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ग़ाज़ा में तेज़ हो रहे हमलों में, स्कूली इमारतें हुईं ध्वस्त – UNRWA प्रमुख

ख़ान यूनिस में एक ध्वस्त स्कूली इमारत में एक परिवार ने शरण ली हुई है.
© UNRWA
ख़ान यूनिस में एक ध्वस्त स्कूली इमारत में एक परिवार ने शरण ली हुई है.

ग़ाज़ा में तेज़ हो रहे हमलों में, स्कूली इमारतें हुईं ध्वस्त – UNRWA प्रमुख

शान्ति और सुरक्षा

ग़ाज़ा के उत्तरी, मध्य और दक्षिणी इलाक़ों में इसराइल की भीषण गोलाबारी की ख़बरों के बीच, फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) ने आश्रय स्थलों में तब्दील किए गए स्कूलों पर बम हमलों की पुष्टि की है. बताया गया है कि ऐसे हमलों में तेज़ी आई है और पिछले चार दिनों में चार स्कूल बमबारी की ज़द में आए हैं.

यूएन एजेंसी के महाआयुक्त फ़िलिपे लज़ारिनी ने कहा कि ग़ाज़ा युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक, UNRWA द्वारा संचालित दो-तिहाई स्कूलों पर बमबारी हो चुकी है. इनमें से कुछ ध्वस्त हो चुके हैं, जबकि अन्य स्कूल गम्भीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं.

वहीं, इसराइली सेना ने मंगलवार को अपने एक वक्तव्य में कहा था कि ग़ाज़ा सिटी में आतंकवादियों के बुनियादी ढाँचे और आतंकी संचालकों को निशाना बनाया जा रहा है.

स्थानीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को एक स्कूली इमारत के पास इसराइली कार्रवाई में कम से कम 25 लोग मारे गए. इस इमारत में पूर्वी ख़ान यूनिस, दक्षिणी ग़ाज़ा से विस्थापित हुए ग़ाज़ावासियों ने शरण ली हुई थी.

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इससे पहले, शनिवार को एक अन्य हमले में मध्य ग़ाज़ा के नुसीरात के एक UNRWA स्कूल में कम से कम 16 लोग मारे गए थे. इसके बाद, ग़ाज़ा सिटी में एक स्कूल पर हमला हुआ जहाँ सैकड़ों लोगों ने शरण ली हुई थी.

UNRWA की संचार निदेशक जूलियट टूमा ने यूएन न्यूज़ को बताया कि सोमवार को नुसीरात में स्कूल पर या उसके पास इसराइली कार्रवाई की ख़बरें थी.

कोई स्थान सुरक्षित नहीं

उन्होंने बताया कि यह एक आम बात होती जा रही है. केवल पिछले चार दिनों में हमने देखा है कि चार स्कूलों पर हमले हुए हैं. “जब भी किसी एक स्कूल पर हमला होता है, इसकी क़ीमत बड़ी संख्या में लोग चुकाते हैं.”

7 अक्टूबर को दक्षिणी इसराइल पर हमास के नेतृत्व में हुए आतंकी हमलों में 1,250 लोगों की जान गई थी और क़रीब 250 लोगों को बन्धक बना लिया गया था.

इसके बाद, इसराइली सैन्य बलों ने ग़ाज़ा में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है. तभी से UNRWA द्वारा संचालित स्कूलों को बन्द कर दिया गया था और अनेक को आश्रय स्थलों में तब्दील कर दिया गया.

एक अनुमान के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक UNRWA संचालित 50 फ़ीसदी से अधिक केन्द्र, हमलों की जद में आए हैं, जिनमें से अधिकाँश स्कूली इमारतें हैं.

“कुछ [स्कूली इमारतें] बम हमलों में पूरी तरह से ध्वस्त हो गईं, और अब वहाँ कामकाज ठप है.” अक्टूबर 2023 के बाद से अब तक छह लाख से अधिक बच्चों के लिए स्कूलों में पढ़ाई रुक गई है.

