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अफ़ग़ानिस्तान में शारीरिक दंड के बढ़ते प्रयोग पर गहरी चिन्ता

अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों और महिलाओं पर बड़े पैमाने पर पाबन्दियाँ हैं, और अक्सर महिलाओं को, कोड़े मारकर दंड दिया जाता है.
© UNICEF/Mukhtar Neikrawa
अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों और महिलाओं पर बड़े पैमाने पर पाबन्दियाँ हैं, और अक्सर महिलाओं को, कोड़े मारकर दंड दिया जाता है.

अफ़ग़ानिस्तान में शारीरिक दंड के बढ़ते प्रयोग पर गहरी चिन्ता

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने बुधवार को कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में सत्ताधीन अधिकारियों द्वारा शारीरिक दंड के व्यापक प्रयोग पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है.

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यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के प्रवक्ता जैरेमी लॉरेंस ने जिनीवा में बताया कि एक दिन पहले यानि मंगलवार, 4 जून को, किस तरह 63 महिलाओं और पुरुषों को सर-ए-पुल नामक शहर में एक खेल मैदान में, सरेआम कोड़े मारे गए.

उन लोगों पर कई तरह के आरोप लगाए गए थे, जिनमें “घर से भाग जाना” और “नैतिक अपराधों” के आरोप शामिल थे.

लगभग 50 पुरुषों और 15 महिलाओँ को, 15 से 39 बार कोड़े मारे गए, जिसके बाद उन्हें अपनी सज़ा पूरी करने के लिए, जेल वापिस भेज दिया गया.

प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने कहा कि शारीरिक दंड दिए जाने के इस घटनाक्रम को, तालेबान अधिकारियों और सैकड़ों स्थानीय निवासियों की कथित मौजूदगी में अंजाम दिया गया.

स्पष्ट मानवाधिकार हनन

प्रवक्ता ने कहा, “शारीरिक दंड, अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून का स्पष्ट हनन है” और अफ़ग़ानिस्तान भी, उत्पीड़न के विरुद्ध कन्वेंशन और सिविल व राजनैतिक अधिकारों पर अन्तरराष्ट्रीय सन्धि, दोनों पर ही हस्ताक्षर करने वाला एक पक्ष है.

उन्होंने कहा, “अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत, तमाम लोगों को, उनके साथ, उनकी गरिमा और समानता के लिए, सम्मानजनक बर्ताव किए जाने का अधिकार है.”

उन्होंने तालेबान अधिकारियों से, शारीरिक दंड दिए जाने के तमाम तरीक़ों को तत्काल बन्द किए जाने और स्थापित क़ानूनी प्रक्रिया व निष्पक्ष मुक़दमे चलाए जाने की प्रक्रिया सुनिश्चित किए जाने का आग्रह किया.

इसमें आपराधिक आरोपों का सामना करने वाले सभी लोगों को, क़ानूनी सहायता यानि उनका मुक़दमा लड़ने की सुविधा दिया जाना भी शामिल है.