सीरिया: असद शासनकाल में व्यवस्थागत ढंग से यातनाएँ व अमानवीय बर्ताव, 'मानवता के विरुद्ध अपराध'
सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र जाँच आयोग की एक नई रिपोर्ट में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद के शासनकाल में असहमति के स्वरों को दबाने के लिए लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने, बन्दियों को यातना देने और जबरन गुमशुदगी के मामलों पर विस्तार से जानकारी साझा की गई है. आयोग के अनुसार इनमें से अनेक मामलों को युद्ध अपराध व मानवता के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है.
“Web of Agony: Arbitrary Detention, Torture, and Ill-Treatment in the Syrian Arab Republic,” नामक इस रिपोर्ट के लिए दो हज़ार से अधिक प्रत्यक्षदर्शियों से बात की गई है, जिनमें 550 से अधिक वे पीड़ित हैं, जिन्होंने यातना को भुगता है.
दिसम्बर 2024 में सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद के शासन के पतन के बाद यातना स्थलों से बन्दियों को रिहा कर दिया गया. वर्ष 2011 में, सीरिया में गृहयुद्ध की शुरुआत के बाद यह पहली बार है जब देश की कार्यवाहक सरकार ने जाँच कमीशन को वहाँ जाने की अनुमति दी है.
दिसम्बर व जनवरी में, कमीशन की दो टीम ने राजधानी दमिश्क में हिरासत केन्द्रों और सामूहिक क़ब्रों का दौरा किया, जिनमें सेडानाया जेल भी है, जहाँ बड़े पैमाने पर बन्दियों को बेहद अमानवीय परिस्थितियों में हिरासत में रखे जाने के आरोप लगते रहे हैं.
कमीशन का मानना है कि इन हिरासत केन्द्रों पर अधिकाँश साक्ष्यों व दस्तावेज़ों को जला या बर्बाद कर दिया गया है, मगर अब भी कुछ सबूत शेष हैं.
पूर्व सरकार के हिरासत केन्द्रों में मानवाधिकार उल्लंघन मामलों के लिए यह अब तक का सबसे विस्तृत विश्लेषण बताया गया है, जोकि सदमे व गहरी पीड़ा की विरासत को दर्शाता है.
रिपोर्ट के अनुसार, सीरिया में हिंसक टकराव के दौरान अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के हनन के बदतरीन मामलों को व्यवस्थागत ढंग से अंजाम दिया गया, जिन्हें मानवता के विरुद्ध व युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है.
अमानवीय बर्ताव
रिपोर्ट बताती है कि पूर्व सरकार के शासन के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने पुरुषों, महिलाओं, लड़के-लड़कियों समेत बन्दियों को यातना दी, उनके साथ क्रूरतापूर्ण, अपमानजनक, अमानवीय बर्ताव किया.
उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा गया, बिजली के झटके दिए गए, जलाया गया, नाखून निकाले गए, बलात्कार व यौन हिंसा को भी अंजाम दिया गया. इसके अलावा, पीड़ा देने वाली मुद्रा में देर तक रखा गया, और ज़रूरत होने पर भी चिकित्सा देखभाल से वंचित रखा गया.
इन मामलों के पीड़ितों व प्रत्यक्षदर्शियों ने जाँच कमीशन को बताया है कि यातना के कारण घावों, कुपोषण, बीमारी से जूझ रहे बन्दियों को धीरे-धीरे मरने के लिए उनके हाल पर छोड़ दिया गया, या फिर उन्हें जान से मार दिया गया.
खाद्य सामग्री या तो बहुत कम थी या फिर दूषित थी. पीने के पानी और पहनने योग्य कपड़ों की क़िल्लत थी और अक्सर बन्दियों के सोने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी. उन्हें ठंडे फ़र्श पर कम्बल बिछाकर सोना पड़ा. कारागार में सामूहिक बन्दी कक्ष में शवों को कई दिनों तक रखे जाने के मामले भी सामने आए हैं.
‘अहम पड़ाव’
आयोग के प्रमुख पाउलो सर्गियो पिनहेरो ने बताया कि हम एक अहम पड़ाव पर खड़े हैं. सीरिया में संक्रमणकालीन सरकार और भावी प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि इन अपराधों को फिर कभी ना दोहराया जाए.
“हमें आशा है कि क़रीब 14 वर्षों की हमारी पड़ताल पर आधारित इन निष्कर्षों से दुर्व्यवहार के इन मामलों के लिए दंडमुक्ति का अन्त किया जा सकेगा.”
आयोग के अनुसार, दिसम्बर महीने में पूर्व शासन के पतन के बावजूद, उन हज़ारों परिवारों के लिए यह एक कठिन समय है, जिन्हें अपने लापता परिजन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है. सामूहिक क़ब्र मिलने की घटनाओं से परिवारों के लिए अपने लापता रिश्तेदारों के प्रति चिन्ता बढ़ी है.
रिपोर्ट में ज़ोर देकर कहा गया है कि साक्ष्यों, अभिलेखागार व अपराध घटनास्थलों की सुरक्षा के लिए जल्द से जल्द क़दम उठाए जाने होंगे, ताकि विशेषज्ञों द्वारा उनकी जाँच की जा सके.
जाँच आयोग की योजना आगामी दिनों में इस पड़ताल को और गहराई से पूरा करने की है, और इस प्रक्रिया में अपराध स्थलों का दौरा और भुक्तभोगियों के साथ बात की जाएगी.