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आपबीती: ‘कठिनाइयों ने मुझे अधिक मज़बूत बनाया’

श्रीलंका की एक महिला व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए डिज़ाइन किए गए तिपहिया वाहन को चला रही है।
© ILO/Yaseen J Khan लीना अपनी दुकान के बाहर तिपहिया वाहन खड़ा करती हैं, जिससे अगर कोई उन्हें आवाजाही के लिए बुलाए, तो वो तुरन्त चल दें.

आपबीती: ‘कठिनाइयों ने मुझे अधिक मज़बूत बनाया’

महिलाएँ

श्रीलंका में अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO), आर्थिक विकास और मेल-मिलाप के ज़रिए विकलांगो को जीवन में सुधार लाने के लिए मदद कर रहा है. आईएलओ की यह मुहिमनॉर्वे और ऑस्ट्रेलिया से वित्त पोषित है, जिसके अच्छे नतीजे मिल रहे हैं. लीना पेनील्डस थाटकुरास विकलांग महिला हैं जिन्हें इस परियोजना का लाभ मिला है और उन्होंने अनगिनत कठिनाइयों के बावजूद, आगे बढ़ने का अपना रास्ता बनाया है.

श्रीलंका के उत्तरी हिस्से में सिलाई का व्यवसाय चलाने वाली लीना पेनील्डस थाटकुरास, देश में कुछ वर्ष पहले गृहयुद्ध के दौरान घायल हो गईं थीं. इससे वो स्थाई विकलांगता की शिकार हो गईं. 

लीना, अतिरिक्त आमदनी के लिए, सिलाई के अलावा, व्हीलचेयर पर लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया एक तीन पहिया वाहन किराए पर भी चलाती हैं.

लीना को यह वाहन, अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने, आर्थिक विकास और मेल-मिलाप के ज़रिए स्थानीय मज़बूती (LEED+) परियोजना के अन्तर्गत प्रदान किया है.

लीना बताती हैं कि जब गृहयुद्ध ने उत्तरी श्रीलंका में स्थित उनके घर को अपनी चपेट में लिया, तो उन्हें बचकर भागना पड़ा. इसमें वो घायल हो गईं और चोट के कारण स्थाई रूप से विकलांग हो गईं. 

वो कहती हैं, “हालाँकि मैंने अपने जीवन में बहुत सी चुनौतियों का सामना किया है, मैं आज भी मानती हूँ कि कुछ भी असम्भव नहीं है. आज, मुझे अपनी उपलब्धियों पर गर्व है.”

असाधारण हौसला

उन्होंने बताया, “जब मैं छोटी थी, मेरे परिवार ने मुझे वह करने के लिए प्रोत्साहित किया जो मैं करना चाहती थी. मुझ पर कोई पाबन्दियाँ नहीं थीं. मेरे पिता ने मुझे पेड़ पर चढ़ना सिखाया. वो कहते थे, चढ़ती रहो, और फिर एक दिन, मैंने सबसे ऊँचे पेड़ की चोटी तक पहुँचकर दिखाया.”

“मैंने साधारण स्तर की अपनी परीक्षाएँ 2001 में पूरी कीं और 2002 में नर्सरी के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. लेकिन उसके कुछ समय बाद, हमारा घर गृहयुद्ध की चपेट में आ गया, और हमने सब कुछ खो दिया. हमें विस्थापित होना पड़ा और एक शिविर में जाकर रहना पड़ा. 2008 में मैं घायल हो गई, और इस चोट ने मुझे विकलांग बना दिया.”

“गृहयुद्ध के अन्तिम चरणों के दौरान, मैं शरणार्थी शिविर में बच्चों को पढ़ा रही थी, जब एक मित्र ने मुझे मेरे भावी पति से मिलवाया.”

“मेरे पति एक महान कवि और उत्कृष्ट कलाकार हैं. हालाँकि, मेरी माँ इस बात को लेकर चिन्तित थीं कि हमारा जीवन कितना चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि वह भी विकलांग हैं.”

