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ग़ाज़ा: युद्ध से तबाह फ़लस्तीनी क्षेत्र में, पोलियो का प्रथम मामला पुष्ट

गाजा में एक शरणार्थी शिविर में अस्थायी तंबुओं के सामने तीन फिलिस्तीनी बच्चे खड़े हैं।
© UNRWA ग़ाज़ा में पोलियो ने, पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में संक्रमण का जोखिम उत्पन्न कर दिया है और बच्चे इसकी चपेट में अधिक आते हैं.

ग़ाज़ा: युद्ध से तबाह फ़लस्तीनी क्षेत्र में, पोलियो का प्रथम मामला पुष्ट

स्वास्थ्य

लगभग साढ़े दस महीने से भीषण युद्ध की चपेट में फँसे ग़ाज़ा में, पोलियो की घातक बीमारी के प्रथम मामले की पुष्टि हुई है जिसमें 10 महीने की एक बालिका को पोलियो से अपंग पाया गया है.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने इस घटनाक्रम पर अत्यन्त गम्भीर दुख व्यक्त किया है.

उन्होंने कहा है कि दियर अल बलाह की इस बच्ची को बाईं टांग के निचले हिस्से में पक्षाघात हुआ है, मगर उसकी हालत अभी स्थिर बताई गई है.

डॉक्टर टैड्रॉस ने एक ऑनलाइन पोस्ट में रिखा है कि यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने स्वास्थ्य परीक्षण के ज़रिए पुष्टि की है कि इस बालिका को पोलियो संक्रमण, पोलियोवायरस के टाइप-2 से हुआ है, जिसकी मौजूदगी ग़ाज़ा के गन्दगी नालों से जून महीने में लिए गए पर्यावरणीय नमूनों में पाई गई थी.

पोलियो फैलाव का भारी जोखिम

डॉक्टर टैड्रॉस ने कहा कि ग़ाज़ा और वृहद क्षेत्र में पोलियो के फैलाव के भारी जोखिम को देखते हुए, फ़लस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारी गण, WHO और यूनीसेफ़ के साथ मिलकर, इसके फैलाव की रोकथाम की ख़ातिर, अगले दो सप्ताहों के दौरान पोलियो वैक्सीन की दो ख़ुराकें पिलाने के अभियान पर काम कर रहे हैं.

फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन सहायता एजेंसी – UNRWA ने बताया है कि उसकी चिकित्सा टीमें, पोलियो वैक्सीन की ख़ुराकों की आपूर्ति में सहायता करेंगी, और इस अभियान में WHO व यूनीसेफ़ की मदद ली जाएगी.

UNRWA, ग़ाज़ा पट्टी में सबसे बड़ी सहायता एजेंसी और स्वास्थ्य सैक्टर में भी उसकी सर्वाधिक अहम भूमिका है. यह एजेंसी 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और लगभग 100 सचल चिकित्सा केन्द्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया करा रही है.

इस बीच इसराइल के क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी मुहन्नाद हादी ने आगाह किया है कि ग़ाज़ा में लोगों को इसराइल द्वारा बार-बार बेदख़ली आदेशों के कारण बड़े पैमाने पर लोगों के विस्थापन ने उनके अस्तित्व का गला घोंट दिया है और उन आदेशों से मानवीय सहायता अभियानों में बहुत बड़ी बाधाएँ उत्पन्न हो रही हैं.

क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र में यूएन मानवीय सहायता समन्वयक मुहन्नाद हादी ने बताया है कि केवल अगस्त महीने में ही, इसराइली सेनाओं ने 12 बेदख़ली आदेश जारी किए हैं, जिनके कारण लगभग ढाई लाख लोगों को बार-बार विस्थापित होना पड़ा है.

बार-बार ख़तरे में दाख़िल

मुहन्नाद हादी ने कहा कि अगर बेदख़ली आदेश आम लोगों की हिफ़ाज़त के लिए जारी किए जा रहे हैं, तो वास्तविकता ये है कि उन आदेशों का असर बिल्कुल उल्टा हो रहा है.

उन्होंने कहा कि बेदख़ली आदेश, परिवारों को बार-बार यहाँ से वहाँ भागने के लिए विवश कर रहे हैं और उन्हें अक्सर अपने साथ बहुत थोड़ा सा सामान लेकर ही, गोलीबारी के बीच ही निकलना पड़ता है. वो लोग जहाँ पहुँचते हैं, वहाँ पहले ही स्थान बहुत सीमित है जो अत्यधिक भीड़, प्रदूषण और सेवाओं की बहुत सीमित उपलब्धता से दो-चार है, जैसाकि ग़ाज़ा का बाक़ी इलाक़ा है – असुरक्षित.”

मुहन्नाद हादी ने कहा कि चूँकि लोगों को बार-बार बेदख़ल होना पड़ रहा है, लोगों को बुनियादी सेवाएँ उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, जोकि उनके जीवित रहने के लिए ज़रूरी है.

इनमें चिकित्सा सेवाएँ, आश्रय, पानी के कुँए और मानवीय सहायता सामग्री शामिल हैं.