सीरिया संकट: पश्चिमोत्तर में भड़की हिंसा से, 2.80 लाख लोग विस्थापित
पश्चिमोत्तर सीरिया में भड़की हिंसा की वजह से पिछले कुछ दिनों में दो लाख 80 हज़ार से अधिक लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं. सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबन्धित आतंकी गुट हयात तहरीर अल-शाम के नेतृत्व में अन्य हथियारबन्द गुटों ने, सीरियाई सरकार के नियंत्रण वाले इलाक़ों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं, जिससे हालात बिगड़ रहे हैं.
तुर्कीये के रास्ते पश्चिमोत्तर क्षेत्र में स्थित सीमा चौकियों से सीरिया में मानवीय सहायता को पहुँचाया जाना फ़िलहाल जारी है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने बताया कि अलेप्पो और हमा में सामुदायिक रसोईघर खोले गए थे, मगर अब ये दोनों शहर लड़ाकों के क़ब्ज़े में हैं.
वहीं पड़ोसी देश लेबनान में, संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ मानवीय सहायता अधिकारी ऐडेम वोसोर्नु ने छह लाख से अधिक लोगों की सुरक्षा के प्रति गहरी चिन्ता व्यक्त की है, जिन्होंने इसराइल व हिज़बुल्लाह के बीच युद्धविराम पर सहमति होने के बाद अपने घर लौटना शुरू किया था.
ग़ाज़ा युद्ध की पृष्ठभूमि में, लेबनान में कई हफ़्तों तक भीषण हिंसक टकराव के बाद इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच 27 नवम्बर को युद्धविराम लागू हो गया था.
यूएन अधिकारी ने जिनीवा में पत्रकारों से बातचीत में, बिना फटे हुए विस्फोटकों और आयुध सामग्री के बिखरे होने की आशंका जताते हुए कहा कि, “मुझे विश्वास है कि वे फिर से बसने की प्रक्रिया में हैं, मगर समस्या यह है कि जब वे घर लौटेंगे तो उन्हें क्या मिलेगा.”
सीरिया, खाद्य सहायता अहम
यूएन खाद्य एजेंसी के सामेर अब्देलजाबेर ने जिनीवा में पत्रकारों को संयुक्त राष्ट्र और ग़ैर-सरकारी संगठनों के आपात मामलों के अधिकारियों के साझा मिशन की जानकारी दी, जिसने 25 नवम्बर से 1 दिसम्बर के दौरान मध्य पूर्व क्षेत्र में हालात का जायज़ा लिया.
उन्होंने कहा कि सीरिया में जिस तरह से नए आपात हालात पनप रहे हैं, वो एक संकट के ऊपर दूसरा संकट खड़े होने जैसा है.
सीरिया में सरकार के विरुद्ध आम नागरिकों के विद्रोह करने के बाद वर्ष 2011 में गृहयुद्ध भड़क उठा था.
उसके बाद से ही, सीरिया में क्षेत्रीय व अन्तरराष्ट्रीय शक्तियों का दख़ल रहा है और सुरक्षा परिषद व वैश्विक समुदाय द्वारा हिंसक टकराव पर विराम लगाने की कोशिशें विफल साबित हुई हैं.
एक अनुमान के अनुसार, सीरिया में गृहयुद्ध में अब तक लाखों लोगों की जान गई है और बड़ी संख्या में लोगों को सरकारी जेलों में बन्दी बनाकर रखा गया है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में हिंसा भड़कने के कारण विस्थापितों की संख्या 15 लाख तक पहुँच सकती है और विशाल स्तर पर मानवीय सहायता की ज़रूरत होगी.
WFP के सामेर अब्देलजाबेर ने कहा कि अग्रिम मोर्चे के दोनों तरफ़, मानवीय सहायता संगठनों द्वारा ज़रूरतमन्द सीरियाई आबादी तक राहत पहुँचाने की कोशिशें की जा रही हैं.
संकटपूर्ण हालात
अचानक हिंसक टकराव भड़कने के बावजूद, तुर्कीये और सीरिया की सीमा पर स्थित तीनों चौकियों के ज़रिये मानवीय सहायता को रवाना किए जाने का काम जारी है. देश के दूसरे सबसे शहर अलेप्पो तक सहायता पहुँच रही है.
सीरिया में लाखों लोग युद्ध की छाया में संकट भरे हालात का सामना कर रहे हैं. देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की आजीविकाएँ तबाह हो गई हैं और उनके लिए गुज़र-बसर कर पाना कठिन है.
“सीरिया में 13 या 14 वर्ष के हिंसक टकराव के बाद, हालात फ़िलहाल दरकने के कगार पर पहुँच रहे हैं. 30 लाख से अधिक सीरियाई, गम्भीर खाद्य असुरक्षा का शिकार हैं और पर्याप्त भोजन उनकी पहुँच से बाहर है.”
हाल के दिनों में भड़की लड़ाई से पहले भी सीरिया में 1.29 करोड़ लोगों को खाद्य सहायता की आवश्यकता थी.
इन हालात में, सीरिया को अतिरिक्त मानवीय सहायता धनराशि व समर्थन की दरकार है. सीरिया के लिए 4.1 अरब डॉलर की मानवतावादी अपील की गई थी, मगर फ़िलहाल इसके केवल एक-तिहाई से भी कम रक़म ही जुट पाई है.
लेबनान लौट रहे लोगों के लिए जोखिम
यूएन मानवतावादी कार्यालय में अभियान संचालन विभाग की निदेशक ऐडेम वोसोर्नु ने बताया कि इसराइल और हिज़बुल्लाह लड़ाकों के बीच युद्ध से प्रभावित हुए लोगों ने तेज़ी से अपने घर लौटना शुरू किया है.
इनमें से अनेक लोग सीरियाई नागरिक हैं, जिन्होंने अपने देश में लड़ाई छिड़ने के बाद लेबनान में शरण ली है और फिर वहाँ हिंसक टकराव की वजह से फिर विस्थापित होने के लिए मजबूर होना पड़ा.
लेबनान वापसी करने वाले स्थानीय किसानों को भी दक्षिणी लेबनान के युद्ध प्रभावित इलाक़ों में जोखिम का सामना करना पड़ सकता है. इन स्थानों पर बारूदी सुरंगे, बिना फटे विस्फोटकों के बिखरे होने का जोखिम है और आम नागरिक उसकी चपेट में आ सकते हैं.
इसके मद्देनज़र, यूएन बारूदी सुरंग कार्रवाई टीम से आग्रह किया गया है कि इन स्थानों को फिर से सुरक्षित बनाने के लिए लेबनान की सरकार को समर्थन प्रदान किया जाए, ताकि अपने घर वापिस लौटने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.