एक श्रीलंकाई व्यक्ति व्हीलचेयर पर बैठा है और एक महिला ग्रामीण इलाके में एक घर के सामने खड़ी है।
© ILO/Yaseen J Khan

“पहली बार जब हम बाहर गए तो मैं उनकी व्हीलचेयर को धक्का देकर चला रही थी, तो सभी लोग हमें घूरने लगे थे. उस दिन मैंने तय किया कि लोगों को हमें आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त देखना चाहिए. आज, मुझे लगता है कि हमने वह लक्ष्य हासिल कर लिया है.”

“शादी के बाद, हमने अनेक कठिनाइयों का सामना किया. मेरे पति के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं, और उनके साथ यात्रा करना मेरे लिए बहुत कठिन था.”

“विकलांग व्यक्तियों के लिए परिवहन की स्थिति बहुत ख़राब है. बस चालकों और परिचालकों को व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले व्यक्ति को बस में चढ़ाने में बहुत मुश्किल आती है. इस प्रक्रिया में समय लगता है, और इसका मतलब है कि अन्य यात्रियों को इन्तज़ार करना पड़ता है. इस वजह से, बसें अक्सर हमें चढ़ाने के लिए रुकती ही नहीं हैं.”

“उस समय, मैंने एक परिधान कारख़ाने में काम करना शुरू किया. मैंने वहाँ लगभग आठ साल तक काम किया, लेकिन काम बहुत कठिन था. जब मैं कारख़ाने में काम कर रही थी, तो मैंने सोचा, मैं भला किसी और के लिए काम क्यों करूँ? इसलिए, मैंने अपने वेतन का आधा हिस्सा बचाने और शेष राशि से हमारे ख़र्चे चलाने का निर्णय लिया.”

“जो धन मैंने बचाया, उससे मैंने एक सिलाई मशीन ख़रीदी और घर पर सिलाई का काम शुरू किया. मेरे लिए यह ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता था.”

अब, सिलाई मेरा मुख्य पेशा है. इसके ज़रिए, मैंने अपनी आजीविका का निर्माण किया है. मेरी बचत की आदत के कारण, आज हम बेहतर जीवन जी रहे हैं. मुझे ऐसा लगता है कि मैंने अपने सपनों का तीन-चौथाई हिस्सा पहले ही पूरा कर लिया है.”

श्रीलंका में एक छोटी सी सिलाई की दुकान के अंदर एक महिला बैठी है, जो कपड़े और धागों से घिरी हुई है, और बाहर कपड़े लटके हुए हैं।
© ILO/Yaseen J Khan

वाहन चलाकर आय अर्जन

“मेरी प्रकृति ऐसी है कि अगर कोई मुझसे पूछता है कि क्या आप यह कर सकती हैं, तो मेरा जवाब हमेशा हाँ होता है, भले ही मुझे वो काम करने का तरीक़ा न आता हो. एक परिचित ने मुझसे पूछा कि क्या मुझे तीन पहिया वाहन चलाना आता है. मैंने कहा: हाँ, बिल्कुल. वाहन चालू करें और मैं इसे चलाऊँगी. उसने वाहन चालू किया. फिर मैंने पूछा कि गेयर ऊपर खींचना चाहिए या नीचे." 

"उसने कहा कि पहला गेयर ऊपर लगाएँ. मैंने गेयर ऊपर लगाया. थोड़ी देर चलाने के बाद उसने पूछा कि मैं गेयर क्यों नहीं बदल रही. तब मैंने जल्दी से दूसरा गेयर लगाया. उसने कहा: गति बढ़ाओ और गेयर बदलो. इसी तरह मैंने तीन पहिया वाहन चलाना सीखा.”

“उसके बाद, गाँव में सभी मुझे तीन पहिया वाहन चलाने वाली महिला के रूप में जानने लगे. जब मैंने पहली बार तीन पहिया वाहन किराए पर चलाया और मेरे पीछे एक यात्री बैठा था, तो मेरे दिल में ऐसी ख़ुशी थी जिसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती. सभी लोग एक महिला को वाहन चलाते हुए देखकर हैरान थे.”

