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श्रीलंका की पहली महिला नाविक, नायोमी अमरसिंघे.

श्रीलंका: चन्द महिला समुद्री नाविकों में शुमार होने का गर्व

© ILO श्रीलंका की पहली महिला नाविक, नायोमी अमरसिंघे.

श्रीलंका: चन्द महिला समुद्री नाविकों में शुमार होने का गर्व

एसडीजी

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और श्रीलंका के महापोला बंदरगाह व समुद्र से जुड़े मामलों पर केन्द्रित अकादमी की साझेदारी की मदद से, नायोमी अमरसिंघे देश में कुछ गिनी-चुनी महिला समुद्री नाविकों (seafarer) में शामिल हो गई हैं. मंगलवार, 25 जून, को 'अन्तरराष्ट्रीय समुद्री नाविक दिवस' पर उनके इस सफ़र पर एक नज़र...

उन्होंने 16 महीने पहले, अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा समर्थित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेकर, श्रीलंका की महिला समुद्री नाविकों में अपनी जगह बनाई.

वो कहती हैं, “मेरे हाथ पर गुदे हुए इस लंगर को देखकर ही आप समझ जाएँगे कि समुद्री उद्योग से मुझे कितना प्रेम है. मुझे ख़ुशी है कि मैं उन लैंगिक बाधाओं को पार करने में सफल हुई, जो एक सफल समुद्री नाविक बनने के रास्ते में आ सकते थे.”

अमरसिंघे कहती हैं, "मेरे हाथ पर लंगर के इस गोदने को देखकर ही आप समझ जाएँगे कि जहाज़ों से मुझे कितना प्रेम है. "
© ILO/Asitha Seneviratne

अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद नायोमी अमरसिंघे एक पत्रकार बनना चाहती थीं. लेकिन पत्रकारिता के कई प्रशिक्षण कोर्स करने के बावजूद रोज़गार न मिलने के कारण उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा. मगर उन्होंने हार नहीं मानी. 

उन्होंने अपनी बहन के काम में हाथ बँटाना शुरु किया, जो एक उद्योग संचालित करती थीं. साथ ही, हेयरड्रेसर का प्रशिक्षण लेना आरम्भ किया. इसी दौरान उन्हें समुद्री नाविक के रूप में प्रशिक्षित लेने के अवसर की जानकारी मिली.  

शुरूआत में उनके माता-पिता ने इसका विरोध किया. वो बताती हैं, “मेरे दो भाई श्रीलंका नौसेना में सेवारत हैं. मेरी कोशिश थी कि मुझे भी मैरीटाइम अकादमी में दाख़िला लेने के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त हो.”

वो कहती हैं, “ख़ासतौर पर महिलाओं के लिए, इस उद्योग में काम करना बहुत मुश्किल है.”

मैंने 16 महीने पहले जब 'Mahapola Ports and Maritime Academy' में अपनी ट्रेनिंग पूरी की तो मुझे कई लोगों से आलोचना सुनने को मिली. लेकिन इससे मेरा हौंसला ही बढ़ा और मैंने अपना प्रशिक्षण पूरा करने की ठान ली.”

"मुझे ख़ुशी है कि मैं लैंगिक बाधाओं को पार करने में सफल हुई."
© ILO/Asitha Seneviratne

अवसर की शुरुआत

कोविड-19 महामारी से प्रभावित श्रीलंका के प्रवासी कामगारों को फिर से कौशल निखारने में मदद देने के उद्देश्य से, यूएन श्रम एजेंसी ने एक परियोजना शुरू की थी, जोकि उनके रोज़गार, शिष्ट एवं उपयुक्त कार्य उद्यमशीलता पर केन्द्रित थी. 

इसके तहत, श्रीलंकाई नाविकों के राष्ट्रीय संघ (NUSS) के साथ मिलकर, मैरीटाइम सैक्टर में शिष्ट एवं उपयुक्त कामकाज के अवसरों को तलाशा गया. NUSS ने Mahapola Ports and Maritime Academy के साथ साझेदारी में 21 युवा पुरुषों व नायोमी अमरसिंघे समेत तीन युवा महिलाओं को समुद्री नाविकी में प्रशिक्षित किया.

