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ग़ाज़ा पट्टी: युद्ध ने फ़लस्तीन में आर्थिक विकास को 69 वर्ष पीछे धकेला

पश्चिमी तट में बच्चे अपने परिवारों के साथ इमारतों के मलबे से होकर गुज़र रहे हैं.
© UNICEF/Alaa Badarneh
पश्चिमी तट में बच्चे अपने परिवारों के साथ इमारतों के मलबे से होकर गुज़र रहे हैं.

ग़ाज़ा पट्टी: युद्ध ने फ़लस्तीन में आर्थिक विकास को 69 वर्ष पीछे धकेला

आर्थिक विकास

ग़ाज़ा पट्टी में पिछले एक वर्ष से जारी युद्ध, उससे हुई तबाही और पश्चिमी तट में टकराव बढ़ने से फ़लस्तीन में विकास पर गहरा असर हुआ है और इस वर्ष निर्धनता में 74 फ़ीसदी उछाल आने की आशंका है. संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को प्रकाशित अपनी एक नई रिपोर्ट में बताया कि इन हालात ने फ़लस्तीन को 69 वर्ष पीछे धकेल दिया है.

‘Gaza war: Expected socioeconomic impacts on the State of Palestine’, शीर्षक वाली इस रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और पश्चिमी एशिया के लिए यूएन आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (UNESCWA) ने तैयार किया है.

अध्ययन में सचेत किया गया है कि आर्थिक पाबन्दियों को हटाए बिना, पुनर्बहाली और विकास में निवेश के अभाव में, फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था को युद्ध से पहले के स्तर पर पहुँचाना सम्भव नहीं होगा. इसके लिए केवल मानवीय सहायता पर ही निर्भर नहीं रहा जा सकता है.

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रिपोर्ट में मौजूदा हिंसक टकराव के कारण 2025 में होने वाले तात्कालिक प्रभावों की समीक्षा की गई है और यह अनुमान भी जताया गया है कि 2034 तक, यानि युद्ध शुरू होने के एक दशक बाद किस तरह की परिस्थितियाँ होंगी.

विकास पर चोट

यूएन आयोग की कार्यकारी सचिव रोला दश्ती ने बताया कि उनका आकलन, तबाह हो रही लाखों ज़िन्दगियों की ओर ध्यान खींचने के लिए एक अलार्म का काम करेगा. दशकों के विकास प्रयासों को मिटाया जा रहा है.

“समय आ गया है कि हमारे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेने वाले रक्तपात और पीड़ा का अन्त किया जाए. हमें एक स्थाई समाधान की तलाश करनी होगी, जहाँ सभी लोग शान्ति, गरिमा में रह सकें और टिकाऊ विकास के लाभों को हासिल कर सकें, और जहाँ अन्तरराष्ट्रीय क़ानून व न्याय सर्वोपरि हों.”

अनुमान दर्शाते हैं कि, युद्ध ना होने के परिदृश्य की तुलना में, वर्ष 2024 में सकल घरेलू उत्पाद में 35.1 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है. बेरोज़गारी में 49.9 फ़ीसदी का उछाल आ सकता है.

फ़लस्तीन में व्याप्त अभाव व कष्टों की भी समीक्षा की गई है, जिसके लिए बहुआयामी निर्धनता संकेतकों का इस्तेमाल किया गया है. युद्धविराम लागू होने के बाद फ़लस्तीन में पुनर्बहाली की सम्भावनाओं का भी आकलन किया गया है.

रिपोर्ट बताती है कि 2024 के दौरान फ़लस्तीन में निर्धनता में, 74 प्रतिशत तक का उछाल आ सकता है, जिससे 41 लाख प्रभावित होंगे. इनमें 26 लाख लोग हाल ही में अभाव का शिकार हुए हैं.

आर्थिक पुनर्बहाली के तीन परिदृश्य

यूएन विशेषज्ञों का मानना है कि फ़लस्तीन में पुनर्बहाली के लिए तीन अलग-अलग परिदृश्य हो सकते हैं: कोई पुनर्बहाली नहीं, आंशिक पुनर्बहाली या बिना किसी पाबन्दी के पुनर्बहाली.

किसी भी प्रकार की पुनर्बहाली ना होने की स्थिति में, यूएन विशेषज्ञों का मानना है कि मानवीय सहायता धनराशि में कोई बदलाव नहीं आएगा और उसका मौजूदा स्तर बना रहेगा. मगर, फ़लस्तीनी श्रमिकों पर पाबन्दियाँ बरक़रार रहेंगी और फ़लस्तीनी प्राधिकरण के लिए राजस्व देने पर लगी रोक बनी रहेगी.

आंशिक पुनर्बहाली वाले परिदृश्य में, वार्षिक 28 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता धनराशि को मान कर चला गया है, हालांकि श्रमिकों व राजस्व को देने पर रोक बरक़रार रहेगी. इससे लोगों की आवश्यकताओं को पूरा किय जा सकेगा मगर दीर्घकालिक आर्थिक पुनर्बहाली नहीं होगी और निर्धनता व बेरोज़गारी में मामूली सुधार ही होगा.

बिना किसी पाबन्दी के पुनर्बहाली वाले परिदृश्य में फ़लस्तीनी श्रमिकों पर पाबन्दियों को हटा लिया जाएगा और फ़लस्तीनी प्राधिकरण के लिए राजस्व फिर शुरू कर दिया जाएगा.

मानवीय सहायता में 28 करोड़ डॉलर के अलावा, पुनर्बहाली प्रयासों के लिए 29 करोड़ डॉलर वार्षिक तौर पर आवंटित किए जाएंगे, जिससे हर वर्ष उत्पादकता में एक फ़ीसदी की वृद्धि होगी. अर्थव्यवस्था को उबरने में मदद मिलेगी और फ़लस्तीन में विकास फिर से पटरी पर आएगा.