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डीआर काँगो में संकट पर सुरक्षा परिषद की बैठक, 'हिंसा को तुरन्त रोका जाना होगा'

दक्षिण कोरिया के गोमा के पास एक आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के शिविर से लोग भाग रहे हैं, जिनमें से कुछ लोग भीड़भाड़ वाली सड़क पर अत्यधिक भार से लदी मोटरसाइकिलों पर सवार होकर जा रहे हैं।
© WFP/Moses Sawasawa पूर्वी डीआरसी के गोमा में व्याप्त असुरक्षा के बीच आम लोग शहर छोड़कर भाग रहे हैं.

डीआर काँगो में संकट पर सुरक्षा परिषद की बैठक, 'हिंसा को तुरन्त रोका जाना होगा'

शान्ति और सुरक्षा

काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के पूर्वी हिस्से में गहराते संकट के बीच, तीन दिनों के भीतर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की दूसरी बैठक हुई है, जिसमें हिंसा पर तुरन्त विराम लगाने का आग्रह किया गया है.

डीआरसी के नॉर्थ कीवू प्रान्त की राजधानी गोमा पर नियंत्रण के लिए पिछले कुछ दिनों में रवांडा समर्थित M23 विद्रोही गुट और काँगो के सुरक्षा बलों की बीच लड़ाई तेज़ हुई है, जिससे वहाँ गम्भीर मानवीय हालात हैं.

डीआरसी में यूएन मिशन (MONUSCO) की उप प्रमुख विवियन वाँ डी पैरे ने गोमा से सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधियों को मौजूदा घटनाक्रम पर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि युद्धरत पक्षों के बीच लड़ाई को रोकने के लिए तुरन्त, समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है.

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हाल के दिनों में हुई झड़पों से बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ है. M23 विद्रोही गुट द्वारा मिनोवा इलाक़े पर क़ब्ज़ा किए जाने के बाद पौने दो लाख से अधिक जान बचाने के लिए शरण की तलाश में जा रहे हैं. 

इनमें 34 हज़ार से अधिक लोगों ने गोमा और उसके इर्द-गिर्द शरण स्थलों में आश्रय लिया है, जहाँ पहले से ही भारी भीड़ थी और अब हालात विकट हो रहे हैं.

यूएन मिशन अधिकारी विवियन वाँ डी पैरे ने बताया कि 26 जनवरी को सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान, सदस्य देशों की अपीलों के बावजूद M23 व रवांडा के सुरक्षा बलों ने गोमा पर हमला कर दिया, जिसमें भारी गोलाबारी की गई है.

इन हमलों में अनेक आम नागरिक हताहत व विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं और स्थानीय आबादी गहरे सदमे से गुज़र रही है.

MONUSCO अधिकारी ने बताया कि शरण व संरक्षण सेवाओं को प्रदान करने में यूएन मिशन की अहम भूमिका है, और सुरक्षा की तलाश में बड़ी संख्या में वहाँ लोग पहुँच रहे हैं. इनमें आत्मसमर्पण करने वाले अधिकारी व हथियारबन्द लड़ाके भी हैं.

विवियन वाँ डी पैरे ने कहा कि यूएन मिशन के शिविर में इतनी बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण करने वाले तत्वों और शरण ढूंढ रहे आम नागरिकों के लिए जगह नहीं है.

“उरुग्वे की बटालियन ने काँगो के क़रीब 1,200 सैनिकों को आश्रय दिया है और एक हज़ार से अधिक आम नागरिक भी वहाँ पहुँचे है, जिससे संसाधनों पर भारी दबाव है.”

यूएन शिविर सुरक्षित नहीं

MONUSCO अधिकारी ने कहा कि जल टैंक को क्षति पहुँची है, और यूएन कर्मचारियों व सम्पत्तियों की सुरक्षा के लिए जोखिम है. “हमारे शिविर सुरक्षित नहीं हैं. पिछले तीन दिनों में दो मोर्टार MONUSCO के शिविरों व परिसर में गिरे हैं और कई बार गोलियाँ चली हैं.”

गोमा हवाई अड्डा बन्द हो जाने के बावजूद, MONUSCO अपने साझेदार संगठन के सहयोग से इलाज के लिए घायल शान्तिरक्षकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अन्य स्थान पर भेजा जा रहा है.

M23 गुट और रवांडा के सैन्य बलों द्वारा गोमा अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नियंत्रण कर लिए जाने के बाद, अब वे अनेक दिशाओं से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे नागरिक आबादी के लिए जोखिम बढ़ा है.

बड़ी संख्या में आन्तरिक रूप से विस्थापितों, परिवारों के अलग होने और गोमा की जेलों से बन्दियों के भागने के बाद महिलाओं व लड़कियों पर यौन व लिंग-आधारित हिंसा का शिकार होने का ख़तरा है.

इसके मद्देनज़र, यूएन मिशन की वरिष्ठ अधिकारी ने सभी पक्षों से आम नागरिकों की रक्षा करने, बुनियादी सेवाओं को मुहैया कराने और यौन हिंसा को टालने की अपील की है.