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सूडान में बाढ़ का पानी पार कर जाता एक बच्चा.

कॉप29: जानलेवा चरम मौसम घटनाएँ, जलवायु परिवर्तन पर निष्क्रियता का नतीजा

© UNICEF/Mark Naftalin
सूडान में बाढ़ का पानी पार कर जाता एक बच्चा.

कॉप29: जानलेवा चरम मौसम घटनाएँ, जलवायु परिवर्तन पर निष्क्रियता का नतीजा

जलवायु और पर्यावरण

स्पेन में आई भीषण बाढ़, फ़्लोरिडा में भयानक तूफ़ान और दक्षिणी अमेरिका के जंगलों में लगी आग. चरम मौसम घटनाओं के ये उदाहरण दर्शाते हैं कि पुख़्ता जलवायु कार्रवाई ना होने की कितनी विशाल क़ीमत चुकानी पड़ सकती है. जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक अहम उपाय है, उसके लिए ज़िम्मेदार ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती लाना. इस पृष्ठभूमि में, इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (COP29) में, जीवाश्म ईंधन के स्वच्छ विकल्प ढूँढने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के मसले को शीर्ष पर रखा गया है.

11 नवम्बर को अज़रबैजान की राजधानी बाकू में, जिस सन्दर्भ में यूएन का वार्षिक जलवायु सम्मेलन, COP29 आरम्भ हो रहा है,वह गम्भीर तो है, लेकिन पूरी तरह निराशाजनक नहीं.

सम्मेलन से कुछ ही दिन पहले जारी एक संयुक्त राष्ट्र जलवायु रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो वैश्विक तापमान में वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाने की आशंका है और यह इस सदी के अन्त तक पूर्व औद्योगिक काल के स्तर की तुलना में 2.6-3.1°C तक पहुँच सकती है.

कार्रवाई ना होने पर, बार-बार ख़तरनाक चरम मौसम घटनाओं का सामना करना पड़ेगा. 

ऐसे में, संयुक्त राष्ट्र ने तुरन्त सामूहिक कार्रवाई का आहवान किया है. विकसित देशों के जी20 समूह और प्रमुख उत्सर्जकों से आग्रह किया गया है कि वे इस संकट को रोकने के लिए साथ मिलकर, ठोस प्रयास करें. 

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन क्या है? 

जलवायु संकट किसी एक देश तक सीमित नहीं है. इससे निपटने के लिए अभूतपूर्व अन्तरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है, और इस बहुपक्षीय प्रयास में संयुक्त राष्ट्र और यूएन महासचिव केन्द्रीय भूमिका में हैं. 

नेपाल में एक सब्ज़ी किसान, सौर ऊर्जा संचालित पम्पों का उपयोग करके अपनी फ़सलों की सिंचाई कर रही हैं.
© IWMI/Nabin Baral

वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP - Conferences of the Parties to the UN Framework Convention on Climate Change), इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए एक प्रमुख बहुपक्षीय मंच हैं, जिस पर दुनिया के लगभग सभी देश एकजुट होते हैं. 

इन सम्मेलनों को, जलवायु संकट से निपटने, वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने, कमज़ोर समुदायों को बदलती जलवायु के अनुकूल ढालने में मदद करने और 2050 तक नैट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य पर सहमति बनाने के लिए एकजुट होने के अवसरों के रूप में देखा जाता है.

कॉप सम्मेलन समावेशी होते हैं, और इनमें विश्व नेताओं व सरकारी प्रतिनिधियों से लेकर, समाज, व्यापारिक नेता, जलवायु वैज्ञानिक, तथा आदिवासी लोग एवं युवजन तक, समाज के विविध क्षेत्रों से विभिन्न लोग शामिल होते हैं. ये सभी हितधारक, अपने दृष्टिकोण व सर्वोत्तम समाधानों को साझा करते है, ताकि सर्वजन के हित के लिए जलवायु कार्रवाई को मज़बूत किया जा सके.  

कॉप29 में प्रमुख मुद्दे क्या होंगे?

बाकू में वार्ता का एक प्रमुख मुद्दा, नए जलवायु वित्त पोषण लक्ष्य पर सहमति बनाना होगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी देशों के पास, मज़बूत जलवायु कार्रवाई, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती और सहनसक्षम समुदायों के निर्माण के लिए पर्याप्त साधन व संसाधन उपलब्ध हों.

स्कॉटलैंड में चार्जिंग के लिए लगा एक विद्युत चालित वाहन.
© IMF/Crispin Rodwell

सम्मेलन का उद्देश्य, विकासशील देशों को कार्बन उत्सर्जन घटाने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और इससे हुए नुक़सान की भरपाई करने के लिए ज़रूरी ख़रबों डॉलर जुटाना है. 

इस सिलसिले में ‘भविष्य के लिए सम्मेलन’ में, अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय ढाँचे में सुधार पर हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाया जाएगा. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने वर्तमान प्रणाली को "मौजूदा चुनौतियों का सामना करने में पूरी तरह से अनुपयुक्त" बताया है.

