अहिंसा दिवस: महात्मा गांधी के सिद्धान्त किसी भी हथियार से अधिक शक्तिशाली
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गटेरेश ने कहा है कि आज की दुनिया में हिंसा में उछाल को देखते हुए, महात्मा गांधी के अहिंसा सिद्धान्त और मूल्य अधिक प्रासंगिक नज़र आते हैं जिनमें समानता, सम्मान, शान्ति और न्याय के लिए महात्मा गांधी ने अपना जीवन समर्पित किया था. अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन ने एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया है.
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने हर साल 2 अक्टूबर को मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के मौक़े पर अपने सन्देश में कहा है कि दुनिया भर में टकराव तबाही मचा रहे हैं.
उन्होंने कहा, “महात्मा गांधी का विश्वास था कि अहिंसा, मानवता के पास उपलब्ध सबसे महान शक्ति है – किसी भी हथियार से कहीं अधिक ताक़तवर.”
“आइए, एक साथ मिलकर, हम उस उत्कृष्ट विचार को समर्थन देने के लिए संस्थानों का निर्माण करें.”
यूएन प्रमुख ने कहा, “यूक्रेन से लेकर सूडान, मध्य पूर्व और उससे भी परे, युद्ध ने विध्वंस, बेबसी, और भय का नरक जैसा माहौल बना दिया है.”
उन्होंने कहा कि असमानता और जलवायु संकट, शान्ति की बुनियादों को कमज़ोर कर रहे हैं. और ऑनलाइन मंचों पर फैलाई जाने वाली नफ़रत, अब सड़कों पर भी नज़र आ रही है.
यूएन प्रमुख ने कहा कि सितम्बर में हुए “भविष्य के सम्मेलन” ने आशा का संचार किया है. देशों ने बहुपक्षवाद में एक नई जान फूँकने की ख़ातिर बुनियादी काम शुरू करने के लिए एकजुटता दिखाई, एक ऐसा बहुपक्षवाद जो बदलती दुनिया में शान्ति को समर्थन देने के लिए समर्थ हो.
इनमें टकराव के बुनियादी कारणों पर नया ध्यान दिया जाना भी शामिल है, जिनमें असमानता से लेकर निर्धनता और विभाजन शामिल हैं.
एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि अब देशों को उन संकल्पों को वास्तविकता में तबदील करने की ज़रूरत है.
गांधी के शान्ति सन्देश की प्रासंगिक गूंज
संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष फ़िलेमॉन यैंग का सन्देश उनके स्टाफ़ प्रमुख डॉक्टर आइवॉर फ़ंग ने पढ़कर सुनाया.
उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर ना केवल महात्मा गांधी के जन्म दिन का जश्न मनाया जाता है बल्कि सत्य, अहिंसा, समानता और न्याय जैसे साझा मूल्यों पर भी मन्थन किया जाता है, जिन्होंने यूएन चार्टर में निहित मूल्यों को आगे बढ़ाया.
“जब 1945 में यूएन चार्टर पारित किया गया था तो उस समय दुनिया युद्ध के विनाश से उबरने की कोशिश कर रही थी. उसके संस्थापकों ने भविष्य में टकरावों को रोकने और मानवाधिकार कों बढ़ावा देने के इरादे से क ऐसा ढाँचा तैयार करने की इच्छा की थी.
उन्होंने कहा कि वैसे तो महात्मा गांधी इस संगठन में शामिल नहीं थे, मगर भारत की स्वतंत्रता के लिए उनके नेतृत्व ने यह पहले ही दिखा दिया था कि सविनय अवज्ञा और अहिंसक कार्रवाई, दमन की बहुत शक्तिशाली व्यवस्थाओं को भी चुनौती दे सकती है.
आइवॉर फ़ंग ने कहा कि महात्मा गांधी की सीखें, आज भी प्रासंगिक हैं. “टकरावों से त्रस्त एक दुनिया में मैं, शान्ति व संवाद को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध हूँ – जिनकी आज की हमारी विभाजित दुनिया की खाई पाटने के लिए ज़रूरत है.”
उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ़्रीका में नेलसन मंडेला और मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे नेता, महात्मा गांधी की सत्याग्रह जैसी अवधारणाओं से प्रभावित थे, जो सिखाते हैं कि सत्य और न्याय की प्राप्ति हिंसा के ज़रिए नहीं, बल्कि नैतिक साहस और शान्तिपूर्ण संवाद के ज़रिए होती है.
“आज जब दुनिया ग़ाज़ा, लेबनान, म्याँमार, सूडान, यूक्रेन और अन्य स्थानों पर हिंसक और पीड़ाजनक दौर देख रही है तो, महात्मा गांधी का शान्ति का सन्देश, बहुत प्रबल रूप में गूंजता है.”
गांधी के बिना शान्ति पर चर्चा अधूरी
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत पी हरीश ने कार्यक्रम में कहा कि मोहनदास करमचन्द गांधी के आदर्शों, विचारों और गतिविधियों का ज़िक्र किए बिना, शान्ति और सहिष्णुता की चर्चा करना लगभग असम्भव है.
भारतीय राजदूत ने कहा कि भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एक ऐसे अदभुत व्यक्ति थे जिनका जीवन, उनके ही शब्दों में, एक खुली किताब था.
दुनिया के एक अन्य अदभुत व्यक्ति ऐलबर्ट आइन्सटाइन भी महात्मा गांधी और उनके सिद्धान्तों के एक महान प्रशंसक थे और गांधी जी के बारे में उनका कहना था, “आने वाली पीढ़ियाँ मुश्किल से ही ये विश्वास कर पाएंगी कि हाड-माँस का कोई ऐसा पुतला कभी इस पृथ्वी पर जीवित था.”
सच्चाई से निकलती शक्ति
भारतीय राजदूत पी हरीश ने कहा कि भारत की कहानी महात्मा गांधी के इस विश्वास में झलकती है कि शक्ति सच्चाई में से निकलती है, नाकि शक्ति में से; शक्ति सत्य में से निकलती है नाकि बल में से और विजय नैतिक साहस में निकलती है नाकि थोपे गए समर्पण से.
“संयुक्त राष्ट्र द्वारा, महात्मा गांधी के जन्म दिवस 2 अक्टूबर को अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया जाना एक बहुत सटीक निर्णय था.”
उन्होंने कहा कि इस दिवस का जश्न मनाने में गांधी जी के जीवन पर मन्थन करने और शान्ति, सहिष्णुता, और दुनिया भर में समझदारी की संस्कृति को सुनिश्चित करने में अहिंसा के सिद्धान्त की सार्वभौमिक प्रासंगिकता की फिर से पुष्ट करने में मदद मिलती है.