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इसराइल-फ़लस्तीन टकराव पर विराम के लिए, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से ठोस क़दम उठाने का आग्रह

गाजा में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी संगठन (UNRWA) के एक सहायता केंद्र पर भोजन वितरण के लिए लोगों की भारी भीड़ इंतजार कर रही है, जहां WFP का आटा उपलब्ध कराया जा रहा है।
© UNRWA ग़ाज़ा में जारी युद्ध के कारण लाखों लोगों के लिए भूख का संकट उत्पन्न हो गया है. यूएन एजेंसी - UNRWA उन्हें खाद्य वितरण की कोशिश कर रही है.

इसराइल-फ़लस्तीन टकराव पर विराम के लिए, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से ठोस क़दम उठाने का आग्रह

यूएन मामले

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष फ़िलेमॉन यैंग ने ग़ाज़ा युद्ध में 43 हज़ार से अधिक लोगों के मारे जाने पर क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा है कि इसराइल-फ़लस्तीन टकराव को अन्तहीन युद्ध व क़ब्ज़े से नहीं निपटाया जा सकता है. इसके लिए अन्तरराष्ट्रीय क़ानून, यूएन चार्टर व प्रासंगिक यूएन प्रस्तावों की नींव पर एक न्यायसंगत समाधान के प्रयास किए जाने होंगे.

यूएन महासभा प्रमुख ने बुधवार को जनरल असेम्बली के 10वें आपात विशेष सत्र की शुरुआत करते हुए प्रतिनिधियों को ध्यान दिलाया कि ग़ाज़ा युद्ध में अब तक 43 हज़ार फ़लस्तीनियों की जान गई है और एक लाख से अधिक घायल हुए हैं. इनमें अधिकाँश महिलाएँ व बच्चे हैं.

उन्होंने ग़ाज़ा में तत्काल युद्धविराम लागू किए जाने, सभी बन्धकों की बिना शर्त रिहाई, ज़रूरतमन्दों तक मानवीय सहायता की बेरोकटोक आपूर्ति की मांग दोहराते हुए कहा कि सभी युद्धरत पक्षों को अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का पूर्ण रूप से पालन करना होगा.

फ़िलेमॉन यैंग के अनुसार “अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की मांगे बिलकुल स्पष्ट हैं, मगर फिर भी सुरक्षा परिषद लाचार है, और शान्ति व सुरक्षा बनाए रखने के अपने प्राथमिक दायित्व को निभाने में असमर्थ है.”

महासभा प्रमुख ने कहा कि इस टकराव का अन्त तभी हो सकता है जब इसराइल व फ़लस्तीन, सम्प्रभु, स्वतंत्र राष्ट्रों के तौर पर एक दूसरे के साथ शान्ति, सुरक्षा व गरिमा के साथ रहें.

उन्होंने फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया और बताया कि बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में लाखों फ़लस्तीनियों तक भोजन, जल, संरक्षण, मेडिकल देखभाल समेत अन्य सेवाएँ पहुँचाई जा रही हैं.

मगर, इस महत्वपूर्ण मानवीय सहायता अभियान के बावजूद, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में UNRWA के भविष्य पर जोखिम मंडरा रहा है.

महासभा प्रमुख ने आगाह किया कि इसराइली संसद द्वारा UNRWA की गतिविधियों पर लक्षित दो क़ानूनों को यदि लागू किया गया तो इससे यूएन एजेंसी के लिए ग़ाज़ा, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में अपने अति-आवश्यक कार्य को जारी रख पाना सम्भव नहीं होगा.

फ़लस्तीन

पर्यवेक्षक राष्ट्र के तौर पर फ़लस्तीनी प्रतिनिधि रियाद मंसूर ने महासभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि उत्तरी ग़ाज़ा में दिन के उजाले में जातीय सफ़ाए को अंजाम दिया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि हर घंटे, हर दिन, और अधिक संख्या में फ़लस्तीनी महिलाएँ, बच्चे और पुरुष, इसराइली प्रहार का शिकार हो रहे हैं. ज़िन्दगियाँ ख़त्म हो रही हैं, परिवार तबाह हो रहे हैं और एक पूरी आबादी आतंकित, बर्बरता व सदमे का शिकार हो रही है.

रियाद मंसूर ने कहा कि 424 दिन बीतने के बाद भी जनसंहार जारी है और जिस ढंग से गम्भीरतम अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है, वैसी नृशंसता को दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अब तक नहीं देखा गया.

उन्होंने सवाल किया कि यह किस तरह से सम्भव है, दुनिया ऐसा होने की अनुमति किस तरह दे सकता है, जबकि इन्हें अंजाम देने वालों और उनके अपराधों के बारे में सभी को पता है.

इसराइल

संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के स्थाई प्रतिनिधि, राजदूत डैनी डेनॉन ने कहा कि हर वर्ष, यूएन महासभा में यही कवायद होती है, और उन्हीं उबाऊ प्रस्तावों के ज़रिये इसराइल को खलनायक बनाने की कोशिशें की जाती हैं.

उन्होंने कहा कि इन क़दमों से यूएन का पक्षपात और पूर्वाग्रह सबको नज़र आ जाते हैं. इसराइली प्रतिनिधि ने ध्यान दिलाया कि इसकी शुरुआत 77 वर्ष पहले तब हुई, जब यूएन महासभा में यूएन विभाजन योजना पर मतदान हुआ था.

“एक लम्हा जिसने इसराइलियों और फ़लस्तीनियों को शान्ति में एक दूसरे के साथ रहने का अवसर दिया था. इसराइल ने हाँ कहा, अरब जगत ने मना कर दिया. उन्होंने सह-अस्तित्व को नकार दिया, उसके बजाय नवजात यहूदी राष्ट्र पर युद्ध की घोषणा कर दी गई.”

डैनी डेनॉन ने कहा कि पिछले वर्ष 7 अक्टूबर को इसराइल व आम नागरिकों पर हुए हमलों दुनिया की आत्मा को झकझोर दिया जाना चाहिए था, मगर असेम्बली में चुप्पी थी और हमास की निन्दा करने वाला एक भी प्रस्ताव नहीं आया.