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WFP: दुनिया भर में भूख स्थिति चिन्ताजनक, $16.9 अरब जुटाने की पुकार

दक्षिण सूडान के रूपचाई राज्य में लोग हवाई जहाज़ से गिराया हुआ भोजन इकट्ठा कर रहे हैं.
© WFP/Eulalia Berlanga
दक्षिण सूडान के रूपचाई राज्य में लोग हवाई जहाज़ से गिराया हुआ भोजन इकट्ठा कर रहे हैं.

WFP: दुनिया भर में भूख स्थिति चिन्ताजनक, $16.9 अरब जुटाने की पुकार

मानवीय सहायता

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने भूख स्थिति यानि खाद्य अभाय के बढ़ते वैश्विक संकट से निपटने के लिए लगभग 16.9 अरब डॉलर की रक़म जुटाने की पुकार लगाई है. यह रक़म केवल इतनी है, जितनी पूरी दुनिया, केवल दो सप्ताह में कॉफ़ी पीने पर ख़र्च कर देती है.

यूएन खाद्य एजेंसी ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा ज़रूरतों का आकलन करती हुई एक रिपोर्ट शुक्रवार को जारी होने के बाद यह आहवान किया है. इस रिपोर्ट में  2025 के लिए वैश्विक दृष्टिकोण पेश किया गया है.

WFP के अनुसार भरपेट भोजन नहीं मिलने यानि भूख की स्थिति लगातार बढ़ रही है, और 74 देशों में 34.3 करोड़ लोग गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जोकि पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत की वृद्धि है.

इसमें वो 19 लाख लोग भी शामिल हैं जो अकाल के कगार पर हैं. ग़ाज़ा, सूडान, दक्षिण सूडान, हेती और माली जैसे क्षेत्रों में भूख की विनाशकारी स्थिति दर्ज की गई है.

WFP की कार्यकारी निदेशक, सिंडी मैक्केन ने स्थिति की गम्भीरता समझाते हुए कहा है, “विनाशकारी टकराव, बारम्बार होने वाली जलवायु आपदाएँ और व्यापक आर्थिक उथल-पुथल के कारण, वैश्विक स्तर पर मानवीय आवश्यकताएँ बढ़ी हैं.

लेकिन बढ़ती ज़रूरतों के हिसाब से, पर्याप्त धनराशि एकत्र नहीं हो पा रही है. 2024 में वित्तपोषण की कमी से विश्व खाद्य कार्यक्रम को अपनी राहत कार्रवाई कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे सबसे अधिक ख़ामियाज़ा अक्सर कमज़ोर तबक़े के लोगों को भुगतना पड़ता है.

उप-सहारा अफ़्रीका

उप-सहारा अफ़्रीका में, 17 करोड़ से अधिक लोग गम्भीर भूख स्थिति का सामना कर रहे हैं, जिससे WFP द्वारा 2025 के लिए जुटाई धनराशि का आधा भाग, इस महाद्वीप की ज़रूरतों के लिए आवंटित कर दिया गया है.

सूडान, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य और साहेल में टकराव एवं अल नीनो के कारण बढ़ती चरम मौसम घटनाओं ने संकट को और अधिक गहरा कर दिया है. बढ़ते विस्थापन और आवश्यक संसाधनों तक कम पहुँच के कारण मानवीय अभियान बहुत दबाव में हैं, जिससे नवीन चुनौतियाँ पैदा हो रही हैं.

ग़ाज़ा में भोजन के लिए क़तार में लगे बच्चे.
© UNRWA

मध्य पूर्व में भीषण भुखमरी

मध्य पूर्व में खाद्य असुरक्षा के चिन्ताजनक स्तर देखे जा रहे हैं, जहाँ ग़ाज़ा, सीरिया और यमन जैसे क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं.

ग़ाज़ा में, 91 प्रतिशत आबादी, गम्भीर रूप से खाद्य असुरक्षित है, और 16 प्रतिशत जनसंख्या भयावह परिस्थितियों में जी रही हैं.

सीरिया और यमन को भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जहाँ जारी टकराव के कारण लाखों लोग खाद्य सहायता पर निर्भर हैं.

एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में जलवायु झटके 

एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में 8.8 करोड़ लोग जलवायु सम्बन्धी आपदाओं से उत्पन्न हुए भूख हालात से जूझ रहे हैं. चरम मौसम घटनाओं के कारण क्षेत्र की संवेदनशीलता बढ़ गई है, जिससे खाद्य प्रणालियाँ और आजीविकाएँ प्रभावित हुई हैं.

WFP ने इन संकटों का असर घटाने के लिए सामाजिक सुरक्षा प्रणालियाँ एवं अग्रिम कार्रवाई में वृद्धि की योजना बनाई है.

 WFP, हैती में लोगों को गर्म भोजन वितरित कर रहा है.
© CAPAC/Jean Valder Presume

लातीनी अमेरिका में तत्काल समर्थन की आवश्यकता

लातीनी अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र पर भी गम्भीर प्रभाव देखा जा सकता है. इस क्षेत्र में 4 करोड़ से अधिक लोग खाद्य असुरक्षित हैं और ऐसे 1.42 करोड़ लोगों की पहचान की गई है, जिन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है.

इस इलाक़े में विश्व खाद्य कार्यक्रम का ध्यान, खाद्य प्रणालियों को मज़बूत करने, जलवायु सहनसक्षमता विकसित करने और कमज़ोर समुदायों में स्थिरता लाने तथा भविष्य में इससे अधिक नुक़सान होने से रोकने के लिए, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों का समर्थन करने पर केन्द्रित है.

कार्रवाई के लिए वैश्विक आहवान

विश्व खाद्य कार्यक्रम, 2025 के लिए 16.9 अरब डॉलर के वित्तपोषण से वैश्विक स्तर पर भूख से सर्वाधिक पीड़ित 12.3 करोड़ लोगों तक भोजन पहुँचाने में सक्षम होगा.

सिंडी मैक्केन ने कहा, “WFP में हम, भूख संकट रहित दुनिया का सपना सच करने के लिए प्रयासरत हैं. लेकिन हमें इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल वित्तीय एवं राजनयिक समर्थन की आवश्यकता है, ताकि हम वैश्विक ज़रूरतों की बढ़ती लहर को उलटने और कमज़ोर समुदायों को खाद्य असुरक्षा से बचाने के लिए, दीर्घकालिक सहनसक्षमता बनाने में मदद कर सकें.”

एजेंसी ने कहा है कि 2025 में, विश्व खाद्य कार्यक्रम, प्रत्येक देश की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार प्रतिक्रिया देना जारी रखेगा. साथ ही, अपनी क्षमताओं एवं संसाधनों का उपयोग, उच्च गुणवत्ता वाले कार्यक्रम प्रदान करने के लिए करेगा.