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यमन: युद्ध का अन्त करने के लिए, 'राजनैतिक समाधान को हासिल करना सम्भव'

यमन में हिंसक टकराव के कारण विशाल मानवीय संकट उपजा है.
© UNDP
यमन में हिंसक टकराव के कारण विशाल मानवीय संकट उपजा है.

यमन: युद्ध का अन्त करने के लिए, 'राजनैतिक समाधान को हासिल करना सम्भव'

शान्ति और सुरक्षा

यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने कहा है कि यमन में स्थाई शान्ति अब भी सम्भव है, मगर इसे हासिल करने के लिए सभी पक्षों के संकल्प, साहस की आवश्यकता होगी. उन्होंने गुरूवार को सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों को देश में राजनैतिक घटनाक्रम पर जानकारी देते हुए यह बात कही है.

यमन में हूथी लड़ाकों (अंसार अल्लाह) और सऊदी अरब के नेतृत्व में सरकारी सुरक्षा बलों के बीच पिछले एक दशक से अधिक समय से लड़ाई हो रही है. विशेष दूत ने बताया कि ग़ाज़ा पट्टी में युद्धविराम लागू होना, मध्य पूर्व क्षेत्र में नाज़ुक हालात के बीच उठाया गया एक ठोस क़दम है.

“हमने लाल सागर में जहाज़ों पर और इसराइल में अंसार अल्लाह गुट के हमलों को बन्द होते देखा है.” उन्होंने कहा कि टकराव में आई कमी और मोटर वैसेल गैलेक्सी लीडर नामक जहाज़ के चालक दल के सदस्यों को छोड़ा जाना, राहत की बात है.

हैंस ग्रुंडबर्ग ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि टकराव में कमी लाने के लिए इस अवसर का लाभ उठाना होगा, हालांकि विशाल चुनौतियाँ अब भी बरक़रार हैं.

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उन्होंने चिन्ता जताई कि जनवरी महीने में हूथी लड़ाकों द्वारा यूएन कर्मचारियों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने की चौथी लहर देखने को मिली है, जोकि बेहद परेशान कर देने वाला है.

हूथी विद्रोहियों ने संयुक्त राष्ट्र, ग़ैर-सरकारी संगठनों, नागरिक समाज और दूतावासों के कर्मचारियों को हिरासत में रखा हुआ है, जिनमें से कई पिछले कुछ साल से बन्दी हैं.

विशेष दूत ने ध्यान दिलाया कि ये ना केवल उनके बुनियादी मानवाधिकार का उल्लंघन है बल्कि यमन में लाखों ज़रूरतमन्दों तक मानवीय सहायता पहुँचाने की यूएन की क्षमता पर ख़तरा भी है.

उन्होंने हाल ही में हिरासत में लिए गए विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के कर्मचारी की मौत की जाँच कराए जाने और दोषियों की जवाबदेही तय किए जाने का आग्रह किया.

चुनौतीपूर्ण हालात

विशेष दूत ने बताया कि यमन में सैन्य गतिविधियाँ जारी हैं और लड़ाई के अग्रिम मोर्चों पर सैनिकों व साज़ोसामान को जमा किए जाने की ख़बरें हैं. साथ ही, हूथी लड़ाकों ने अनेक इलाक़ों में गोलाबारी, ड्रोन हमले और घुसपैठ की कोशिशें की हैं.

हैंस ग्रुंडबर्ग ने सभी युद्धरत पक्षों से आग्रह किया कि बदला लेने के इरादे से उठाए गए किसी भी ऐसे क़दम से बचना होगा, जिससे तनाव बढ़े और यमन फिर से हिंसक टकराव में धँस जाए.

उन्होंने देश में बिगड़ते आर्थिक हालात के प्रति भी गहरी चिन्ता जताई है, जिससे अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार व हूथी लड़ाकों के नियंत्रण वाले इलाक़े प्रभावित हो रहे हैं. 

अदन शहर, यमन सरकार के नियंत्रण में है, मगर वहाँ पिछले सप्ताह तीन दिनों तक बिजली आपूर्ति ठप रही है, जिसके विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए. यमन की मुद्रा में भी गिरावट आई है, जिससे क़ीमतों में उछाल आया है.

आतंकी गुट के रूप में चिन्हित

हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने हूथी विद्रोहियों को एक विदेशी आतंकी संगठन के रूप में चिन्हित किए जाने की घोषणा की. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने इस विषय में एक कार्यकारी आदेश पर 22 जनवरी को हस्ताक्षर किए थे, जोकि 30 दिनों के भीतर लागू हो जाएगा.

हैंस ग्रुंडबर्ग ने बताया कि इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण की मांग की गई है, मगर यह ज़रूरी है कि शान्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के हमारे प्रयासों की रक्षा की जाए.

पिछले एक महीने के दौरान, यूएन दूत ने सभी क्षेत्रीय व अन्तरराष्ट्रीय पक्षों के साथ अपनी बातचीत जारी रखी है. उन्होंने कहा कि स्थाई शान्ति की आकाँक्षाओं को पूरा किया जा सकता है, यह सम्भव है और व्यावहारिक भी.

लाखों ज़रूरतमन्द

मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) के प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने मृतक WFP कर्मचारी का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में मानवीय सहायताकर्मियों की रक्षा सुनिश्चित की जानी होगी.

उनके अनुसार, देश में 1.95 करोड़ लोगों को समर्थन की आवश्यकता है, लाखों लोग भूख से पीड़ित हैं और उन्हें गम्भीर बीमारियों का जोखिम है. 70 फ़ीसदी से अधिक ज़रूरतमन्द महिलाएँ व बच्चे हैं.

पिछले महीने ही, WFP ने बताया था कि यमनी आबादी का 64 फ़ीसदी हिस्सा अपनी खाद्य आवश्यकताओं को पूरा कर पाने में असमर्थ है, और नवम्बर महीने की तुलना में यह तीन प्रतिशत अंकों की वृद्धि को दर्शाता है.

32 लाख बच्चे स्कूली शिक्षा से वंचित हैं, जबकि पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की आधी आबादी कुपोषण का शिकार है.

टॉम फ़्लैचर ने कहा कि तमाम जोखिमों के बावजूद, यमन में मानवीय सहायता प्रयास जारी हैं, हालांकि यूएन कर्मचारियों को हिरासत में लिए जाने की वजह से कुछ कड़े निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़ा है.

यूएन ने सुरक्षा चुनौतियों की वजह से सआदा गवर्नरेट में अपने राहत अभियान को अस्थाई तौर पर रोक दिया है, मगर सुरक्षा गारंटी पाने की कोशिश की जा रही है, ताकि जल्द इसे फिर शुरू किया जा सके.