ग़ाज़ा: इसराइल के नवीन बेदख़ली आदेशों ने लोगों को धकेला युद्ध मोर्चा के निकट
ग़ाज़ा में फ़लस्तीनी लोगों को इसराइली सेना के लगातार जारी हो रहे बेदख़ली आदेशों ने, पहले से ही भीषण हालात में रह रहे लोगों को दीगर विस्थापन के लिए विवश कर दिया है, जिससे ये चिन्ताएँ भी उभर रही हैं कि अत्यावश्यक सेवाएँ बहुत जल्द ही ख़त्म हो जाएंगी.
यूएन मानवीय सहायता एजेंसियों ने बुधवार को यह चेतावनी जारी की है.
दस महीने से भी अधिक समय से जारी ग़ाज़ा में युद्ध में लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से बहुत से लोगों को तो, इसराइल के बेदख़ली आदेशों के कारण बार-बार विस्थापित होना पड़ा है.
फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन सहायता एजेंसी – UNRWA की प्रवक्ता लुइस वॉटरिज ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है, “ग़ाज़ा में कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं है... ऐसा लगता है कि लोग मौत का इन्तेज़ार कर रहे हैं...”
लुइस वॉटरिज ने यूएन न्यूज़ को बताया कि जो इलाक़े मानवीय क्षेत्र में थे, वो अब युद्ध या तबाही का अग्रिम मोर्चा बन गए हैं.
उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि ग़ाज़ा के लोग वैसे, युद्ध के मैदान से बस कुछ ही दूरी पर रहे हैं.
ग़ाज़ा के उत्तरी इलाक़े – बियत लहिया में एक विस्थापित बच्चे कमाल अल सुल्तान ने यूएन न्यूज़ से रकहा कि वो ग़ाज़ा युद्ध शुरू होने से, अभी तक सात बार विस्थापित हो चुका है.
कमाल अल सुल्तान ने कहा, “हम बियत लहिया से दियर अल बलाह को विस्थापित हुए और अब हमे यहाँ से भी चले जाने के लिए कहा जा रहा है. हमें नहीं मालूम कि हम कहाँ जाएँ.”
‘मानो हमारी आत्मा हमारे शरीर से बिछड़ रही हो’
UNRWA के अनुसार, इसराइली सेना के नए बेदख़ली आदेशों से, ग़ाज़ा पट्टी की लगभग 84 प्रतिशत आबादी प्रभावित है. इस बीच ग़ाज़ा के बहुत से लोगों को एक बार फिर विस्थापित होने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
ग़ाज़ा सिटी के पूर्वी इलाक़े में स्थित एक बस्ती शुजाइया से विस्थापित एक व्यक्ति याहया हलास का कहना है, “दियर अल बलाह से हमारा ये विस्थापन, 14वाँ विस्थापन है."
"हम शुजाइयाह से अल-ज़हरा क़स्बे को विस्थापित हुए थे, उसके बाद रफ़ाह पहुँचे, वहाँ से ख़ान यूनिस पहुँचे और दो बार विस्थापित हुए और तीन बार दियर अल बलाह में विस्थापित हुए. ये कब तक जारी रहेगा.”
उन्होंने कहा कि विस्थापित होना, “केवल सामान से भरा बैग लेकर चलना भर नहीं है.”
याहया हलास का कहना है, “विस्थापित होना ऐसा मानो हमारी आत्मा शरीर से बिछड़ रही हो. हमारे साथ बच्चे व महिलाएँ हैं. हमारे पास कुछ सामान और खाद्य सामग्री है. जब सभी को पश्चिम की तरफ़ जाना पड़ेगा तो हमारा क्या होगा."
"अगर आप दियर अल बलाह के पश्चिम की तरफ़ जाएँ तो, आप आगे क़दम नहीं बढ़ा सकते क्योंकि वहाँ पहले से भारी संख्या में लोग पहुँचे हुए हैं.”
अहम सड़क मार्ग ठप
संयुक्त राष्ट्र की आपदा राहत समन्वय एजेंसी – OCHA ने ग़ाज़ा संकट के बारे में ताज़ा जानकारी मुहैया कराते हुए बताया है कि निरन्तर युद्ध जारी रहने और इसराइली सेना के बार-बार जारी किए जाने वाले बेदख़ली आदेशों के कारण, ग़ाज़ा में सहायता अभियानों में बाधा खड़ी हो रही है, जोकि पहले से ही ईंधन की क़िल्लत और अन्य चुनौतियों के कारण अनेक तरह की बाधाओं का सामना कर रहे हैं.
OCHA ने बताया है कि ग़ाज़ा के दक्षिण से उत्तरी इलाक़े के लिए मानवीय सहायता अभियानों के लिए अति महत्वपूर्ण सलाह अद्दीन सड़क के कुछ हिस्से, इसराइली सेना द्वारा शनिवार को दियर अल बलाह के लिए जारी बेदख़ली आदेशों की चपेट में आए हैं.
एजेंसी के अनुसार इन आदेशों के कारण, सहायता कर्मियों के लिए मदद आपूर्ति के लिए इस सड़क का प्रयोग करना लगभग असम्भव हो गया है.
इसराइली सेनाओं ने बुधवार को भी नए बेदख़ली आदेश जारी किए हैं जिनसे ग़ाज़ा के मध्य इलाक़े में स्थित दियर अल बलाह नगर के अनेक इलाक़े प्रभावित हुए हैं.
OCHA का कहना है कि ग़ाज़ा की तटीय सड़क अब प्रयोग करने योग्य नहीं बची है. इस सड़क के साथ सटे तटीय इलाक़े अस्थाई आश्रय स्थलों के कारण खचाखच भरे हुए हैं, जहाँ अपने घरों से उजड़े फ़लस्तीनियों को जबरन पहुँचना पड़ा है.
ख़ान यूनिस में टैंक
UNRWA ने बताया है कि ख़ान यूनिस में इसराइली टैंक वापिस आ गए हैं. ऐसे में एजेंसी ने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा है कि ग़ाज़ा के इस दक्षिणी शहर में इसराइली सेना के नए बेदख़ली आदेशों के कारण महत्वपूर्ण सुविधाएँ जल्द ही ध्वस्त या तबाह हो सकती हैं.
इनमें वो जल पम्पिंग स्टेशन भी जोखिम में है जिसे मरम्मत के बाद हाल ही बहाल किया गया था और ये स्टेशन लगभग एक लाख लोगों की जल ज़रूरतें पूरी करता है.