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जटिल विकास चुनौतियों से निपटने में, ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ का सहारा

FAO चीन दक्षिण-दक्षिण सहयोग से संचालित एक कार्यक्रम में काबो वर्डे में किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
© FAO /  Giuseppe Carotenuto
FAO चीन दक्षिण-दक्षिण सहयोग से संचालित एक कार्यक्रम में काबो वर्डे में किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

जटिल विकास चुनौतियों से निपटने में, ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ का सहारा

आर्थिक विकास

विकासशील देशों के बीच रचनात्मक सहयोग को अक्सर दक्षिण-दक्षिण सहयोग के नाम से पुकारा जाता है. संयुक्त राष्ट्र के दक्षिण-दक्षिण सहयोग कार्यालय की एक शीर्ष अधिकारी दीमा अल ख़तीब का कहना है कि विकास क्षेत्र में बेहद जटिल परिस्थितियों वाले माहौल में भी इस सहयोग के ज़रिए बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है.

हर वर्ष 12 सितम्बर को 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए अन्तरराष्ट्रीय दिवस' मनाया जाता है. 

इस अवसर पर, दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए यूएन कार्यालय की निदेशक दीमा अल-ख़तीब ने यूएन न्यूज़ के साथ एक विशेष बातचीत में विकासशील देशों के बीच एकजुटता व सहयोग के ज़रिए रूपान्तरकारी बदलाव हासिल करने की शक्ति पर चर्चा की.

यूएन न्यूज़: दक्षिण-दक्षिण सहयोग इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

दीमा अल-ख़तीब: इन दिनों, दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित, विभिन्न प्रकार की जटिल विकास सम्बन्धी चुनौतियों से जूझ रहे हैं. हाल के कुछ वर्षों में वैश्विक महामारी और उससे उपजी स्थिति के कारण इन मुश्किलों ने और गम्भीर रूप धारण किया है.

वहीं, मौजूदा दौर में विश्व ऐसे अनेक संकटों से जूझ रहा है, जिनका सामना भी इन देशों को करना पड़ रहा है. फिर चाहे वे भूराजनैतिक हों या खाद्य सुरक्षा सम्बन्धी, शिक्षा-सम्बन्धी या आर्थिक संकट. विकास के लिए यह एक बेहद जटिल सन्दर्भ है.

यह एक ऐसी पृष्ठभूमि है, जहाँ विकास मुद्दों पर देशों के बीच रचनात्मक सहयोग की आवश्यकता होती है.

उदाहरणस्वरूप, जब हम जलवायु के बारे में बात करते हैं, तो हम किसी एक देश के बारे में नहीं बात करते हैं. जलवायु, जल प्रबन्धन, प्राकृतिक आपदाएँ भौगोलिक सीमाओं में नहीं बंधी हैं.

शान्ति व विकास का असर भी सरहदों से पार पहुँचता है.

इसलिए, यदि देश इन विभिन्न जटिलताओं से निपटने के लिए, चुनौतियों के अनरूप बदलाव लाने के लिए एक दूसरे से सहयोग नहीं करते हैं, तो यह अवसर खो देने वाली बात है.

यूएन न्यूज़: कुछ ऐसे उदाहरण बताइए, जिनमें वैश्विक दक्षिणी गोलार्द्ध (ग्लोबल साउथ) में स्थित देश एक दूसरे को समर्थन देने के लिए मिलकर काम कर रहे हों?

दीमा अल-ख़तीब:: मैं लेबनान से हूँ और मैं एक क्षेत्रीय पहल का उदाहरण देना चाहूँगी, जिसकी अगुवाई संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम कर रहा है, और जोकि भ्रष्टाचार से लड़ाई पर लक्षित है.

इस पहल के ज़रिए, देशों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई के लिए रणनीति तैयार करने में तकनीकी सहायता प्रदान की गई हैं.

इसके ज़रिए, इस क्षेत्र में स्थित सभी देशों के नीतिनिर्धारकों का एक ऐसा नैटवर्क तैयार कर पाना सम्भव हुआ है, जो नियमित रूप से मिलते हैं, नीतिगत परिप्रेक्ष्य से विशिष्ट मामलों व क़ानूनी आयामों पर एक दूसरे से सीखते हैं. यह नैटवर्क बेहद सफल साबित हुआ है.

वर्ष 2022 में हुई, वैश्विक दक्षिण-दक्षिण विकास प्रदर्शनी के प्रतिभागी.
ESCAP Photo/Louise Lavaud
वर्ष 2022 में हुई, वैश्विक दक्षिण-दक्षिण विकास प्रदर्शनी के प्रतिभागी.

