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भारत के माधव गाडगिल सहित, छह साहसी पर्यावरण कार्यकर्ता बने 2024 के पृथ्वी चैम्पियन

भारत के एक वैज्ञानिक माधव गाडगिल को, वर्ष 2024 के लिए UNEP के पृथ्वी चैम्पियन का दर्जा दिया गया है.
© UNEP/Florian Fussstetter
भारत के एक वैज्ञानिक माधव गाडगिल को, वर्ष 2024 के लिए UNEP के पृथ्वी चैम्पियन का दर्जा दिया गया है.

भारत के माधव गाडगिल सहित, छह साहसी पर्यावरण कार्यकर्ता बने 2024 के पृथ्वी चैम्पियन

जलवायु और पर्यावरण

भारत के पारिस्थितिकी विज्ञानी और ब्राज़ील की पहली आदिवासी मंत्री, उन 6 विजेताओं में से हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम UNEP ने 2024 के पृथ्वी चैम्पियन पुरस्कार से सम्मानित किया है 

विजेताओं को यह पुरस्कार, भूमि क्षरण, सूखे और मरुस्थलीकरण से निपटने के उनके उत्कृष्ट नेतृत्व, साहसिक कार्रवाई एवं स्थाई समाधानों के लिए दिया गया गया है.

लोगों व ग्रह की रक्षा

पृथ्वी के चैम्पियन नामक यह पुरस्कार,संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार है. यह निजी व सार्वजनिक क्षेत्र व नागरिक समाज एवं शिक्षा जगत के उन व्यक्तियों को मान्यता देता है, जो पृथ्वी की रक्षा के प्रयासों में अग्रणी रहे हैं. 

2005 से अब तक इस पुरस्कार के ज़रिए, पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं प्रेरणादायक नेतृत्व के लिए 122 लोगों को पुरस्कृत किया जा चुका है.

इस वर्ष पुरस्कार के नामांकनों में ऐसे व्यक्तियों को खोजने पर ध्यान केन्द्रित किया गया, जो भूमि क्षरण से निपटने, सूखे के प्रति सहनसक्षमता बढ़ाने व मरुस्थलीकरण रोकने के क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

रेगिस्तान में खड़ा एक आदमी. मरुस्थलीकरण रोकने के प्रयासों के लिए भी यूनैप पुरस्कार दिए गए हैं.
© World Bank/Andrea Borgarello

'असाधारण व्यक्तियों' का सम्मान

इस अवसर पर UNEP की कार्यकारी निदेशक इन्गेर ऐंडरसन ने बताया कि दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत भूमि पहले ही क्षरित हो चुकी है. साथ ही मरुस्थलीकरण बढ़ रहा है और विनाशकारी सूखे की घटनाएँ लगातार देखने को मिल रही हैं. 

उन्होंने कहा, “अच्छी ख़बर यह है कि इस निपटने के लिए समाधान मौजूद हैं, और दुनिया भर में असाधारण व्यक्ति और संगठन यह दिखा रहे हैं कि हमारे ग्रह की रक्षा व पुनर्बहाली करना मुमकिन है.”

उन्होंने कहा, "2024 पृथ्वी चैम्पियनों द्वारा किए जा रहे महान प्रयास हमें यह याद दिलाते हैं कि हमारी भूमि, हमारी नदियों व हमारे महासागरों की रक्षा की लड़ाई जीतना सम्भव है."

"सही नीतियों, वैज्ञानिक सफलताओं, तंत्रगत सुधारों व सक्रियता के साथ-साथ, आदिवासी जन के महत्वपूर्ण नेतृत्व व ज्ञान का उपयोग करके, हम अपने पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली कर सकते हैं.”

मिलिए पृथ्वी नायकों से

भारत के माधव गाडगिल, एक पारिस्थितिकी विज्ञानी हैं, जिन्हें जीवनकाल उपलब्धि पुरस्कार से नवाज़ा गया है. वो दशकों से, शोध व सामुदायिक संवाद के ज़रिए, लोगों व ग्रह की रक्षा कार्रवाई में लगे हुए हैं.

यूनेप ने कहा, “ऐतिहासिक तौर पर देश और राष्ट्रीय नीतियों के पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन से लेकर, ज़मीनी स्तर पर पर्यावरणीय जुड़ाव तक, गाडगिल के काम से प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर जनता की राय और आधिकारिक नीतियाँ पर बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ा है.”

“वो ख़ासतौर पर भारत में पारिस्थितिक रूप से नाज़ुक, पश्चिमी घाट क्षेत्र में अपनी अनूठी कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं. वैश्विक स्तर पर यह इलाक़ा एक अद्वितीय जैव विविधता केन्द्र माना जाता है.”

ब्राज़ील में ब्रासीलिया की मंत्री गुआजाजारा को पृथ्वी चैम्पियन पुरस्कार से नवाज़ा गया है.
© UNEP/Camila Morales

ब्राज़ील में आदिवासी व्यक्तियों की मंत्री, सोनिया गुआजाजारा को नीति नेतृत्व की श्रेणी में पुरस्कार दिया गया है.