“बेशक, एक महिला के रूप में तीन पहिया वाहन चलाने में चुनौतियाँ हैं. कई पुरुष इसे पसन्द पसन्द  नहीं करते. लोग बातें करेंगे, लेकिन अगर हम उन पर ध्यान देंगे, तो अपना काम नहीं कर पाएंगे.”

महिलाएँ कहती हैं कि जब मेरे साथ सफ़र करने में वो सुरक्षित महसूस करती हैं. जब वो किसी पुरुष के साथ लम्बी यात्रा करती हैं, तो कभी-कभी असहज महसूस करती हैं. उन्हें लगता है कि वे किसी दूसरी महिला के साथ सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकती हैं.

“जब स्थानीय तीन पहिया वाहन सहकारी समिति को व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए वाहन पट्टे पर देने का अवसर मिला, तो मुझे चुना गया और मैं सहकारी समिति की सदस्य बन गई.”

“इन तीन पहिया वाहनों में एक रैम्प लगा हुआ है, और चूँकि मेरे पति भी विकलांग हैं, इसलिए यह सिफ़ारिश की गई कि मुझे इनमें से एक वाहन दिया जाए.”

परियोजना के ज़रिए मज़बूती

“सहकारी समिति ने विकलांग व्यक्तियों और लैंगिक समानता के बारे में प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए. यदि ये प्रशिक्षण अन्य गाँवों में, विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए जो सशक्त बनना चाहती हैं, लगातार उपलब्ध कराए जाएँ, तो मुझ जैसी और भी महिलाएँ इस काम के लिए सामने आ सकती हैं.”

“अब मैं, महिलाओं के लिए आयोजित एक मैकेनिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में सीखकर, तीन पहिया वाहन और मोटरबाइक की मरम्मत भी करना सीख गई हूँ.”

“मेरा मानना है कि मुझ जैसी महिलाओं को ख़ुद को सीमित नहीं करना चाहिए. वे मैकेनिक्स, सिलाई और राजमिस्त्री का काम भी सीख सकती हैं. वे सब कुछ करने में सक्षम हैं. मैं चाहती हूँ कि महिलाएँ आगे बढ़ें और स्वतंत्र बनें. अगर अन्य महिलाएँ गाड़ी चलाना सीखने में रुचि दिखाती हैं, तो मैं उन्हें सिखाने के लिए तैयार हूँ.”

मेरी इच्छा है कि एक दिन मेरे पास एक बड़ा वाहन हो. इस लक्ष्य तक पहुँचने में समय लगेगा. शायद यह मेरे बुढ़ापे में ही सम्भव हो पाए. मैं आगे शिक्षा भी प्राप्त करना चाहती हूँ. मुझे इलैक्ट्रिकल मैकेनिक्स में रुचि है. यदि कोई संगठन महिलाओं के लिए इलैक्ट्रिकल मैकेनिक्स के पाठ्यक्रम पेश करता है, तो मैं उसमें शामिल होने के लिए सबसे आगे रहूंगी.”

एक सफल उद्यमी बनना भी मेरा एक और सपना है. अन्ततः, मैं चाहती हूँ कि मैं अन्य लोगों को रोज़गार प्रदान करने के क़ाबिल बन सकूँ - धीरे-धीरे, पहले एक या दो लोगों को रोज़गार देकर. और यदि यह कोई विकलांग व्यक्ति हो, तो और भी अच्छा होगा, क्योंकि मेरी तरह, उन्होंने भी जीवन में बहुत सी कठिनाइयों का सामना किया होगा. मैं उन्हें रोज़गार प्रदान करने और उनका जीवन बेहतर बनाने के लिए तत्पर हूँ.”

“मैं अपने जीवन में गिरकर, दोबारा उठने में कामयाब हुई हूँ. लेकिन इन अनुभवों ने मुझे सिखाया है कि मुझे एक भी पल बर्बाद नहीं करना चाहिए और दूसरों को अपने साथ लेकर चलना चाहिए.”