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अफ़ग़ानिस्तान: दोहा में यूएन दूतों की बैठक के लिए, तालेबान को मिला न्योता

संयुक्त राष्ट्र में राजनैतिक मामलों की प्रमुख रोज़मैरी डीकार्लो. (फ़ाइल फ़ोटो)
UN Photo/Eskinder Debebe
संयुक्त राष्ट्र में राजनैतिक मामलों की प्रमुख रोज़मैरी डीकार्लो. (फ़ाइल फ़ोटो)

अफ़ग़ानिस्तान: दोहा में यूएन दूतों की बैठक के लिए, तालेबान को मिला न्योता

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र में राजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों की प्रमुख रोज़मैरी डीकार्लो ने अपनी हालिया अफ़ग़ानिस्तान यात्रा के दौरान, तालेबान के विदेश मंत्री को संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूतों की एक बैठक में शिरकत करने के लिए अग्रिम निमंत्रण दिया है.

यूएन अवर महासचिव रोज़मैरी डीकार्लो ने 18-21 मई को अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा की, जहाँ उन्होंने काबुल में तालेबान प्रशासन, कूटनैतिक समुदाय और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ मुलाक़ात की.

क़तर की राजधानी दोहा में 30 जून से 1 जुलाई तक संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूतों की एक बैठक हो रही है, और यही उनकी इस यात्रा के दौरान चर्चा के केन्द्र में रही.

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राजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों की प्रमुख डी कार्लो ने तालेबान के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी को विशेष दूतों की इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की ओर से निमंत्रण दिया है. 

दोहा में आयोजित होने वाली इस दो-दिवसीय बैठक का उद्देश्य अफ़ग़ानिस्तान और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के बीच के समन्वित ढंग से सम्पर्क व बातचीत को बढ़ाना है. 

इससे पहले 18-19 फ़रवरी को, दोहा में अफ़ग़ानिस्तान के लिए राष्ट्रीय व क्षेत्रीय विशेष दूतों की बैठक आयोजित की गई थी. 

सत्तारुढ़ तालेबान ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लेने का निर्णय लिया था, मगर विस्तृत विचार-विमर्श किए जाने की आवश्यकता पर यूएन महासचिव के वक्तव्य का स्वागत किया गया.

मानवाधिकारों पर चर्चा 

यूएन अवर महासचिव ने अफ़ग़ानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर चर्चा की, विशेष रूप से महिलाओं के शिक्षा अवसरों पर थोपी गई पाबन्दियों के सम्बन्ध में.

अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर अगस्त 2021 में तालेबान का वर्चस्व स्थापित होने के बाद, देश में मानवाधिकारों के लिए संकट उपजा है और महिलाओं के लिए स्थिति विशेष रूप से ख़राब हुई है. 

मानवीय संकट से जूझ रहे अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने अपनी उपस्थिति बनाए रखी है और ज़रूरतमन्दों के लिए विभिन्न प्रकार की सेवाएँ व सहायता सुनिश्चित की हैं.

इस क्रम में, सत्तारूढ़ तालेबान के साथ सम्पर्क बरक़रार है और मानवाधिकारों का सम्मान किए जाने और ज़रूरतमन्द आबादी तक अति-आवश्यक सेवाएँ पहुँचाने के लिए निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं. 

अवर महासचिव ने अपनी बातचीत में अफ़ग़ानिस्तान के समक्ष मौजूदा अनेकानेक चुनौतियों पर चर्चा की. अफ़ग़ान हितधारकों ने आग्रह किया कि अन्तरराष्ट्रीय सम्पर्क व बातचीत के लिए किसी भी रणनीति में उन मानवतावादी, विकास सम्बन्धी और आर्थिक चुनौतियों का ख़याल रखा जाना  होगा, जिनसे अफ़ग़ानिस्तान फ़िलहाल जूझ रहा है.

इसके अलावा मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवादी समूहों से उपज रही चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ.

पूर्वोत्तर अफ़ग़ानिस्तान में आई औचक बाढ़ से ध्वस्त हुई एक इमारत.
© IOM

प्राकृतिक आपदाओं का दंश

यूएन अवर महासचिव ने अफ़ग़ानिस्तान की अपनी यात्रा ऐसे समय में की है जब देश कुछ सप्ताह पहले आई बाढ़ और उससे हुई बर्बादी से जूझ रहा है. 

अफ़ग़ानिस्तान के पश्चिमोत्तर और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में पिछले दो हफ़्तों के दौरान भीषण बाढ़ से सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और 80 हज़ार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं.  बाढ़ में ऐसे इलाक़े चपेट में आए हैं, जहाँ पहले से ही लोगों को भरपेट भोजन मिल पाना मुश्किल है और खाद्य असुरक्षा संकट स्तर पर है.

गम्भीर रूप धारण कर रहे जलवायु संकट की वजह से मौसमी रुझान बदल रहे हैं, और यह अफ़ग़ानिस्तान में आम होता जा रहा है. 

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने आगाह किया है कि आने वाले दिनों में ऐसी आपदाओं के और अधिक गहन होने की आशंका है, जिसका खाद्य सुरक्षा पर गहरा असर होगा.