ग़ाज़ा: पोलियो की रोकथाम पर लक्षित, टीकाकरण अभियान की तेज़ रफ़्तार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि केन्द्रीय ग़ाज़ा में सामूहिक टीकाकरण अभियान के तहत पहले दो दिनों में 10 वर्ष से कम आयु के एक लाख 61 हज़ार से अधिक बच्चों को पोलियो वैक्सीन की ख़ुराक दी जा चुकी है. ग़ाज़ा में कुल छह लाख 40 हज़ार बच्चों को टीकाकरण के दायरे में लाने की योजना है और फ़िलहाल क़रीब एक-चौथाई को टीके लगाए जा चुके हैं.
युद्धग्रस्त ग़ाज़ा पट्टी में यूएन के नेतृत्व में टीकाकरण अभियान के तहत पहले दो दिनों में कुल एक लाख 56 हज़ार बच्चों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे पार करने में सफलता मिली है.
क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रतिनिधि डॉक्टर रिक पीपरकोर्न ने बताया कि केन्द्रीय इलाक़े में टीकाकरण अभियान को सम्पन्न करने के लिए एक दिन का समय और लगेगा.
उन्होंने ग़ाज़ा से जानकारी देते हुए कहा कि इसराइली सैन्य बलों और हमास लड़ाकों के बीच लड़ाई में हर दिन आठ घंटे का ठहराव दिया जा रहा है, जिस दौरान तीसरे दिन टीकाकरण अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है.
यूएन एजेंसी के अधिकारी के अनुसार, इसके बाद टीकाकरण अभियान को तीन दिन के लिए दक्षिणी इलाक़े में संचालित किए जाएगा, और फिर उत्तरी ग़ाज़ा की ओर बढ़ा जाएगा.
इसके चार सप्ताह बाद, पोलियो वैक्सीन की दूसरी ख़ुराक दिए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
डॉक्टर पीपरकोर्न ने बताया कि ग़ाज़ा पट्टी के उत्तरी हिस्से में पहुँचना, चिन्ता का विषय है. पिछले दो सप्ताह के दौरान, स्थानीय अस्पतालों में ज़रूरी मेडिकल सामग्री पहुँचाने के प्रयास किए गए हैं, मगर आठ या नौ मिशन की योजना के बावजूद केवल तीन या चार ही वहाँ के लिए रवाना हो पाए. इस प्रक्रिया में अनुमति के लिए कई घंटे तक का समय लग रहा है और चेक प्वाइंट पर भी लम्बी जाँच की जाती है.
टीकाकरण दर में गिरावट
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, ग़ाज़ा पट्टी या किसी भी स्थान पर पोलियो टीकाकरण अभियान को कारगर बनाने के लिए कम से कम 90 फ़ीसदी बच्चों को ख़ुराक दिए जाने की आवश्यकता होती है.
अक्टूबर 2023 में इसराइल और हमास के बीच युद्ध शुरू होने से पहले तक, स्थानीय आबादी में टीकाकरण का ऊँचा स्तर था. मगर, लड़ाई की वजह से नियमित प्रतिरक्षण कवरेज पर असर हुआ है और यह 2022 में 99 फ़ीसदी से घटकर 2024 की पहली तिमाही में 90 प्रतिशत पर पहुँच गया.
इन हालात में, बच्चों में पोलियो समेत उन बीमारियों के फैलाव का जोखिम है, जिनकी वैक्सीन के ज़रिये आसानी से रोकथाम की जा सकती है.
डॉक्टर पीपरकोर्न से जब बाल कुपोषण समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की समीक्षा पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि फ़िलहाल टीकाकरण टीम के पास यह कर पाना सम्भव नहीं है.
ग़ाज़ा में पोलियो टीकाकरण अभियान एक ऐसे समय में शुरू किया गया है, जब यहाँ स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ा बुनियादी ढाँचा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है.
25 वर्षों में पहली बार ग़ाज़ा में पोलियो का मामला दर्ज किया गया है और एक शरणार्थी शिविर में 10 महीने के एक बच्चे के पोलियो से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. इस वायरस से बच्चों को लकवा मार सकता है और छोटे बच्चों की मृत्यु भी हो सकती है.
निरन्तर ख़तरा
यूएन मानवतावादियों ने विशाल स्तर पर पोलियो टीकाकरण अभियान के लिए विशिष्ट इलाक़ों में लड़ाई में मानवीय आधार पर ठहराव का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा पट्टी में सभी शेष बंधंकों की तत्काल रिहाई और युद्धविराम लागू किए जाने की आवश्यकता है.
यूएन बाल कोष (UNICEF) के प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने बताया कि एक बार टीकाकरण के दायरे में आने के बाद ये बच्चे उन इलाक़ों में वापिस जाएंगे, जहाँ कुछ हफ़्तों में ही फिर से बमबारी होने की आशंका है.
उन्होंने कहा कि इसमें ऐसी कोई भी बात नहीं है, जिसे सामान्य मान करके स्वीकार कर लिया जाए. उनके अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि युद्धविराम के लिए बातचीत केवल यह दर्शाने के लिए हो रही है कि कुछ आशा बंध सके.
जेम्स ऐल्डर ने कहा कि कुछ ठोस किया जाना होगा, और इसका दायित्व उन्हीं नेतागण पर है, जो अपने लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.