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काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य: हिंसा में उछाल के बीच बदतरीन हालात, अगले 24 घंटे अहम

डीआर कांगो में आंतरिक विस्थापन शिविर में नीले हेलमेट पहने UN पुलिस अधिकारी नागरिकों और नेताओं के साथ सामुदायिक सहभागिता सत्र आयोजित करते हैं।
© MONUSCO/Kevin Jordan गोमा में यूएन पुलिस अधिकारी, एक शिविर में विस्थापित नागरिकों के साथ बातचीत कर रहे हैं. (फ़ाइल)

काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य: हिंसा में उछाल के बीच बदतरीन हालात, अगले 24 घंटे अहम

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआसी) के पूर्वी हिस्से में, M23 विद्रोही गुट के हमलों के बीच हालात तेज़ी से बिगड़ने की चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि स्थानीय आबादी के पास आवश्यक सामान ख़त्म होता जा रहा है और उन्हें अगले 24 घंटों में अपने बचाव के लिए रास्तों की तलाश करनी होगी. M23 गुट ने पूर्वी डीआरसी में नॉर्थ कीवू प्रान्त की राजधानी गोमा को अपने नियंत्रण में लेने के लिए हाल ही में नए सिरे से हमले किए हैं.

बताया गया है कि सड़कों पर शव बिखरे हुए हैं, अस्पतालों पर भीषण बोझ है और यौन हिंसा, बलात्कार व लूटपाट की घटनाएं बढ़ी हैं. यूएन विश्व खाद्य कार्यक्रम समेत अन्य एजेंसियाँ, हिंसक टकराव से प्रभावित इलाक़े में आम नागरिकों को संरक्षण व सहायता देने में जुटी हैं.

WFP प्रवक्ता शैरी ठकराल का कहना है कि सड़कें अवरुद्ध हैं, बन्दरगाहों को बन्द कर दिया गया है और लोग अपनी ज़िन्दगियों को जोखिम में डालकर कामचलाऊ नाव में बैठकर कीवू झील को पार कर रहे हैं.

“मैंने कुछ ही देर पहले गोमा में एक कार्यकर्ता से बात की, जिसने बताया कि हम यहाँ हैं, छिपे हुए हैं. हमें नहीं पता कि हमारी मदद के लिए कौन आएगा.”

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यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) ने भी संसाधन-सम्पन्न इस क्षेत्र में गहराती हिंसा पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है, जिसकी वजह से पिछले कुछ दिनों के भीतर तीन लाख से अधिक विस्थापित हो चुके हैं.

बदतरीन हालात

OCHA प्रवक्ता येन्स लार्क ने डीआरसी में अपने सहकर्मियों के हवाले से बताया कि गोमा में मोर्टार, छोटे हथियारों से गोलाबारी हो रही है और सड़कों पर अनेक शव बिखरे हुए हैं.

“हमें लड़ाकों द्वारा बलात्कार किए जाने, सम्पत्ति को लूटे जाने की रिपोर्ट भी मिली हैं. एक मानवीय सहायता भंडारण केन्द्र, मानवतावादी व स्वास्थ्य केन्द्र को क्षति पहुँची है.”

इन आपात हालात में गोमा में अस्पतालों में घायलों का तांता लगा हुआ है, बिजली व जल आपूर्ति में व्यवधान आया है और सोमवार को इंटरनैट सेवाएँ ठप हो गईं थी, जो फिर शुरू नहीं हो पाई हैं.

गोमा में व्याप्त संकट के बीच, सोमवार को सुरक्षा परिषद की न्यूयॉर्क में बैठक हुई, जिसमें M23 विद्रोही गुट से हमले रोकने और उसके क़ब्ज़े वाली ज़मीन से पीछे हटने की मांग की गई.

सदस्य देशों ने डीआरसी में यूएन शान्तिरक्षा मिशन (MONUSCO) के लिए समर्थन को फिर दोहराया है और पिछले कुछ दिनों में अपनी जान गँवाने वाले दक्षिण अफ़्रीका, मलावी व उरुग्वे के शान्तिरक्षकों को श्रृद्धांजलि अर्पित की.

वर्षों से जारी संकट

पूर्वी डीआरसी में हिंसा में हाल के दिनों में अचानक तेज़ी आई, मगर इससे पहले भी 50 लाख से अधिक लोग, खनिज-सम्पदा से परिपूर्ण इस क्षेत्र में विस्थापित थे, जिन्हें भीड़भाड़ भरे शिविरों में कम भोजन व बिना सुरक्षा के गुज़र-बसर करना पड़ रहा था.

यूएन एजेंसियाँ अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर अस्थिरतापूर्ण हालात की निगरानी करने में जुटी हैं. बताया गया है कि WFP को गोमा के इर्दगिर्द अपनी खाद्य सहायता गतिविधियों को रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

यूएन एजेंसी प्रवक्ता शैली ठकराल ने कहा कि गोमा और उसके आस-पास के इलाक़ों में लड़ाई में फँसे आम नागरिकों के लिए यह परीक्षा की घड़ी है. अगले 24 घंटे बेहद अहम हैं, चूँकि उनके पास सामान ख़त्म हो रहा है और उन्हें बचाव के लिए रास्ते ढूंढने होंगे.

बीमारी की आशंका

तेज़ी से बिगड़ते हालात के बीच, विस्थापित परिवारों के बीमारियों की चपेट में आने की आशंका है, हालांकि यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने हिंसा में उछाल से पहले ही रोकथाम उपाय किए थे. फ़िलहाल, हिंसा की जद में आ रहे नागरिकों को तत्काल सहायता पहुँचाना प्राथमिकता है.

WHO ने गोमा हवाई अड्डे के शनिवार को बन्द होने से पहले ही, घायलों के इलाज व आपात देखभाल, संक्रमण से बचाव व हैज़ा उपचार के लिए महत्वपूर्ण मेडिकल सामग्री को वहाँ भेज दिया था. यूएन एजेंसी के अनुसार, अस्पतालों में सैकड़ों लोग हैं, जिनमें से कई को गोलियाँ व छर्रे लगे हैं, और संक्रमण का फैलाव भी एक जोखिम बन रहा है.

WHP ने अस्पतालों को टैंट भी मुहैया कराए हैं, ताकि घायलों की संख्या बढ़ने पर उनके इलाज की व्यवस्था की जा सके. नॉर्थ व साउथ कीवू प्रान्तों में मेडिकल केन्द्र भी बनाए गए हैं, ताकि पूर्वी डीआरसी में स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके. 

यौन हिंसा

WHO समेत अन्य यूएन एजेंसियों का कहना है कि बिगड़ते हालात के बीच महिलाओं व लड़कियों के लिए यौन हिंसा का शिकार बनने का जोखिम बढ़ रहा है. इस इलाक़े में गर्भवती महिलाओं पर जोखिम हैं, मातृत्व मौतों की दर बहुत ऊँची है और हिंसा भड़कने से पहले भी चिन्ताजनक हालात थे.

अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों पर भी ख़तरा है, उन पर गोलियाँ चलाए जाने की घटनाएँ हुई हैं और बच्चों समेत मरीज़ भी इसकी चपेट में आए हैं.

इसके मद्देनज़र, WHO ने दोहराया है कि स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों पर हमले, युद्ध के नियमों की अवहेलना हैं, और इनकी सुरक्षा सदैव सुनिश्चित की जानी होगी.