अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने अमेरिका द्वारा थोपी गई पाबन्दियों की निन्दा की
अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा जारी उस कार्यकारी आदेश की निन्दा की है, जिसमें आईसीसी पर दंडात्मक प्रतिबन्ध थोपे गए हैं. कोर्ट ने कहा है कि इस आदेश के ज़रिये, उसकी स्वतंत्रता व निष्पक्ष न्यायिक कार्रवाई को नुक़सान पहुँचाने की कोशिश की गई है.
संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में हुए विचार-विमर्श के आधार पर रोम संविदा को पारित किया गया, और इसके तहत अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को स्थापित किया गया था.
पूर्ण रूप से स्वतंत्र यह अदालत, मानवता के विरुद्ध अपराधों, युद्ध अपराधों समेत अन्य अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के गम्भीर उल्लंघन मामलों के लिए न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर लक्षित है.
राष्ट्रपति ट्रम्प ने गुरूवार को इस कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अनुसार अमेरिका व इसराइल समेत उसके सहयोगी देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बनने वाली जाँच पर कार्य करने वाले आईसीसी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी.
पिछले वर्ष नवम्बर महीने में आईसीसी न्यायाधीशों ने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलंट के विरुद्ध गिरफ़्तारी वॉरंट जारी करने का निर्णय लिया था.
इन दोनों इसराइली नेताओं पर ग़ाज़ा पट्टी में हथियारबन्द गुट हमास के विरुद्ध लड़ाई में कथित तौर पर युद्ध अपराधों को अंजाम देने के आरोप लगाए गए हैं.
आईसीसी ने हमास के पूर्व कमांडर मोहम्मद दाएफ़ के विरुद्ध भी एक वॉरंट जारी किया था.
'ख़तरनाक मिसाल'
संयुक्त राज्य अमेरिका और इसराइल ने अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के न्यायिक अधिकार को मान्यता नहीं दी है. रोम संविदा का 125 सदस्य देश हिस्सा हैं, जोकि 2002 में लागू हुई थी.
अमेरिकी कार्यकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इसराइल के विरुद्ध आईसीसी द्वारा उठाए गए क़दम और अमेरिका के विरुद्ध आरम्भिक जाँच से एक ख़तनाक मिसाल क़ायम होती है, जिससे पूर्व व वर्तमान अधिकारियों के लिए जोखिम है.
कार्यकारी आदेश में दंडस्वरूप अनेक पाबन्दियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें आईसीसी अधिकारियों की सम्पत्तियों को ज़ब्त करने, उन्हें व उनके परिजन को अमेरिका आने से रोकने समेत अन्य प्रावधान हैं.
जनवरी महीने में ही, पूर्व अमेरिकी प्रशासन के दौरान, अमेरिकी काँग्रेस ने आईसीसी पर पाबन्दियाँ थोपने की पहल की थी, मगर उसे अमेरिकी सेनेट (संसद का ऊपरी सदन) में पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया था.
अधिकारियों के समर्थन में आईसीसी
आईसीसी ने शुक्रवार को जारी अपनी एक प्रैस विज्ञप्ति में, कोर्ट की स्वतंत्र व निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया को ठेस पहुँचाने और अधिकारियों पर पाबन्दी थोपने वाले कार्यकारी आदेश की निन्दा की है.
अदालत ने ज़ोर देकर कहा है कि वो मज़बूती से अपने अधिकारियों के साथ है और दुनिया भर में अत्याचारों के लाखों-करोड़ों मासूम भुक्तभोगियों को न्याय व आशा प्रदान करने के लिए तत्पर है.
अदालत ने रोम संविदा में शामिल सभी पक्षों से आग्रह किया है कि उन्हें नागरिक समाज व अन्य देशों के साथ, न्याय व बुनियादी मानवाधिकारों के लिए एकजुट होना होगा.