उन्होंने कहा कि कई निर्धन देशों पर ऋण का असहनीय बोझ है, जिससे वे सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में निवेश करने में असमर्थ हैं. हालाँकि उन्हें कार्बन आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भरता घटाने के लिए संसाधन जुटाने होंगे.

अगले दो सप्ताह में क्या-कुछ होगा? 

हर बार की तरह, इस सम्मेलन में भी बातचीत, भाषण, प्रैस कॉन्फ्रेंस, आयोजन और पैनल चर्चाओं से भरे व्यस्त कार्यक्रम होंगे. इस कार्यक्रम को दो क्षेत्रों में बांटा गया है - ग्रीन ज़ोन, जोकि कॉप29 के अध्यक्ष देश द्वारा संचालित होगा और आम जनता के लिए खुला होगा.

इसके अलावा दूसरा ब्लू ज़ोन होगा, जिसके प्रबन्धन का ज़िम्मा संयुक्त राष्ट्र के पास होगा.

दुबई में आयोजित कॉप28 में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव, एंतोनियो गुटेरेश.
© COP28/Stuart Wilson

यहीं पर मुद्दों की बारीक़िया तय की जाएँगी, और विश्व के विभिन्न देशों के प्रतिनिधि सम्मेलन ख़त्म होने तक आपसी सहमति पर पहुँचने का प्रयास करेंगे. अक्सर यह सहमति हासिल तो कर ली जाती है, लेकिन कभी-कभी अन्तिम क्षण तक असहमति के कारण चर्चा निर्धारित समय सीमा से आगे बढ़ जाती है. 

कॉप सम्मेलन क्यों महत्वपूर्ण हैं? 

COP सम्मेलनों का महत्व सभी पक्षों को एकजुट करने की उनकी शक्ति में है. हालाँकि कई बार इनमें लिए गए निर्णय जलवायु संकट से निपटने में उतने कामयाब नहीं हो पाते, जितनी उम्मीद की जाती है. 

लेकिन इनका आधार सभी की सहमति होता है, जो गम्भीर मुद्दों पर मानक स्थापित करने व कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए दुनियाभर के देशों को, अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर समझौतों के लिए एकजुट करता है.

मालदीव जैसे निचले द्वीपसमूह, जलवायु परिवर्तन के विनाश के प्रति अधिक संवेदनशील हैं.
© UNICEF/Ashwa Faheem

2015 में, पेरिस में COP21 के दौरान, एक ऐतिहासिक जलवायु समझौता हुआ था, जिसमें देशों ने वैश्विक तापमान वृद्धि को औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस नीचे रखने पर सहमति व्यक्त की थी और इसे 1.5 डिग्री तक सीमित रखने का प्रयास करने का वादा किया था. पेरिस समझौते के तहत, हर पाँच साल में जलवायु कार्रवाई योजनाओं को आगे बढ़ाया जाता है. 

अगली राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई योजनाएँ – जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित जलवायु योगदान (NDCs) कहा जाता है – 2025 में जारी की जाएँगी. इस प्रक्रिया से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में धीरे-धीरे लेकिन महत्वपूर्ण कटौती लाने और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाने के प्रयासों को बढ़ावा मिला है. 

हर वर्ष, वार्ताकार उससे पहले के COP में हुई प्रगति को आगे बढ़ाते हैं, महत्वाकाँक्षाओं और प्रतिबद्धताओं को मज़बूत करते हैं, और नवीनतम जलवायु विज्ञान प्रगति और संकट के दौरान मानव गतिविधि के आधार पर नए समझौतों को आकार देते हैं. 

अगला क़दम क्या होगा? 

चीन के एक तटीय राजमार्ग पर लगी पवन टर्बाइन.
© Yan Wang

ऐसे सकारात्मक संकेत हैं कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज़ी से बदलाव किया जा रहा है और इससे स्पष्ट तौर पर रोज़गार सृजन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को प्रोत्साहन मिलने जैसे लाभ मिल रहे हैं.

नवीकरणीय ऊर्जा एक अभूतपूर्व दर से ऊर्जा प्रणाली में प्रवेश कर रही है, और अधिकाँश स्थानों में पवन एवं सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली, जीवाश्म ईंधनों से अधिक किफ़ायती हो गई है. 

वह दिन दूर नहीं जब हमारा भविष्य काफ़ी हद तक नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होगा. जो आज निर्णायक क़दम उठाकर स्वच्छ तकनीकों में निवेश कर रहे हैं, वो आने वाले वर्षों में इसका सबसे अधिक लाभ पाने की उम्मीद कर सकते हैं. 

COP29 समाप्त होने से पहले भी, प्रतिनिधि अपनी नवीन राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं को अन्तिम रूप देने पर काम कर रहे होंगे, जिनका प्रमुख लक्ष्य जीवाश्म ईंधनों से दूर हटकर वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री से कम पर रखना है.