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FGM का ख़ात्मा करने के लिए, कार्रवाई की रफ़्तार बढानी होगी

केन्या में महिला जननांग विकृति को समाप्त करने के लिए घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए जाने का जश्न पारंपरिक साम्बुरु और माउंट एल्गन पोशाक पहने महिलाओं ने मनाया।
Courtesy of State Department for Gender and Affirmative Action, Kenya केनया में महिला जननांग विकृति की प्रथा का अन्त करने के प्रयासों के तहत स्थानीय समुदाय एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं.

FGM का ख़ात्मा करने के लिए, कार्रवाई की रफ़्तार बढानी होगी

महिलाएँ

दुनिया भर में गुरूवार, 6 फ़रवरी को, महिला जननांग विकृति (FGM) के लिए शून्य सहिष्णुता का अन्तरराष्ट्रीय दिवस मनाया गया, जिस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया है कि अगर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो, वर्ष 2030 तक 2 करोड़ 70 लाख दीगर लड़कियों को इस दर्दनाक प्रथा से गुज़रना पड़ेगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, महिला जनानांग विकृति या महिला ख़तना (FGM) को, मानवाधिकार हनन माना जाता है, जिसमें ग़ैर-चिकित्सीय कारणों के लिए, महिला जननांग के एक हिस्से को हटाया या उसे क्षति पहुँचाई जाती है.

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यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरूवार को इस दिवस पर अपने सन्देश में कहा है, “दुनिया भर में 23 करोड़ लड़कियाँ व महिलाएँ इस घिनौनी प्रथा की भुक्तभोगी रही हैं.”

उन्होंने इस प्रथा को लैंगिक विषमता की सर्वाधिक क्रूर प्रथाओं में से एक बताया है.

संयुक्त राष्ट्र की यौन व प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी – UNFPA, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पुष्टि की है कि FGM के कोई स्वास्थ्य लाभ नहीं हैं, बल्कि इसके जीवन भर चलने वाले नुक़सान हैं. 

इनमें गम्भीर संक्रमण, बच्चे को जन्म देने में जटिलताएँ, निरन्तर पीड़ा और मनोवैज्ञानिक सदमा जैसी स्थितियाँ शामिल हैं.

एंतोनियो गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा, “मानवाधिकारों के इस घिनौने उल्लंघन को तत्काल बन्द किया जाना बहुत ज़रूरी है, और यह सम्भव भी है.”

प्रगति व चुनौतियाँ

FGM के उन्मूलन पर, UNFPA और यूनीसेफ़ के संयुक्त कार्यक्रम के ज़रिए, वर्ष 2008 से, विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से, लगभग 70 लाख लड़कियों और महिलाओं को, FGM के सम्बन्ध में रोकथाम और संरक्षण सेवाएँ मुहैया कराई हैं.

इस पहल के तहत, ज़मीनी स्तर पर लगभग 12 हज़ार संगठनों को सक्रिय किया गया है और एक लाख 12 हज़ार सामुदायिक और अग्रिम मोर्चों पर काम करने वाले लोगों को प्रशिक्षित किया गया है.

इसके अतिरिक्त, लगभग 4 करोड़ 80 लाख लोगों ने, महिला ख़तना की इस ख़तरनाक प्रथा को समाप्त कराने के लिए, सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिबद्धता घोषित की है.

‘रफ़्तार बढ़ाएँ’

महिला ख़तना को समाप्त करने के अभियान में इस वर्ष की थीम है - Step Up the Pace, जिसमें इस प्रथा को समाप्त करने और इसे बढ़ावा देने वाले हानिकारक लैंगिक व सामाजिक चलन को तोड़ने के लिए वैश्विक प्रयास बढ़ाने की पुकार लगाई गई है.

एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है, “हमें हानिकारक दृष्टिकोणों, मान्यताओं और लैंगिक पक्षपाती विचारों को तोड़ने के लिए, वैश्विक आन्दोलनों को मज़बूत करना होगा.”