एक पीढ़ी पर असर

जूलियट टूमा ने बताया कि इनमें से अधिकाँश स्कूलों को शरण स्थलों के रूप में इस्तेमाल में लाया जा रहा था, मगर इसका अर्थ यह है कि यदि युद्ध जारी रहा, तो हम बच्चों की एक पूरी पीढ़ी को खो देने के कगार पर हैं.

जब उनसे हमास लड़ाकों द्वारा इन स्कूलों को इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यूएन संचालित किसी भी केन्द्र को सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल में नहीं लाया जाना चाहिए.

संचार निदेशक टूमा ने दोहराया कि इन गम्भीर आरोपों की स्वतंत्र रूप से जाँच कराई जाने की आवश्यकता है.

बदतरीन हालात

इस बीच, यौन एवं प्रजनन मामलों के लिए यूएन एजेंसी (UNFPA) ने चेतावनी जारी की है कि ग़ाज़ा में मानवीय स्थिति बद से बदतर हो रही है और गम्भीर पीड़ा को भोगना, लोगों के लिए आम बात होती जा रही है.

ग़ाज़ा में स्वास्थ्य प्रशासन के हवाले से, UNFPA ने बताया कि अब तक क़रीब 38 हज़ार फ़लस्तीनियों की जान जा चुकी है और 87 हज़ार से अधिक घायल हुए हैं. भोजन, शरण, स्वास्थ्य व आजीविका के लिए संसाधनों की चिन्ताजनक स्तर पर क़िल्लत है.

मौजूदा संकट के कारण, ग़ाज़ा में लगभग 19 लाख लोग जबरन विस्थापन का शिकार हैं और इसराइली सेना द्वारा उन्हें बार-बार जगह ख़ाली करने के आदेश दिए जा रहे हैं.

जीवनरक्षक आपूर्ति बाधित

यूएन एजेंसी के अनुसार, आम लोग टैंट से बने अस्थाई शिविरों, भीड़भाड़ भरे केन्द्रों, सड़कों पर बिना बुनियादी सामग्री के रहने के लिए मजबूर हैं.

ग़ाज़ा में ज़रूरमतन्दों तक मानवीय सहायता पहुँचाने में गम्भीर अवरोध हैं, जिनके कारण राहत अभियान में मुश्किलें पेश आ रही हैं. सीमा चौकियों को बन्द कर दिया जाता है या फिर लालफीताशाही सम्बन्धी रोड़े हैं.

ग़ाज़ा में क़ानून व्यवस्था ढह जाने से हिंसा, चोरी व लूटपाट की घटनाएँ भी बढ़ी हैं, और मानवीय सहायताकर्मियों का जीवन व उनके द्वारा संचालित राहत अभियान संकट में हैं.

इसके अलावा, बड़ी संख्या में समय से पहले ही प्रसव और कम वज़न वाले नवजात शिशुओं के जन्म के मामले बढ़ते जा रहे हैं. यह गर्भवती महिलाओं में तनाव, भय और गम्भीर कुपोषण की स्थिति का एक संकेत है.

महिलाओं व लड़कियों पर जोखिम

साथ ही, महिलाओं व किशोर लड़कियों के लिए लिंग-आधारित हिंसा का शिकार होने के लिए जोखिम बढ़े हैं, विशेष रूप से विस्थापित, विधवा व बिना किसी संगी-साथी के रह रही महिलाओं के लिए.

मौजूदा चुनौतियों के बावजूद, UNFPA ने ग़ाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट में अति-आवश्यक यौन प्रजनन स्वास्थ्य व लिंग-आधारित हिंसा सम्बन्धी सेवाओं को मुहैया कराया है.

इसके समानान्तर, यूएन एजेंसी और साझेदार संगठनों ने आपात हालात में प्रसव के लिए दो मातृत्व स्वास्थ्य इकाई स्थापित की हैं, माहवारी स्वच्छता उत्पाद हज़ारों महिलाओं व लड़कियों को प्रदान किए हैं, सचल मेडिकल केन्द्रों को अपना समर्थन दिया है.