़लस्तीनी पहले ही विस्थापित हो चुके हैं. उधर यूएन सहायता कर्मी, ग़ाज़ा पट्टी में 15 महीने तक जारी रही इसराइली बमबारी से उत्पन्न, विशाल स्तर की आवश्यकताओं के बीच, सहायता पहुँचाना जारी रखे हुए हैं.

यूएन मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, इसराइली बलों ने फ़लस्तीनी क्षेत्र पश्चिमी तट में, 21 जनवरी को अपने आक्रमण शुरू करने के बाद, जेनिन, तुलकरेम और तुबास प्रान्तों तथा उन क्षेत्रों में चार शरणार्थी शिविरों में, कम से कम 44 फ़लस्तीनियों को मार दिया है. 

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मृतकों में पाँच बच्चे और दो महिलाएँ भी हैं. 

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने कहा कि मारे गए लोगों में से कई के पास कोई हथियार नहीं थे तथा उनसे कोई ख़तरा नहीं था.

मानवाधिकार कार्यालय ने, फ़लस्तीनी लोगों की इन मौतों को, पश्चिमी तट पर इसराइल द्वारा बल के अवैध प्रयोग के बढ़ते चलन का हिस्सा बताया, जहाँ युद्ध की स्थिति नहीं है.

‘अभूतपूर्व’ विस्थापन

OHCHR ने इसराइल के क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट पर, अभूतपूर्व पैमाने पर हो रहे विस्थापन पर भी प्रकाश डाला है, जितना दशकों में नहीं देखा गया है. 

मानवाधिकार कार्यालय ने, विस्थापित निवासियों के बयानों का हवाला दिया है जिनमें बताया गया कि इसराइल बलों ने ने उन्हें, हिंसा और ड्रोन हमलों की धमकी के तहत उनके घरों से बाहर निकाल दिया है.

कार्यालय ने कहा कि फिर उन्हें उनके शहरों से भी बाहर निकाल दिया जाता है, उनके आस-पास की छतों पर बन्दूक निशानची तैनात किए जाते हैं और उनकी बस्तियों में घरों को, इसराइली बल, निशाना लगाने के लिए ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करते हैं.

मानवाधिकार कार्यालय ने, फ़लस्तीनी लोगों की इन मौतों को, पश्चिमी तट पर इसराइली बलों के अवैध प्रयोग के बढ़ते चलन का हिस्सा बताया, जहाँ युद्ध की स्थिति नहीं है.

OHCHR ने इसराइल के क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट में, अभूतपूर्व पैमाने पर हो रहे विस्थापन पर भी प्रकाश डाला है, जितना दशकों में नहीं देखा गया है. 

हिंसा और ड्रोन हमलों की धमकियाँ

मानवाधिकार कार्यालय ने, विस्थापित निवासियों के बयानों का हवाला दिया है जिनमें बताया गया कि इसराइली बलों ने, हिंसा और ड्रोन हमलों की धमकी देकर उन्हें, उनके घरों से बाहर निकाल दिया है.

मानवाधिकार कार्यालय ने कहा कि फिर इन फ़लस्तीनियों को उनके शहरों से भी बाहर निकाल दिया जाता है, उनके आस-पास की छतों पर बन्दूक निशानची तैनात किए जाते हैं और उनकी बस्तियों में घरों को, इसराइली बल, निशाना लगाने के लिए ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करते हैं.

OHCHR द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्यों में बताया गया है कि इसराइली सेना निवासियों को धमका रही थी और उन्हें बताया गया था कि उन्हें कभी भी वापस नहीं आने दिया जाएगा.

अपने दो छोटे बच्चों को लेकर नंगे पैर भागने को विवश हुई एक महिला ने बताया कि उसे अपने बच्चे के लिए हृदय की दवा लेने की अनुमति नहीं दी गई.

जेनिन शरणार्थी शिविर में, बुलडोज़र से बनाई गई सड़कों की तस्वीरों में, नए सड़क संकेत नज़र आए हैं, जो अब कथित तौर पर हिब्रू में लिखे नज़र आ रहे हैं.

OHCHR ने कहा, "इस सम्बन्ध में, हम दोहराते हैं कि इसराइल के क़ब्ज़े वाले क्षेत्र से लोगों का जबरन स्थानान्तरण किया जाना या निर्वासन सख़्त वर्जित है और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपराध है." 

विस्थापित फिलिस्तीनी उत्तरी गाजा लौट रहे हैं, वे 'गाजा में आपका स्वागत है' लिखे बैनर के पास से गुजर रहे हैं, जिसके पृष्ठभूमि में नष्ट हुई इमारतें दिखाई दे रही हैं।
© WHO

क़ानूनी दायित्व

यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने ज़ोर देकर कहा है कि विस्थापित फ़लस्तीनियों को उनके घरों में लौटने की अनुमति दी जानी होगी और आम लोगों की मौत की तत्काल, पारदर्शी जाँच का आहवान भी किया है.

OHCHR ने कहा है, "यदि सैन्य कमांडर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी ग़ैरक़ानूनी मौतों को रोकने या दंडित करने के लिए सभी आवश्यक व उचित उपाय करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें अपने अधीनस्थों द्वारा किए गए अपराधों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है."

OHCHR ने अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत इसराइल के दायित्वों को भी दोहराया, जिनमें क़ब्ज़े वाले फिलस्तीनी क्षेत्र में, अपनी ग़ैरक़ानूनी उपस्थिति को यथासम्भव तेज़ी से समाप्त करना और पश्चिमी तट की सभी बस्तियों को तुरन्त ख़ाली करना शामिल है.

कार्यालय ने कहा, "इस बीच इसराइल को एक क़ाबिज़ शक्ति के रूप में, फ़लस्तीनियों की सुरक्षा, बुनियादी सेवाओं और ज़रूरतें पूरी किए जाने का प्रावधान व फ़लस्तीनियों के मानवाधिकारों की पूरी श्रृंखला का सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए."

ग़ाज़ा में सहायता जारी

उधर, विश्व खाद्य कार्यक्रम – WFP ने शुक्रवार को बताया है कि उसने ग़ाज़ा में 19 जनवरी को युद्धविराम लागू होने के बाद, 8 लाख 60 हज़ार से अधिक लोगों को भोजन पार्सल, तैयार भोजन, ब्रैड और नक़दी की सहायता मुहैया कराई है. लाभान्वितों में महिलाएँ और बच्चे भी हैं.

एजेंसी ने पिछले दो सप्ताह में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं सहित लगभग 85 हज़ार लोगों को, पोषण पैक वितरित किए हैं, और 90 हज़ार से अधिक लोगों को नक़दी सहायता प्रदान की है.

प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा, "ख़ासकर उत्तरी ग़ाज़ा में अधिक खाद्य वितरण केन्द्र स्थापित करने के प्रयास भी चल रहे हैं, ताकि यात्रा की दूरी, परिवहन लागत और परिवारों के लिए सुरक्षा जोखिम को कम किया जा सके."

उन्होंने बताया है कि WFP की लगभग 19 हज़ार मीट्रिक टन खाद्य सामग्री, ग़ाज़ा में पहुँची है. WHO ने भी, शुक्रवार को, ग़ाज़ा के अस्पतालों में एक लाख लीटर ईंधन पहुँचाया है.