ग़ाज़ा पट्टी में भयावह हालात, 'भूख और पीड़ा में जान गँवा रहे हैं लोग'
ग़ाज़ा पट्टी में मानवीय सहायता के लिए यूएन समन्वय कार्यालय के प्रमुख जियॉर्जियोस पेट्रोपुलॉस ने फ़लस्तीनी आबादी के लिए मौजूदा भयावह हालात पर क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा है कि ये फ़िलहाल पृथ्वी पर सबसे ख़तरनाक स्थानों में है. उन्होंने बताया कि राहत सामग्री की क़िल्लत के बीच, भूख और पीड़ा की वजह से आम नागरिकों की मौतें हो रही हैं.
उन्होंने गुरूवार को एक वीडियो लिंक के ज़रिए पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि ग़ाज़ा में 20 लाख से अधिक लोग एक दर्दनाक वास्तविकता से जूझ रहे हैं, जहाँ भोजन, आश्रय, सुरक्षा समेत अन्य बुनियादी आवश्यकताओं की भीषण क़िल्लत है.
जियॉर्जियोस पेट्रोपुलॉस ने ज़ोर देकर कहा कि हम यहाँ लोगों को समर्थन देने के लिए मौजूद हैं, जो पिछले 14 महीनों से जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. “मगर, हमें अपना काम करने की अनुमति नहीं दी जा रही है.”
यूएन मानवतावादी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भूख व पीड़ा की वजह से आम लोगों की मौतें हो रही हैं, और बच्चे, माताएँ, राहतकर्मी व शिक्षक सभी इसी की चपेट में हैं.
सहायता अभियान के समक्ष चुनौतियाँ
ग़ाज़ा में ज़रूरतमन्द आबादी तक भोजन, स्वास्थ्य देखभाल व सुरक्षित पेयजल समेत अन्य सेवाएँ पहुँचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, मगर ईंधन की क़िल्लत और वहाँ पहुँचने के लिए रास्ते अवरुद्ध होने के कारण यह बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है.
उनके अनुसार, इसराइली प्रशासन द्वारा पूरी तरह से पान्बदियाँ थोपी गई हैं, जिसके कारण सहायता आपूर्ति प्रयासों पर गहरा असर हुआ है.
“हमने जब इस बारे में इसराइली प्रशासन से बात की, तो उन्होंने व्यवहारिक समाधान के हर एक प्रस्ताव को लगभग ख़ारिज कर दिया.” जियॉर्जियोस पेट्रोपुलॉस के अनुसार, सहायता व्यवस्था को हथियार के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा रहा है.
यूएन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फ़लस्तीनी आबादी की ज़रूरतें निरन्तर बढ़ रही हैं, मगर उन तक ज़रूरी सहायता सामग्री पहुँचाने के लिए समय बीता जा रहा है.
सामूहिक विस्थापन व विध्वंस
ग़ाज़ा का उत्तरी हिस्सा पिछले 75 दिनों से घेराबन्दी में हैं, जहाँ इसराइली सैन्य बल अपना गहन अभियान चला रहे हैं.
इस दौरान बड़े पैमाने पर आम लोग हताहत हुए हैं, स्थानीय समुदायों को भीषण नुक़सान पहुँचा है और बमबारी के बीच लोग जबरन विस्थापन का शिकार हो रहे हैं.
“इसराइली गलियारे ने [ग़ाज़ा] पट्टी को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया है, और वहाँ इस हद तक सख़्त व्यवस्था की गई है कि अब यह वास्तव में कॉरिडोर नहीं बचा है.”
बताया गया है कि अक्टूबर महीने के बाद से अब तक मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए 150 अनुरोधों को नकारा जा चुका है.
सदस्य देशों से अपील
ग़ाज़ा में यूएन समन्वय कार्यालय के प्रमुख ने सभी सदस्य देशों से अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत अपने तयशुदा दायित्वों का निर्वहन और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है.
उन्होंने तुरन्त युद्धविराम लागू किए जाने और मानवीय सहायता आपूर्ति के लिए पूर्ण रूप से मार्ग मुहैया कराने पर ज़ोर दिया है.
यूएन अधिकारी ने ध्यान दिलाया कि ग़ाज़ा में मानवीय हालात बेहद चिन्ताजनक हैं और स्थिति निरन्तर बिगड़ती जा रही है.
उनके अनुसार, मौजूदा संकट, यूएन की मानवीय सहायता व्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा है, मगर आपूर्ति भंडार ख़त्म होते जा रहे हैं.