यौन हिंसा के पीड़ितों के लिए समुचित स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर बल
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि युद्ध व हिंसक टकराव के दौरान स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाना, अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का एक बुनियादी नियम है. उनके अनुसार, यौन हिंसा से गुज़रने वाली महिलाओं व लड़कियों को ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाएँ व समर्थन प्रदान करने के लिए यह आवश्यक है.
यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने बुधवार, 19 जून, को हिंसक टकराव में यौन हिंसा के उन्मूलन के अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर जारी अपने सन्देश में यह बात कही है.
उन्होंने ध्यान दिलाया है कि हिंसा की चपेट में आने वाले लोगों को उबारने में अस्पताल अहम भूमिका निभाते हैं.
“मगर, अस्पतालों और स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों पर हमले, और स्वास्थ्य देखभालकर्मियों को निशाना बनाए जाने से, मेडिकल देखभाल की सुलभता और जीवित बचे व्यक्तियों के लिए मनोसामाजिक समर्थन सीमित हो सकता है.”
महासचिव गुटेरेश के अनुसार, युद्ध का महिलाओं व लड़कियों और पुरुषों व लड़कों पर दीर्घकालिक असर होता है.
“यौन हिंसा से गुज़रने वाली महिलाएँ व लड़कियाँ, बलात्कार के कारण गर्भवती हो सकती हैं और उन्हें तत्काल यौन व प्रजनन स्वास्थ्य देखभाल की ज़रूरत हो सकती है.”
“पुरुषों व लड़कों को यदि उपयुक्त देखभाल नहीं मिले तो उनके अलग-थलग पड़ने का ख़तरा बढ़ सकता है.”
ज़रूरी समाधान
यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के लिए यूएन एजेंसी (UNFPA) ने यौन हिंसा के विनाशकारी प्रभावों के प्रति सचेत किया, विशेष रूप से हिंसक टकराव के दौरान.
यूएन एजेंसी ने इस दिवस पर अपने सन्देश में बताया कि जीवित बच गई महिलाओं व लड़कियों की आवाज़ शान्ति व सुरक्षा या मानवीय सहायता सम्बन्धी मुद्दों पर लिए जाने वाले निर्णयों में शान्त रहती है, और वे समाधानों से दूर हो जाती हैं.
“जीवनरक्षक लिंग-आधारित हिंसा सेवाएँ, जिनमें जीवितों की ज़रूरतों, अधिकारों और इच्छाओं का ख़याल रखा जाता है, वे हिंसक टकराव से ग्रस्त देशों में अपर्याप्त स्तर पर बनी हुई हैं.”
इसके मद्देनज़र, महिलाओं व लड़कियों को मानवतावादी कार्यक्रमों में अहम भूमिका दिए जाने पर बल दिया गया है, ताकि वे चुनौतियों के अनुरूप समाधान की तलाश कर सकें. इस क्रम में, संरक्षण व समर्थन कार्यक्रमों के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की दरकार होगी.
UNFPA ने ज़ोर देकर कहा है कि हिंसक टकराव के दौरान यौन हिंसा एक युद्ध अपराध है और दोषियों की जवाबदेही हर हाल में तय की जानी चाहिए. मगर, फ़िलहाल युद्ध के दौरान कम संख्या में ही यौन हिंसा के मामलों की जानकारी दर्ज की जाती है और उससे भी कम मामलों की जाँच या मुक़दमे की कार्रवाई होती है.
एकजुटता पर बल
यूएन महासचिव का कहना है कि आम नागरिकों पर यौन हिंसा व अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार का शिकार होने का जोखिम बढ़ रहा है. विश्व भर में युद्ध और संकट बढ़े हैं, जिनके कारण 11.7 करोड़ लोग अपने घर व समुदाय से विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं.
नागरिक प्रतिष्ठानों, जैसेकि स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों पर हमले और उनका सैन्य मक़सद के लिए इस्तेमाल किए जाने के मामले बढ़े हैं, जिससे ज़रूरतमन्दों के लिए महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रभावित हुई हैं.
यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि अस्पतालों और स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी होगी, ताकि हिंसा के दौरान घायलों को मरहम लगाने व उबरने का अवसर दिया जा सके, जिनमें यौन हिंसा के पीड़ित भी हैं.
इस क्रम में, उन्होंने जीवित बचे व्यक्तियों के साथ एकजुटता दर्शाने का आहवान किया और कहा कि स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों, अस्पतालों की सुरक्षा के लिए नए सिरे से संकल्प लिया जाना होगा.
यूएन महासभा ने वर्ष 2015 में हर वर्ष 19 जून को, ‘हिंसक टकराव में यौन हिंसा के उन्मूलन के अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी.
वर्ष 2008 में, इसी दिन सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव 1820 पारित हुआ था, जिसमें युद्ध के तौर-तरीक़े और शान्ति की राह में बाधा के रूप में यौन हिंसा की निन्दा की गई है.