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UNGA79: युद्धों के माहौल में 'एक नए शीत युद्ध का आभास', पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज शरीफ UN महासभा के 79वें सत्र में आम बहस को संबोधित करते हैं।
UN Photo/Loey Felipe पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मोहम्मद शहबाज़ शरीफ़ ने, यूएन महासभा के 79वें सत्र की जनरल डिबेट में, ग़ाज़ा और कश्मीर मुद्दों का ज़िक्र किया. (27 सितम्बर 2024).

UNGA79: युद्धों के माहौल में 'एक नए शीत युद्ध का आभास', पाकिस्तान

यूएन मामले

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मोहम्मद शहबाज़ शरीफ़ ने शुक्रवार को, यूएन महासभा की जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए कहा है कि दुनिया टकरावों-युद्धों से लेकर जलवायु परिवर्तन जैसी घातक चुनौतियों में फँसी हुई है, ऐसे में “हमें एक नए शीत युद्ध का आभास हो रहा है”.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ग़ाज़ा के लोगों की तकलीफ़ों पर “गहन तकलीफ़ और चिन्ता” प्रकट करते हुए कहा, “पवित्र ज़मीन पर इस तरह की त्रासदी घटते देखने पर हमारे दिल रो रहे हैं, एक ऐसी त्रासदी जिसने पूरी इनसानियत की रूह को ही झकझोकर रख दिया है.”

प्रधानमंत्री मोहम्मद शहबाज़ शरीफ़ ने ग़ाज़ा के मुद्दे पर कहा, “इनसान होने के नाते, क्या हम ख़ामोश रह सकते हैं, जब बच्चों को, उनके ही ध्वस्त हो चुके घरों के मलबे में दफ़नाया जा रहा हो? क्या हम उन माताओं की तरफ़ से अपनी आँखें मून्द सकते हैं, जो अपने बच्चों के जीवन रहित हो चुके शरीरों का बोझ ढो रही हैं?”

उन्होंने कहा, “यह केवल युद्ध भर नहीं है; यह फ़लस्तीन के लोगों का सोचा-समझा क़त्लेआम है.”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस युद्ध की निन्दा करना भर पर्याप्त नहीं, बल्कि 1967 की सीमाओं पर आधारित, दो राष्ट्रों की स्थापना के रूप में तत्काल समाधान निकाले जाने और फ़लस्तीन को संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण सदस्य का दर्जा दिए जाने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा कि मौजूदा युद्ध का इस तरह का समाधान नहीं निकाला गया तो यह युद्ध पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में फैल जाने का जोखिम है, जिसके परिणाम इतने घातक होंगे जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है.

कश्मीर का मुद्दा

मोहम्मद शहबाज़ शरीफ़ ने, पाकिस्तान और भारत के बीच दशकों से विवादास्पद मुद्दे कश्मीर का भी ज़िक्र किया.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत ने 5 अगस्त 2019 से, “ऐसे अनेक इकतरफ़ा ग़ैरक़ानूनी क़दम उठाए हैं जिन्हें, देश के नेता, जम्मू कश्मीर के लिए अन्तिम समाधान” क़रार देते हैं. 

वहाँ 9 लाख भारतीय सैन्य बल, लोगों को लम्बी अवधि तक चलने वाले करफ़्यू, न्यायेतर हत्याओं और हज़ारों युवा कश्मीरियों का अपहरण करके, लगातार डराते रहते हैं.

उन्होंने कहा कि भारत ने, अपनी व्यापक सैन्य क्षमताओं की तैनाती पाकिस्तान के ख़िलाफ़ की है और “पाकिस्तान किसी भी भारतीय आक्रमण का, सर्वाधिक निर्णायक रूप में जवाब देगा.”

उन्होंने कहा, “कश्मीर के लोग, उस झूठी भारतीय पहचान को रद्दे करने के लिए संकल्पबद्ध हैं, जो भारत की केन्द्रीय सरकार उनके ऊपर थोपने की कोशिश कर रही है. वहाँ बहुत ही गम्भीर परिस्थितियों और अत्याचारों को अंजाम दिया जा रहा है.”

क़र्ज़ का कुचक्र

प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने अपने सम्बोधन में, विकासशील दुनिया का भी ज़िक्र किया जिसमें लगभग 100 विकासशील देश, क़र्ज़ और धन की क़िल्लत के कुचक्र में फँसे हुए हैं.

उन्होंने इसे “एक ऋण जाल” के बजाय, “मौत का एक जाल” पुकारते हुए कहा कि “इन परिस्थितियों में टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति, दूर की कौड़ी नज़र आती है.”

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय ढाँचे और विश्व व्यापार व प्रौद्योगिकी व्यवस्था में, “सुधार किए जाने के साथ-साथ, उसे विकास और वैश्विक समता को बढ़ावा देने में सहायक बनाए जाने की ज़रूरत है.”

भारत ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सम्बोधन पर, शुक्रवार को अपने 'प्रथम उत्तर अधिकार' (First Right to Reply) का प्रयोग किया है. इसकी वीडियो नीचे देखी जा सकती है.