यूएन न्यूज़: देशों के बीच पारस्परिक सहयोग के उदाहरण मिल पाना कितनी आम बात है?

दीमा अल-ख़तीब:: भारत-संयुक्त राष्ट्र साझीदारी कोष से वित्तीय सहायता प्राप्त एक अहम परियोजना में ऊर्जा स्रोतों में बदलाव पर ध्यान केन्द्रित किया गया है.

इस परियोजना में 10 देश शामिल हैं, जिन्हें सौर गठबंधन से मदद दी जाती है. इसके ज़रिए, देश ना केवल एक दूसरे से सीख रहे हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि जो कुछ भी इन कार्यक्रमों से हासिल हो, वो राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं और सम्बन्धित देशों में योजनाओं से जुड़ा हो.

इसलिए, इसका एक राष्ट्रीय आयाम है और क्षेत्रीय भी है.

यूएन न्यूज़: क्या यह सहयोग विभिन्न महाद्वीपों में स्थित देशों के बीच भी काम करता है?

दीमा अल-ख़तीब: मुझे यह उदाहरण बहुत पसन्द है, चूँकि मैंने जब चीन की यात्रा की तो इसे प्रत्यक्ष रूप से देखा. चीन के साथ शहरी परिवहन के डिजिटल प्रबन्धन पर केन्द्रित एक पहल में हमारी साझेदारी है.

यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है, चीन के हांग शू और चिली के सेन टियागो के बीच रचनात्मक सहयोग का, जिससे यह सीखा जा सकता है कि बड़े शहरों में परिवहन का प्रबन्धन किस तरह से किया जाए.

इससे यातायात जाम से उबरने, आम नागरिकों को सुविधा देने और डिजिटल टैक्नॉलॉजी के सहारे प्रदूषण में कमी लाने में मदद मिलती है.

ऐसे अन्य कई उदाहरण हैं, जिनसे इसके बढ़ते हुए असर को समझा जा सकता है.

कम्बोडिया में एक डॉक्टर बच्चे के स्वास्थ्य की जाँच कर रहा है.
UNOSSC
कम्बोडिया में एक डॉक्टर बच्चे के स्वास्थ्य की जाँच कर रहा है.

यूएन न्यूज़: दक्षिण-दक्षिण सहयोग में युवजन किस प्रकार से भूमिका निभाते हैं?

दीमा अल-ख़तीब: यदि आप ग्लोबल साउथ के देशों में जनसंख्या की बनावट को देखें, तो अधिकाँश आबादी युवा है.

वे बदलाव के वाहक हैं, और हमारे लिए बेहद अहम हैं. हम संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन के साथ मिलकर ग्लोबल साउथ के देशों के विश्वविद्यालयों को आपस में जोड़ने पर काम कर रहे हैं.

यह बेहद अहम है, चूँकि इससे ना केवल हरित शिक्षा के स्थान को बल मिलता है, बल्कि विश्वविद्यालयों में युवाओं के बीच आपसी जुड़ाव का एक नैटवर्क भी तैयार होता है.

यह एक ऐसी पहल है, जिसे कई अन्य विश्वविद्यालयों में भी लागू किया जा सकता है.

यूएन न्यूज़: दक्षिण-दक्षिण सहयोग और आगामी ‘भविष्य की शिखर बैठक’ के बीच क्या सम्बन्ध है?

दीमा अल-ख़तीब: भविष्य की शिखर बैठक एक अहम क्षण है, चूँकि टिकाऊ विकास लक्ष्यों को साकार करने के लिए तय समयसीमा में पाँच वर्ष का समय ही बचा है. और हम बहुत पीछे चल रहे हैं, केवल 17 प्रतिशत लक्ष्य ही सही रफ़्तार से पूरे हो रहे हैं.

इसलिए, यह एक अवसर है, दक्षिण-दक्षिण सहयोग के इस एजेंडा के प्रति अपने संकल्प में फिर से नई ऊर्जा भरने के लिए. साथ ही, ऐसे ही समाधान के ज़रिए बढ़ते क़र्ज़, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य समस्याओं समेत अन्य जटिल विकास सम्बन्धी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिबद्धता दर्शाने का.

मेरा विश्वास है कि ग्लोबल साउथ में कई देशों ने अनेक समाधान प्रस्तुत किए हैं और वे अन्य देशों के समर्थन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सके.