ग़ाज़ा: स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को तबाह करने के लिए, 'इसराइल ने किए योजनाबद्ध प्रयास'
क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े के लिए स्वतंत्र जाँच आयोग ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि इसराइल ने ग़ाज़ा पट्टी में सैन्य कार्रवाई के दौरान, स्थानीय स्वास्थ्य प्रणाली को बर्बाद करने की नीति पर योजनाबद्ध ढंग से काम किया है, जिसके तहत स्वास्थ्यकर्मियों और केन्द्रों को जानबूझकर निशाना बनाया गया है. कमीशन ने अपनी नई रिपोर्ट यूएन महासभा की तीसरी समिति को सौंपी है.
पूर्वी येरूशेलम व इसराइल समेत, क़बिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े के लिए स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय जाँच आयोग की प्रमुख नवी पिल्लै ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इसराइली सैन्य बलों द्वारा अस्पतालों की घेराबन्दी की गई, जिससे ग़ाज़ा की स्वास्थ्य व्यवस्था दरक गई.
स्वतंत्र जाँच आयोग ने इस वर्ष जनवरी महीने में एक ऐम्बुलेंस पर इसराइली हमले की जाँच में पाया कि इसके लिए इसराइली सेना की 162वीं डिवीज़न ज़िम्मेदार है और इसे युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है. इस हमले में गाड़ी में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई थी.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसराइल और फ़लस्तीनी हथियारबन्द गुट, यातना, यौन व लिंग-आधारित हिंसा के लिए ज़िम्मेदार हैं.
जाँच आयोग ने महासभा की समिति को 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल में हमलों के दौरान बन्धक बनाए गए लोगों के साथ हुए बर्ताव, यौन व लिंग-आधारित हिंसा से भी अवगत कराया.
पिछले वर्ष इसराइल में हमास व अन्य चरमपंथी गुटों द्वारा किए गए इन हमलों में एक हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे और 250 से अधिक को बन्धक बना लिया गया था.
रिपोर्ट के अनुसार, फ़लस्तीनी हथियारबन्द गुटों ने इसराइली व विदेशी बन्धकों के साथ जानबूझकर बुरा व्यवहार किया और इन कृत्यों को युद्ध अपराध व मानवता के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है.
वहीं, इसराइली प्रशासनिक एजेंसियों द्वारा फ़लस्तीनी बन्दियो के साथ भी निरन्तर बुरा बर्ताव किया जा रहा है, जोकि यातना दिए जाने के समान है.
'आतंकी' तैयार करने की फ़ैक्ट्री
इसराइल द्वारा ग़ाज़ा में हवाई, भूमि व समुद्री मार्ग से अब भी हमले किए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आम फ़लस्तीनी हताहत हो रहे हैं. वे विस्थापित होने के लिए मजबूर हैं और नागरिक प्रतिष्ठान बर्बाद हो रहे हैं.
जाँच आयोग ने कहा कि बच्चे आतंकवादी नहीं हैं, मगर दक्षिणी इसराइल और फिर उसके बाद जो कुछ भी हुआ, उसमें हज़ारों बच्चों की जान जा चुकी है.
कमीशन ने क्षोभ जताया कि ग़ाज़ा में मौजूदा हिंसक टकराव, आतंकवाद पैदा करने वाली एक ऐसी इसराइली फ़ैक्ट्री है, जिसका फ़िलहाल कोई अन्त नज़र नहीं आ रहा है.
आयोग के अनुसार, पिछले कई दशको से जारी इस हिंसक टकराव में पहले कभी इतने लम्बे समय तक युद्ध जारी नहीं रहा है, और यह अभूतपूर्व है.
नवी पिल्लै ने ग़ाज़ा में मौजूदा हालात पर क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि वहाँ मानवता को सर्वोपरि रखते हुए जल्द से जल्द युद्धविराम लागू किया जाना होगा.
सहायता मार्ग का अनुरोध
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी कार्यालय ने इसराइली प्रशासन से उत्तरी ग़ाज़ा के जबालिया, बेइत लाहिया और बेइत हनून में जारी सैन्य कार्रवाई के बीच मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए मार्ग मुहैया कराने की अपील की है.
यूएन प्रमुख ने बेइत लाहिया में मंगलवार को हुए एक इसराइली हवाई हमले पर गहरा क्षोभ प्रकट किया, जिसमें कम से कम 90 फ़लस्तीनियों के मारे जाने या लापता होने की ख़बर है. इनमें क़रीब 25 बच्चे हैं.
महासचिव गुटेरेश ने कहा कि त्रासदीपूर्ण ढंग से इतनी बड़ी संख्या में जीवन हानि एक बार फिर दर्शाता है कि ग़ाज़ा में हिंसक टकराव का कितना गहरा असर हुआ है. ग़ौरतलब है कि ग़ाज़ा के उत्तरी हिस्से में भीषण लड़ाई हो रही है.
यूएन प्रमुख ने ग़ाज़ा में व्यापक स्तर पर लोगों के हताहत व विस्थापित होने की निन्दा की और सभी युद्धरत पक्षों को अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत उनके तयशुदा के प्रति सचेत किया.
उन्होंने ध्यान दिलाया है कि मानवीय व अग्रिम मोर्चों पर डटे सहायताकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी होगी, जोकि ज़रूरतमन्दों तक जीवनरक्षक सहायता पहुँचाने में जुटे हैं. उनके कार्य में अवरोध पैदा होने से आम नागरिकों की पीड़ा गहरी होती है और इसलिए सहायता के प्रवाह को बेरोकटोक जारी रखना ज़रूरी है.