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ग़ाज़ा पट्टी: भुखमरी की गहराती छाया, बाज़ारों में बुनियादी सामान की क़िल्लत

हिजाब पहने एक फिलिस्तीनी महिला एक छोटे लड़के का हाथ पकड़े हुए सूटकेस खींच रही है और गाजा की एक कच्ची सड़क पर चल रही है, जिसके पृष्ठभूमि में अन्य विस्थापित लोग और क्षतिग्रस्त इमारतें दिखाई दे रही हैं।
© UN Women/Samar Abu Elouf हिंसक टकराव के कारण ग़ाज़ा सिटी में विस्थापित परिवार दक्षिणी इलाक़ों का रुख़ कर रहे हैं.

ग़ाज़ा पट्टी: भुखमरी की गहराती छाया, बाज़ारों में बुनियादी सामान की क़िल्लत

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायताकर्मियों ने चेतावनी जारी की है कि ग़ाज़ा में इसराइली बमबारी और दैनिक जीवन में ज़रूरी खाद्य सामग्री की क़िल्लत के बीच, भुखमरी की आशंका प्रबल है और आम फ़लस्तीनियों में हताशा व्याप्त है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने अपने एक ऐलर्ट में बताया कि ग़ाज़ा के बाज़ारों में हालात ख़राब हैं. ताज़ा भोजन, अंडे, माँस की उपलब्धता ना के बराबर है जबकि जो वस्तुएँ उपलब्ध हैं उनके दाम नई ऊँचाइयों को छू रहे हैं.

कुछ ही दिन पहले, संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक रिपोर्ट में खाद्य विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की थी कि उत्तरी ग़ाज़ा में मौजूदा हालात या तो अकाल की दहलीज को पार कर चुके हैं या फिर ऐसा जल्द होगा.

यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) का कहना है कि नवम्बर महीने में, संयुक्त राष्ट्र ने उत्तरी ग़ाज़ा की घेराबन्दी के बीच खाद्य व स्वास्थ्य सामग्री पहुँचाने के लिए अनेक मिशन रवाना करने के प्रयास किए हैं, मगर या तो उन्हें अनुमति नहीं मिला या फिर उनके रास्ते में अवरोध खड़े किए गए.

विकट मानवीय हालात के बीच, इसराइली सैन्य बल उत्तरी ग़ाज़ा में हमले कर रहे हैं. आम फ़लस्तीनी सुरक्षा की तलाश में और बेदख़ली आदेशों की वजह से अन्य इलाक़ों का रुख़ कर रहे हैं. उत्तरी ग़ाज़ा से एक लाख 30 हज़ार लोगों के विस्थापित होने की ख़बर है.

बड़ी संख्या में लोगों ने असुरक्षित स्कूली इमारतों में शरण ली है, जिनके किसी भी क्षण ढह जाने का जोखिम है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के अनुसार, अक्टूबर महीने में स्कूलों पर हमले की 64 घटनाएँ हुई हैं, जहाँ विस्थापितों ने आश्रय लिया हुआ है.

‘अनवरत संघर्ष’

यूएन मानवतावादियों ने यूएन न्यूज़ को बताया कि खुले मैदानों में शव बिखरे हुए हैं जहाँ कुत्ते घूम रहे हैं, जबकि पूरी ग़ाज़ा पट्टी में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की सुलभता चिन्ताजनक है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा कि डेढ़ लाख से अधिक गर्भवती व हाल ही में माँ बनने वाली महिलाएँ थकान, सदमे और गम्भीर भूख से जूझ रही हैं.

ग़ाज़ा में 36 अस्पतालों में से केवल 50 फ़ीसदी से कम में ही आंशिक रूप से कामकाज हो रहा है, जबकि 133 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में से 47 में सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं.

क़रीब 13 महीने पहले, इसराइल पर हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों के हमलों में 1,200 लोगों की जान गई थी और 250 को बन्धक बना लिया गया था.

इसके बाद, इसराइल की जवाबी कार्रवाई में अब तक 43 हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें अधिकाँश आम नागरिक, महिलाएँ व बच्चे हैं. क़रीब 10 हज़ार लोगों के घरों व आश्रय स्थलों के मलबे में दबे होने की आशंका है.