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डीआर काँगो में संकट: सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए दुस्वप्न जैसी स्थिति, WHO की चेतावनी

पूर्वी काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में एमपॉक्स से संक्रमित मरीज़ों का उपचार किया जा रहा है. (अगस्त 2024)
© WHO/Guerchom Ndebo
पूर्वी काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में एमपॉक्स से संक्रमित मरीज़ों का उपचार किया जा रहा है. (अगस्त 2024)

डीआर काँगो में संकट: सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए दुस्वप्न जैसी स्थिति, WHO की चेतावनी

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायताकर्मियों ने चेतावनी जारी की है कि पूर्वी काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के गोमा शहर में M23 विद्रोही लड़ाकों का दबदबा बढ़ने के साथ, पूरे क्षेत्र में आपात स्वास्थ्य हालात उपजने की आशंका है. इस गुट ने नॉर्थ कीवू प्रान्त की राजधानी गोमा पर नियंत्रण के लिए कुछ दिनों पहले धावा बोला था, जिससे बड़े पैमाने पर आम नागरिक विस्थापित हुए हैं और आवश्यक सामान व सेवाओं की क़िल्लत है.

प्रान्तीय राजधानी में इंटरनैट सेवाओं में व्यवधान आया है और केवल मोबाइल फ़ोन नैटवर्क ही काम कर रहे हैं. यूएन एजेंसियों ने बुधवार को बताया कि काँगो के सैन्य बलों के साथ झड़पों के बाद, शहर के अधिकाँश इलाक़े पर M23 लड़ाकों का क़ब्ज़ा हो गया है.

डीआरसी में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि डॉक्टर बूरेमा हमा साम्बो ने बताया कि उनकी सहायता टीम को अस्पतालों के लिए समर्थन मुहैया कराने में मुश्किलें पेश आ रही हैं. एक ऐम्बुलेंस तक का चल पाना कठिन हो गया है.

“यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य, दुस्वप्न बन गया है.”

उन्होंने यूएन न्यूज़ के साथ एक बातचीत में उम्मीद जताई कि जल्द ही डीआरसी सरकार के लिए हालात सामान्य हो जाएंगे... “सम्वेदनशील हालात में जीवन गुज़ार रहे लोगों को हमारी वास्तव में आवश्यकता है.” गोमा में जल आपूर्ति ठप है, बिजली कटौती हो रही है और स्वास्थ्यकर्मियों समेत आम नागरिक फँसे हुए हैं.

इससे पहले, डीआरसी में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा मिशन (MONUSCO) की एक वरिष्ठ अधिकारी ने आगाह किया था कि इस हिंसा की चपेट में आए आम नागरिकों को अकल्पनीय स्तर पर हिंसा का सामना करना पड़ रहा है.

डीआरसी में यूएन मिशन (MONUSCO) की उप प्रमुख विवियन वान डे पेरे ने मंगलवार को गोमा से सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधियों को मौजूदा घटनाक्रम पर जानकारी देते हुए बताया कि युद्धरत पक्षों के बीच लड़ाई को रोकने के लिए तुरन्त, समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है.

विशाल विस्थापन

गोमा पर M23 लड़ाकों के हमले से पहले, इस शहर के इर्द-गिर्द सात लाख से अधिक लोग आन्तरिक रूप से विस्थापित हुए थे. मगर, रवांडा समर्थित विद्रोही गुट और डीआरसी के सैन्य बलों के बीच झड़पों की आशंका की वजह से लाखों लोग जान बचाकर भाग गए हैं, जिससे घातक बीमारियों के फैलाव का जोखिम भी बढ़ा है.

डॉक्टर बूरेमा हमा साम्बो ने बताया कि जब सात लाख लोग शिविरों में रह रहे हों, तो आप मानव पीड़ा के स्तर को समझ सकते हैं.

इसके अलावा, नॉर्थ कीवू व साउथ कीवू में बड़े पैमाने पर बीमारियाँ फैल रही हैं. ये दोनों इलाक़े रवांडा की सीमा के नज़दीक हैं और खनिज सम्पदा से परिपूर्ण हैं. पिछले कई दशकों से यहाँ बड़ी संख्या में हथियारबन्द गुटों का बोलबाला रहा है.

बीमारियों का प्रकोप

डीआरसी में बार-बार सामूहिक विस्थापन की वजह से आश्रय शिविरों में बीमारियाँ फैलने का जोखिम है. इनमें हैज़ा भी है, जिसके 2024 में 22 हज़ार से अधिक मामले दर्ज किए गए थे और 60 लोगों की मौत हुई थी. वहीँ ख़सरा के 12 हज़ार मामलों की पुष्टि हुई और 115 लोगों की जान गई.

इसके अलावा, मलेरिया, बाल कुपोषण समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ भी एक बड़ी चुनौती हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने पिछले वर्ष अगस्त में एमपॉक्स को अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया था.

डीआरसी की राजधानी किन्शासा से यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने अपने राष्ट्रीय साझेदारों और गोमा व साउथ कीवू में टीम के साथ मिलकर एमपॉक्स के ख़तरे से निपटने के लिए प्रयास किए.

डॉक्टर साम्बो ने आगाह किया है कि एमपॉक्स के मरीज़ एक शिविर के उपचार केन्द्र से भाग चुके हैं और अब मेज़बान समुदायों व उनके परिवारों के साथ रह रहे हैं.

इस वजह से, स्थानीय समुदायों में बीमारी फैलने की आशंका जताई गई है, हालांकि आवागमन में मुश्किलों व सुरक्षा हालात की वजह से फ़िलहाल इसके प्रभाव का अन्दाज़ा नहीं लगाया जा सका है.