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डीआरसी आपदा: क्षेत्रीय युद्ध में तेज़ी आने की आशंका

काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य - डीआरसी के पूर्वी हिस्से में लड़ाई तेज़ होने से, हज़ारों लोग विस्थापित हो गए हैं.
© UNHCR/Guerchom Ndebo
काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य - डीआरसी के पूर्वी हिस्से में लड़ाई तेज़ होने से, हज़ारों लोग विस्थापित हो गए हैं.

डीआरसी आपदा: क्षेत्रीय युद्ध में तेज़ी आने की आशंका

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने शुक्रवार को आगाह किया है कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वी हिस्से में हाल के दिनों में एम23 नामक एक सशस्त्र समूह की भागेदारी बढ़ने से, इस खनिज-समृद्ध क्षेत्र में लड़ाई में तेज़ी आई है. इस लड़ाई ने अधिक बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन हो रहा है, और क्षेत्रीय राजधानी गोमा पर भी हमला होने का डर है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय OHCHR की प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने कहा शुक्रवार को जिनीवा में कहा, "हम काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य के उत्तरी कीवू प्रान्त की राजधानी गोमा पर, एम23 सशस्त्र समूह के हमले के बढ़ते जोखिम से बहुत चिन्तित हैं.”

उन्होंने कहा, “गोमा पर इस तरह के किसी भी हमले से, हज़ारों लोगों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ने का जोखिम है, जिससे वे मानवाधिकारों के उल्लंघन और दुर्व्यवहार के जोखिम में पड़ सकते हैं."

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रवीना शमदासानी ने कहा "[मानवाधिकार] उच्चायुक्त [वोल्कर टर्क] ने कई बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि यौन हिंसा इस लड़ाई का एक प्रमुख घटक है - एक बहुत ही भयावह घटक है."

उन्होंने कहा, "सशस्त्र समूह महिलाओं और लड़कियों का अपहरण करते हैं, उन्हें बन्दी बनाते हैं और यौन दासता में डालते हैं; और उनमें से कई को तो बलात्कार के बाद मार दिया गया है."

जून 2024 में जब से संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन MONUSCO, दक्षिण कीवू से हटा है, तब से यूएनव शान्ति रक्षकों ने उत्तरी कीवू में प्रमुख स्थानों की रक्षा की है, जिनमें गोमा और साके शामिल हैं. इन क्षेत्रों में एम23, काँगो सशस्त्र बलों और कई अन्य सशस्त्र समूहों के बीच लड़ाई जारी है.

हज़ारों लोग विस्थापित

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी - UNHCR के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत से ही, उत्तर और दक्षिण कीवू में लगभग 4 लाख लोग विस्थापित हुए हैं.

UNHCR के प्रवक्ता मैट साल्टमार्श ने क्षेत्र में मानवीय संकट को उजागर करते हुए बताया कि दक्षिण और उत्तर कीवू में हिंसा से विस्थापित लोगों के शिविरों पर "बम गिरे हैं". यह संकट, बाहरी दुनिया की नज़रों से ओझल है.

मैट साल्टमार्श ने बताया कि हाल के दिनों में हुए हमलों के कारण लोगों में दहशत फैल गई है, बड़ी संख्या में लोगों का विस्थापन हुआ है.

उन्होंने बताया, "यूएनएचसीआर के कर्मचारी गोमा में ज़मीन पर मौजूद हुए हैं, जहाँ भी वे मदद कर सकते हैं और जहाँ भी उन्हें पहुँच मिलती है, वो विस्थापित लोगों की सहायता कर रहे हैं. लेकिन जैसा कि आप समझ सकते हैं, इस समय पहुँच की समस्या बेहद चुनौतीपूर्ण है."

गुटेरेश की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश भी, इस घटनाक्रम के बीच, गुरूवार को पूर्वी डीआरसी में एम23 विद्रोहियों द्वारा फिर से किए गए हमले और नागरिकों पर "विनाशकारी प्रभाव" पर चिन्ता व्यक्त कर चुके हैं.

एंतोनियो गुटेरेश ने अपने प्रवक्ता द्वारा जारी एक बयान में, दक्षिण कीवू में साके पर, रवांडा समर्थित विद्रोहियों – एम23 द्वारा कथित क़ब्ज़ा किए जाने का उल्लेख किया, जिससे क्षेत्रीय राजधानी गोमा के लिए "ख़तरा बढ़ गया".

उन्होंने कहा कि इन हालात से, "क्षेत्रीय युद्ध का ख़तरा बढ़ रहा है".

इस बीच रवांडा ने एम23 लड़ाकों के साथ अपनी किसी भी प्रत्यक्ष संलिप्तता से इनकार किया है.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के बयान में आगे कहा गया, "महासचिव एम23 से तुरन्त अपना हमला बन्द करने, अपने क़ब्जे वाले सभी क्षेत्रों से हटने और 31 जुलाई 2024 के युद्धविराम समझौते का पालन करने का आहवान करते हैं."

OHCHR की प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने महासचिव की चिन्ताओं को दोहराते हुए, मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क की अपील को दोहराया कि "सभी देश, जो क्षेत्र में सम्बद्ध पक्षों पर प्रभाव रखते हैं, वे तत्काल युद्धविराम लागू कराने और लड़ाई रोके जाने के लिए प्रयास करें."

रवीना शमदासानी ने कहा कि M23 को पर्याप्त मात्रा में धन हासिल है और "जैसा कि उच्चायुक्त ने पहले कहा है, उत्तरी कीवू में M23 का समर्थन करने में रवांडा द्वारा निभाई गई कोई भी भूमिका - और डीआरसी में सक्रिय सशस्त्र समूहों का समर्थन करने वाले किसी भी अन्य देश द्वारा किए जा रहे समर्थन को बन्द किया जाना चाहिए."

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "डीआरसी में लोग हिंसा से थक चुके हैं, लड़ाई से थक चुके हैं, अपने दैनिक जीवन की भयावहता से थक चुके हैं, और इस स्थिति को और अधिक ख़राब नहीं होने दिया जा सकता."