सोनिया गुआजाजारा, दो दशकों से अधिक समय से आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ती आई हैं. 

2023 में वो देश में आदिवासी व्यक्तियों की पहली मंत्री व पहली महिला आदिवासी मंत्री बनीं. उनके नेतृत्व में, वनों की कटाई, अवैध कटाई व नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए, 10 इलाक़ों को आदिवासी क्षेत्र के रूप में मान्यता मिली.

आदिवासी अधिकारों की पैरोकार एमी बोवर्स कॉर्डालिस को प्रेरणा एवं कार्रवाई की श्रेणी में पुरस्कार दिया गया.

एमी बोवर्स कॉर्डालिस, संयुक्त राज्य अमेरिका में युरोक जनजाति और क्लैमथ नदी के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयासरत हैं. अपनी क़ानूनी विशेषज्ञता का सहारा लेकर, वो पुनर्बहाली का अपनी जुनून पूरा करती हैं. 

यूनेप के अनुसार, नदी पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली व मछली पकड़ने की टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने का उनका काम दर्शाता है कि किस तरह साहसिक पर्यावरणीय कार्रवाई, आदिवासी लोगों लोगों के अधिकारों व आजीविका को बनाए रखते हुए सकारात्मक बदलाव ला सकती है.

रोम के निवासी पर्यावरण रक्षक, गेब्रियल पौन को प्रेरणा एवं कार्रवाई श्रेणी में सम्मानित किया गया है. गेब्रियल पौन, ‘एजेंट ग्रीन’ नामक गैर-सरकारी संगठन (NGO) के संस्थापक हैं, जिन्होंने 2009 से योरोप के अन्तिम पुराने विकास वन के विनाश व अवैध कटाई की सच्चाई उजागर करके, कार्पेथियन में हज़ारों हैक्टेयर क़ीमती जैव विविधता संरक्षित करने में मदद की है.

वनों की कटाई के आलेखन के दौरान उन्हें जान से मार डालने की धमकियाँ मिली और उन पर शारीरिक हमले भी किए गए. यह इलाक़ा न केवल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि बनविलाव एवं भेड़ियों जैसी जोखिम में पड़ी अनूठी जैव विविधता प्रजातियों का निवास स्थान भी हैं.

चीन के वैज्ञानिक लू क्यूई को विज्ञान एवं नवाचार श्रेणी में सम्मानित किया गया है. तीन दशकों तक विज्ञान एवं नीति क्षेत्रों में काम करने वाले लू क्यूई के प्रयासों से, चीन में भूमि क्षरण उलटने और रेगिस्तानों का विस्तार घटाने में मदद मिली है.

चीन में वानिकी अकादमी के मुख्य वैज्ञानिक और ‘ग्रेट ग्रीन वॉल संस्था’ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में, लू क्यूई ने विश्व की सबसे विशाल वनीकरण परियोजना शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 

उन्होंने माहिर शोधकर्ता नेटवर्क स्थापिक किया तथा मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण व सूखे की रोकथाम के लिए बहुपक्षीय सहयोग स्थापित करने के क्षेत्र में अहम योगदान दिया.

मिस्र की SEKEM पहल को किसानों को अधिक टिकाऊ कृषि की ओर रुख़ करने के प्रयासों के लिए, उद्यमशील दृष्टिकोण की श्रेणी में पुरस्कार दिया गया है.

इस पहल के तहत, बायोडायनामिक कृषि तथा वनीकरण एवं पुनर्वनीकरण कार्यों को प्रोत्साहन देकर, एक बड़ा रेगिस्तानी इलाक़े को कृषि योग्य बना दिया गया है, इससे न केवल यह क्षेत्र एक सम्पन्न कृषि व्यवसाय में बदल गया है, बल्कि इससे पूरे देश में सतत विकास को बढ़ावा मिला है.  

निजेर में सूखाग्रस्त भूमि पर, एक महिला अपने बच्चे को गोदी में उठाए, पानी भरकर ले जा रही है.
© World Bank/Andrea Borgarello

विश्व भर में पारिस्थितिकी तंत्रों की बहाली

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, UNEP के अनुसार, वर्तमान में दुनियाभर में 32 लाख लोग, मरुस्थलीकरण के जोखिम में हैं. इसके अलावा, यह भी आशंका है कि 2050 तक वैश्विक आबादी का तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा, सूखे से प्रभावित होगा.

मार्च 2019 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव के तहत, 2021 से 2030 तक के दशक को संयुक्त राष्ट्र पारिस्थितिकी तंत्र बहाली दशक घोषित किया था.  

यूनेप और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के नेतृत्व वाले इस दशक का उद्देश्य, अरबों हैक्टेयर स्थलीय एवं जलीय पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्बहाल करने हेतु, दुनिया भर में पारिस्थितिक तंत्र की क्षति को रोकना है.

2024 के पृथ्वी चैम्पियंस की घोषणा, 10 दिसम्बर को मनाए जाने वाले मानवाधिकार दिवस और सऊदी अरब के रियाद शहर में मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के कन्वेंशन (UNCCD) तथा कॉप16 में सहनसक्षमता दिवस के आयोजन के समय की गई है.