'एआई क्षमता सीमित हाथों में केन्द्रित', भूराजनैतिक दरारों व विकास खाई को पाटने की पुकार
संयुक्त राष्ट्र के शीर्षतम अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया है कि कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के ज़रिये दुनिया की कायापलट कर देने वाले बदलाव आ रहे हैं, मगर इस टैक्नॉलॉजी में निहित शक्ति चंद देशों व कम्पनियों में ही केन्द्रित है. उन्होंने मंगलवार को फ़्राँस की राजधानी पेरिस में एआई पर आयोजित एक शिखर बैठक में इस क्रांतिकारी टैक्नॉलॉजी का लाभ सर्वजन तक पहुँचाने और विकसित व विकासशील देशों के बीच व्याप्त खाई को पाटे जाने की पुकार लगाई है.
उन्होंने पेरिस में ग्रैंड पैले संग्रहालय के चमचमाते सभागार में ‘AI Action Summit’ में जुटे प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए सचेत किया कि इस बैठक में कृत्रिम बुद्धमिता (एआई) के साथ हमारे रिश्ते के बारे में एक बुनियादी सवाल उठाया गया है: क्या हम भविष्य के लिए तैयार हैं?
“इसका उत्तर सरल है. नहीं. हम सम्भवत: वर्तमान के लिए भी तैयार नहीं हैं.”
उन्होंने बताया कि मानो पलक झपकने के साथ ही एआई, विज्ञान की फ़ंतासी दुनिया से बाहर निकल करके, दुनिया को बदल कर रख देने वाली एक शक्ति में तब्दील हो गई है.
हम जिस तरह से काम करते हैं, रहते हैं और आपस में सम्पर्क व बातचीत करते हैं. साथ ही, एआई के ज़रिये शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और कृषि में विशाल प्रगति हुई है.
“मगर, यह हमारे साझा मूल्यों व अधिकारों की भी परीक्षा ले रही है. एआई में निहित शक्ति अपने साथ अपार दायित्वों को सम्भाले हुए है.”
“आज, यह ताक़त, चंद हाथों में सीमित है. एआई क्षमता की सघनता बढ़ने की वजह से भूराजनैतिक दरारें गहरी हो रही हैं. कुछ कम्पनियाँ और देश, रिकॉर्ड निवेश के साथ तेज़ी से प्रगति कर रहे हैं, वहीं विकासशील देश इस दौड़ में पीछे छूट रहे हैं.”
स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल
इसके मद्देनज़र, उन्होंने वैश्विक स्तर पर रक्षा उपायों पर सहमति बनाने और सर्वोत्तम तौर-तरीक़ों को साझा किए जाने की अपील की – एकजुटता, समतापूर्ण नीतियों व न्यायसंगत व्यवसाय के लिए.
यूएन प्रमुख ने स्वच्छ ऊर्जा समाधानों पर भी बल दिया और कहा कि एआई के लिए निर्मित डेटा सेंटर में ऊर्जा खपत की वजह से पृथ्वी पर दबाव बढ़ रहा है.
“यह अहम है कि ऐसे एआई एल्गोरिथम और बुनियादी ढाँचे को तैयार किया जाए, जिसमें कम ऊर्जा की खपत हो और एआई को स्मार्ट ग्रिड में एकीकृत किया जाए ताकि ऊर्जा का दक्षतापूर्ण इस्तेमाल हो.”
उनके अनुसार, डेटा केन्द्रों से लेकर ट्रेनिंग मॉडल तक, एआई को सतत ऊर्जा पर संचालित किया जाना होगा ताकि यह हमें टिकाऊ भविष्य की दिशा में आगे ले जाए.
आशंकाओं का आधार नहीं
फ्राँस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्राँ और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सह-अध्यक्षता में इस शिखर बैठक में अनेक देशों के नेता, टैक्नॉलॉजी कम्पनियों के कार्यकारी अधिकारी और गायक फ़ैरल विलियम्स समेत अन्य हस्तियाँ भी जुटे.
भारतीय प्रधानमंत्री ने इस शिखर बैठक को एआई के विषय में अर्थपूर्ण चर्चा का एक अवसर बताया ताकि भविष्य में समावेशी व रूपान्तरकारी बदलावों को आकार दिया जा सके.
लोकप्रिय गायक फ़ैरल विलियम्स भी एआई की सम्भावनाओं व जोखिमों पर चर्चा के वहाँ पहुँचे और उन्होंने इन चिन्ताओं को ख़ारिज किया कि इससे लोगों के रोज़गारों को नुक़सान पहुँच सकता है. “इस विषय के इर्दगिर्द बहुत ज़्यादा भय व्याप्त है.”
“हम एक गाना लिखने के लिए एआई का इस्तेमाल नहीं करेंगे...यह सृजनात्मकता का स्थान नहीं लेगी.”
संयुक्त राज्य अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वान्स ने एआई सैक्टर में 450 अरब डॉलर के निवेश की योजना का उल्लेख किया और बेहद सख़्त नियंत्रण उपायों को अपनाने के प्रति आगाह किया. “एआई सैक्टर के अत्यधिक नियामन की वजह से एक रुपान्तरकारी उद्योग ख़त्म हो सकता है, जबकि वो अभी उड़ान भर रहा है.”
एआई में यूएन की भूमिका
यूएन प्रमुख् ने ध्यान दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र ने एआई एकजुटता के लिए एक समावेशी, पारदर्शी व कारगर प्लैटफ़ॉर्म को प्रस्तुत किया है.
‘वैश्विक डिजिटल कॉम्पैक्ट’ को पिछले वर्ष सितम्बर महीने में भविष्य-सम्मेलन के दौरान पारित किया गया था, जोकि एआई की संचालन व्यवस्था पर केन्द्रित पहला सार्वभौमिक समझौता है.
इसका लक्ष्य है: टैक्नॉलॉजी से प्राप्त होने वाले लाभ के ज़रिये मानवता की सेवा करना. एआई के मुद्दे पर एक स्वतंत्र, अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की स्थापना, इस दूरदृष्टि को वास्तविकता में साकार करने के नज़रिये से अहम है.
“वैश्विक विशेषज्ञता को एक साथ लाकर, यह वैज्ञानिक पैनल एआई के जोखिमों, लाभों, अवसरों व क्षमताओं के प्रति एक साझा समझ को बढ़ावा देगा, जिससे ज्ञान की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी.”
साथ ही, एआई संचालन व्यवस्था पर वैश्विक सम्वाद को स्थापित किया जाना भी अहम होगा, जिसमें यूएन के सदस्य देशों की हिस्सेदारी हो, एआई ऐप्स में मानवाधिकारों की रक्षा की जाए और ग़लत इस्तेमाल की रोकथाम हो.