सीरिया में लोकतंत्र के लिए, सभी को एक साथ लेकर चलने का आग्रह
सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गेयर पैडरसन ने देश में कार्यवाहक प्रशासन से आग्रह किया है कि लोकतांत्रिक शासन की ओर क़दम बढ़ाने की प्रक्रिया को समावेशी बनाए जाने की आवश्यकता है. उन्होंने बुधवार को सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों को सम्बोधित करते हुए आगाह किया कि पारदर्शिता, क़ानून का राज, निष्पक्ष चुनाव को सुनिश्चित किया जाना मुख्य चिन्ताएँ हैं.
विशेष दूत पैडरसन ने कहा कि अन्तरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने अनेक संकल्प व्यक्त किए हैं, मगर सीरियाई नागरिक ठोस बदलावों को देखना चाहते हैं.
“मैं जितने भी सीरियाई नागरिकों से मिला...उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वे संस्थागत नियुक्तियाँ, संक्रमणकालीन सरकार, प्रावधानिक विधायिका, राष्ट्रीय सम्वाद प्रक्रिया और किसी भी प्रकार की तैयारी के लिए समितियाँ चाहते हैं, और इन्हें विश्वसनीय व समावेशी बनाना होगा.”
गेयर पैडरसन के अनुसार, सीरियाई महिलाएँ, विशेष रूप से, और अधिक संरक्षण का अनुरोध कर रही हैं.
“वे मुख्य पदों पर निर्णय-निर्धारण और नियुक्तियों में अर्थपूर्ण भागेदारी चाहती हैं, अपनी योग्यता के अनुरूप, ताकि संक्रमणकालीन संस्थाओं में हिस्सा ले सकें और अपने परिप्रेक्ष्यों को व्यक्त कर सकें.”
सुरक्षा व आर्थिक जोखिम
सीरिया में नाज़ुक सुरक्षा हालात से देश मे राजनैतिक प्रक्रिया के लिए जोखिम उत्पन्न हो रहा है. विशेष दूत पैडरसन ने कहा कि पूर्वोत्तर में अब भी टकराव जारी है, हर रोज़ झड़पें हो रही हैं और हवाई हमलों का आम लोगों व बुनियादी ढाँचे पर असर हो रहा है.
रिहायशी इलाक़ों में सिलसिलेवार ढंग से कार बम धमाके हुए हैं, जिनमें जान-माल की हानि हुई है.
उन्होंने सीरिया में कार्यवाहक प्रशासन और पूर्वोत्तर क्षेत्र में कुर्द नेतृत्व वाले सीरियाई डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ के बीच बातचीत का स्वागत किया और अमेरिका, तुर्कीये व अन्य क्षेत्रीय पक्षों से आग्रह किया कि शान्ति व स्थिरता के पक्ष में वास्तविक समझौते किए जाने होंगे.
देश में आर्थिक स्थिरता के विषय में भी चिन्ता गहरा रही है. पाबन्दियों, व्यापक पैमाने पर फैली निर्धनता से लोग पीड़ित हैं, जबकि दानदाताओं द्वारा मानवीय सहायता से पाँव वापिस खींच लिए जाने के बाद चुनौतीपूर्ण स्थिति है.
गेयर पैडरसन ने प्रतिबन्ध थोपने वाले देशों से आग्रह किया कि ऊर्जा व वित्त पोषण जैसे अहम सैक्टर में छूट दी जानी होगी, और सीरियाई जनता के लिए राजनैतिक सुधारों के साथ-साथ भोजन, बिजली व रोज़गार अवसर भी ज़रूरी हैं.
बिगड़ता मानवीय संकट
देश में राजनैतिक वार्ता के बीच, मानवीय संकट अब भी जारी हैं और आबादी का क़रीब 70 फ़ीसदी हिस्सा सहायता पर निर्भर है.
मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) में सहायक महासचिव ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को बताया कि चुनौतियों के बावजूद मानवीय सहायता प्रयासों का दायरा व स्तर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
हालांकि नए सिरे से लड़ाई भड़कने की भी ख़बर है, विशेष रूप से देश के पूर्वोत्तर हिस्से में. तुर्कीये की सीमा के अशान्त इलाक़े मेनबिज से 25 हज़ार लोग विस्थापित हुए हैं और यहाँ हमले जारी रहने की वजह से तिशरीन बाँध की मरम्मत के काम में बाधाएँ आ रही हैं.
यह लाखों लोगों के लिए जल व बिजली का एक अहम स्रोत है. साथ ही, विस्फोटक आयुध समग्री के बिखरे होने से आम नागरिकों के लिए ख़तरा बरक़रार है और मानवीय सहायता प्रयासों में कठिनाई पेश आ रही हैं.
सहायता अभियान, बड़ी चुनौती
विशाल चुनौतियों के बीच, संयुक्त राष्ट्र ज़रूरतमन्दों तक सहायता पहुँचाने में जुटा है. इसके तहत, 33 लाख सीरियाई नागरिकों को नवम्बर 2024 से अब तक खाद्य सहायता पहुँचाई गई है.
नवम्बर के अन्तिम सप्ताह में विद्रोही लड़ाकों ने सीरिया के अनेक शहरों पर बहुत कम समय में अपना क़ब्ज़ा कर लिया था, जिसके बाद पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद के शासन का अन्त हो गया था.
सीमा पार तुर्कीये से राहत सामग्री रवाना की जा रही है. पिछले महीने 94 ट्रकों के ज़रिये भोजन, मेडिकल आपूर्ति और अन्य अहम सामान सीरिया पहुँचाए गए, हालांकि सहायता धनराशि की क़िल्लत अब भी एक बड़ी चुनौती है.
यूएन मानवतावादी कार्यालय में सहायक महासचिव जॉयस म्सूया ने बताया कि देश में अनेक स्वास्थ्य केन्द्रों पर बन्द हो जाने का जोखिम है. विस्थापन शिविरों में जल व साफ़-सफ़ाई की सुविधा पहले से ही बन्द है, जिसका असर सवा छह लाख से अधिक लोगों पर हुआ है.
हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा सहायता कार्यक्रमों के लिए वित्तीय योगदान निलम्बित किए जाने से भी इन प्रयासों पर असर हुआ है और अनिश्चितता गहरी हुई है.
शरणार्थियों के समक्ष सवाल
जॉयस म्सूया ने कहा कि ऐसे सीरियाई शरणार्थियों की संख्या बढ़ रही है, जो अब अपने घर लौटना चाहते हैं. दिसम्बर के बाद से अब तक दो लाख 70 हज़ार सीरियाई नागरिक पड़ोसी देशों से अपने घर लौटे हैं.
हाल ही में, यूएन द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, एक-चौथाई से अधिक शरणार्थी अगले एक वर्ष के भीतर वापिस सीरिया आना चाहते हैं, जोकि पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि को दर्शाता है.
मगर, उनकी सुरक्षित, गरिमामय वापसी के लिए यह आवश्यक होगा कि आजीविका साधनों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व बुनियादी ढाँचे में निवेश किया जाए.
सहायक महासचिव के अनुसार, यह समय सीरिया के भविष्य में निवेश करने का है. आम नागरिकों की रक्षा, सहायता सामग्री की आपूर्ति और शान्तिपूर्ण ढंग से बदलाव सुनिश्चित किया जाना होगा.