प्रशिक्षण के दौरान, अमरसिंघे ने जहाज़ पर समुद्री नाविक की भूमिका व उसकी ज़िम्मेदारियों के बारे में सीखा.  उन्होंने जाना कि सुरक्षा ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी.

उन्होंने बताया कि “मुझे आपातस्थिति के लिए भी प्रशिक्षण दिया गया था, जिससे जहाज़ चलाते समय ऐसे हालात में मुझे क्या करना है, इसकी पूर्ण जानकारी रहे.”

लेकिन उनके असीम उत्साह के बावजूद, उन्हें अपने प्रशिक्षण के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. “मेरे परिवार समेत कई लोगों ने मैरीटाइम उद्योग में काम करने की मेरी चाहत की आलोचना की." 

"एक महिला होने के नाते लोगों को विश्वास नहीं था कि मैं यह काम ठीक से कर पाउँगी. इस आलोचना ने मुझे और प्रेरणा दी और मैंने हर हाल में अपना प्रशिक्षण पूरा करने की ठान ली.”  

नायोमी अमरसिंघे ने बताया, “हाल ही में, मैंने एक टैंडर नाव चलाई. यह मेरे जीवन के अब तक के सबसे बेहतरीन अनुभवों में से एक था.”
© ILO/Nayomi Amarasinghe

दैनिक कामकाजी ज़िम्मेदारियाँ

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, कार्निवल क्रूज़ लाइन के साथ समुद्री नाविक के रूप में काम करते हुए, नायोमी अमरसिंघे पूरी दुनिया घूम चुकी हैं. ऐसा काम आम तौर पर पुरुष-प्रधान माना जाता है, और वो समुद्री नाविकों में अक्सर अकेली महिला सदस्य होती हैं, लेकिन अभी तक उनका अनुभव बहुत सकारात्मक रहा है.

“मुझे समुद्री नाविक के रूप में काम करना बेहद पसन्द है. मैंने जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली व फ़िलिपीन्स के लोगों के साथ काम किया है. वे सभी बहुत मिलनसार रहे हैं और मुझे कभी भी अकेलापन नहीं सताया. प्रशिक्षण में लिखित पढ़ाई ज़्यादा थी, लेकिन अब मैं उस शिक्षा को अभ्यास में लाकर, हर एक दिन अधिक सीख रही हूँ.”

उन्होंने बताया, “जहाज़ पर मेरा मुख्य काम यह सुनिश्चित करना है कि छोटी नावों समेत अगल-बग़ल के सभी दरवाज़ों (side doors) पर पर्याप्त तेल लगा हो ताकि वे ना अटकें और उन्हें आसानी से खोला जा सके.”

यादगार अनुभव

नायोमी अमरसिंघे ने बताया, “हाल ही में, मैंने एक छोटी नाव (tender boat) चलाई, जो लोगों को बंदरगाह से जहाज़ तक ले जाने वाली एक छोटी नाव होती है. यह मेरे जीवन के अब तक के सबसे बेहतरीन अनुभवों में से एक था.”

“हम स्कॉटलैंड के एक बंदरगाह पर थे और उस दिन बहुत तेज़ हवा चल रही थी और लहरें उफ़ान पर थीं. लेकिन मैंने बहुत सावधानी से नाव चलाकर लोगों को किनारे तक पहुँचाया और बाद में यात्रियों ने मुझ से हाथ मिलाकर कहा कि उन्हें मुझ पर बहुत गर्व महसूस हुआ.”

6 महीने के अनुभव के साथ, इस 30 वर्षीय नाविक ने अपने भविष्य का खाका तैयार कर लिया है. वो कहती हैं, “सितम्बर में शुरू होने वाला अपना छह महीने का अनुबन्ध पूरा करने के बाद, मैं आगे की परीक्षा देकर अधिकारी बनना चाहती हूँ. सम्भव है कि मैं एक दिन समुद्री कप्तान बन जाउं.”

"भविष्य में मैं आगे पढ़कर, अफ़सर बनना चाहती हूँ."
© ILO/Nayomi Amarasinghe