वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

WHO: भारत में महाकुम्भ मेले को पोलियो मुक्त बनाए रखने की मुहिम

भारत में महाकुंभ मेले के दौरान श्रद्धालु गंगा नदी में पवित्र स्नान करते हैं।
© WHO India/ Alok Kumar महाकुम्भ मेले के दौरान गंगा नदी में स्नान करते श्रद्धालु.

WHO: भारत में महाकुम्भ मेले को पोलियो मुक्त बनाए रखने की मुहिम

स्वास्थ्य

भारत सहित दुनिया भर के विभिन्न स्थानों से आए करोड़ों श्रद्धालु, देश के उत्तर प्रदेश में स्थित प्रयागराज में हर 12 वर्ष में लगने वाले महाकुम्भ मेले में गंगा नदी में शुद्धिकरण स्नान कर रहे हैं. अनुमान है कि 6 सप्ताह चलने वाले इस मेले में, धार्मिक प्रथाओं में भाग लेने के लिए, भारत और विदेशों से लगभग 40 करोड़ लोग महाकुम्भ मेले में जुटेंगे. इसीलिए भारत में WHO, यह सुनिश्चित करने में लगा है कि कहीं पोलियो बीमारी नहीं फैले और सरकार के साथ मिलकर पोलियो की निगरानी मज़बूत करने में सहायता कर रहा है. अलबत्ता, भारत एक पोलियो मुक्त देश है.

भारत में जंगली पोलियो वायरस (वाइल्ड पोलियोवायरस) का अन्तिम मामला 13 जनवरी 2011 को सामने आया था. इसके बाद 2014 में भारत तथा WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र को पोलियो मुक्त प्रमाणित किया गया. 

हालाँकि, पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में यह वायरस अब भी मौजूद है. यही वजह है कि भारत अपनी पोलियो मुक्त स्थिति बनाए रखने के लिए कई सुरक्षा उपाय लागू करता रहता है.

इनमें वार्षिक पोलियो टीकाकरण अभियान चलाकर बच्चों का टीकाकरण करना और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना और पर्यावरण निगरानी (Environmental Surveillance) करना, तथा दूसरे देशों से संक्रमण आने से रोकने के लिए सीमा पर टीकाकरण अभियान चलाना शामिल है.

इस सम्बन्ध में, WHO भारत सरकार का समर्थन कर रहा है और मेले में जंगली पोलियोवायरस और वैक्सीन-जनित पोलियोवायरस (VDPV) की मज़बूती से निगरानी कर रहा है.

भारत में महाकुंभ मेले के दौरान विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों की एक विशाल भीड़ धूल भरी सड़क पर चल रही है।
© UN News/Rohit Upadhyay

पोलियो की पर्यावरण निगरानी के तहत, सीवेज (मलजल) के नमूनों की जाँच की जाती है ताकि जंगली पोलियोवायरस और वैक्सीन-जनित पोलियोवायरस (VDPV) की पहचान की जा सके. 

यह वायरस संक्रमित व्यक्तियों के मल में मौजूद हो सकते हैं, भले ही उनमें इस बीमारी के लक्षण नहीं दिखाई दें. इस बीमारी के लक्षणों में तेज़ बुखार, माँसपेशियों में अकड़न और Acute Flaccid Paralysis (AFP) यानि तीव्र शिथिल पक्षाघात शामिल हैं.

WHO, पोलियो संक्रमण की सम्भावना को ख़ारिज करने के लिए, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य समर्थन नैटवर्क (WHO-NPSN) को एक्यूट फ्लैसिड पैरालिसिस (AFP) के लक्षणों की जाँच में मदद कर रहा है. 

इससे पहले कि किसी व्यक्ति में लकवे के लक्षण विकसित हों, पर्यावरण निगरानी (Environmental Surveillance) के ज़रिए नए पोलियो वायरस के उभरने या इसके अन्तरराष्ट्रीय प्रसार का पता लगाना सम्भव होता है.

भारत में कुंभ मेले के दौरान डब्ल्यूएचओ के अधिकारी एक पंपिंग स्टेशन पर सीवेज के नमूने एकत्र करते हैं।
© WHO India/ Kanhaiya Dubey

रोकथाम के लिए परीक्षण

प्रयागराज में WHO-NPSN फ़ील्ड यूनिट ने महाकुम्भ मेले के दौरान ज़िला स्वास्थ्य विभाग को पर्यावरण निगरानी गतिविधियों के संचालन में सहायता प्रदान की. 

WHO टीम ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर नमूना संग्रह के लिए एक रणनैतिक स्थान की पहचान करने, एकत्र किए गए नमूनों की गुणवत्ता बनाए रखने और उन्हें परीक्षण के लिए समय पर भेजने में सहयोग किया. ये नमूने परीक्षण के लिए, लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर चिकित्सा विज्ञान संस्थान भेजे जाते हैं.

पूर्व-निर्धारित स्थानों पर नियोजित पर्यावरण निगरानी एक सतत प्रक्रिया है. प्रयागराज में गौघाट और घाघर नाला में नमूना संग्रह के लिए उन स्थलों की पहचान की गई. 

यहाँ WHO-NPSN टीम की निगरानी में स्वास्थ्य विभाग हर महीने के पहले और तीसरे सोमवार को सीवेज के नमूने एकत्र करता है. इस टीम में एक निगरानी चिकित्सा अधिकारी (Surveillance Medical Officer) और एक मैदानी पर्यवेक्षक शामिल होते हैं.

सीवेज नमूने पर्यावरण निगरानी के लिए WHO राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य समर्थन नैटवर्क की निगरानी में प्रदेश की राजधानी लखनऊ द्वारा निर्धारित प्रयोगशाला में भेजे जाते हैं.

कुंभ मेले में पोलियो निगरानी अभियान के दौरान सुरक्षात्मक गियर पहने डब्ल्यूएचओ के जवानों की एक टीम भारत के लखनऊ की एक सड़क पर खड़ी है।
© WHO India/ R K Pandey

पोलियो के लिए नियमित पर्यावरण निगरानी के अलावा, जनवरी और फ़रवरी में पाँच सबसे शुभ स्नान दिनों के बाद अतिरिक्त सीवेज नमूने एकत्र किए जा रहे हैं. 

इन दिनों नदी किनारे श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होती है. 

WHO ने भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को जन समूह निगरानी मॉड्यूल (Mass Gathering Surveillance Module) विकसित करने में मदद की है. 

इससे सम्भावित रोगों के प्रकोप का शीघ्र पता लगाने और कार्रवाई करने हेतु लगभग वास्तविक समय में डेटा संग्रह और विश्लेषण की सुविधा मिलती है.

महाकुम्भ मेले से पहले, इस मॉड्यूल को 2019 में कुम्भ मेले व अमरनाथ यात्रा के दौरान भी इस्तेमाल किया गया था.

इतने बड़े पैमाने पर आयोजित धार्मिक आयोजन में सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना आसान काम नहीं है. 

WHO-NPSN टीमें, विशेष रूप से पोलियो और अन्य टीके-निवारणीय बीमारियों की निगरानी में प्रदेश सरकार का समर्थन कर रही हैं. 

WHO, रोग निगरानी से लेकर टीकाकरण और आपातकालीन प्रतिक्रिया तक, सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और रोगों के प्रसार को रोकने के लिए हर सम्भव प्रयास करने में लगा है.

महाकुंभ मेले के दौरान गंगा नदी की ओर जाती हुई लोगों की एक विशाल भीड़।
© WHO India/ Jeevan Pandey