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ग़ाज़ा: अस्पताल में फँसे मरीज़ व स्वास्थ्यकर्मी, घेराबन्दी हटाने की अपील

UN के शांतिरक्षक और सहायता कर्मी गाजा के अल-अवदा अस्पताल में चिकित्सा सामग्री का निरीक्षण कर रहे हैं।
© WHO WHO की टीम अल-अवदा अस्पताल में अति-आवश्यक मेडिकल सामग्री की आपूर्ति कर रही है.

ग़ाज़ा: अस्पताल में फँसे मरीज़ व स्वास्थ्यकर्मी, घेराबन्दी हटाने की अपील

स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंगलवार को एक ऐलर्ट जारी किया है जिसमें उत्तरी ग़ाज़ा के अल-अवदा अस्पताल में फँसे स्वास्थ्यकर्मियों व मरीज़ों की स्थिति पर चिन्ता जताई गई है. बीती रात ग़ाज़ा में इसराइली बमबारी जारी रही और ज़मीनी हमलों व भीषण लड़ाई की ख़बरें हैं.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसेस ने सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म, X, पर अपने सन्देश में कहा कि अस्पताल के भीतर मेडिकल स्टाफ़ ने 20 मई को एक हमले के बारे में जानकारी दी थी.

निशानेबाज़ों द्वारा इमारत को निशाना बनाया जा रहा था और एक रॉकेट इमारत की पाँचवीं मंज़िल पर गिरा.

महानिदेशक घेबरेयेसेस ने कहा कि रविवार से इस अस्पताल में 148 स्टाफ़, 22 मरीज़ और उनके तिमारदार फँसे हुए हैं, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की ज़रूरत है. 

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यूएन एजेंसी के अनुसार, ग़ाज़ा में 36 अस्पताल हैं, मगर केवल एक-तिहाई में ही कामकाज हो पा रहा है, और इस वजह से वे मरीज़ और स्वास्थ्यकर्मी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की पहुँच से दूर हैं, जो या तो हिंसा से प्रभावित हैं या फिर जिन्हें जगह ख़ाली करने का आदेश दिया गया है.

दक्षिणी ग़ाज़ा में स्थित रफ़ाह में, इसराइली सेना ने ग़ाज़ा के लोगों को वहाँ से हटने का आदेश दिया है, जिस वजह से 20 मेडिकल केन्द्रों, चार अस्पतालों और चार प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों पर असर हुआ है.

उत्तरी ग़ाज़ा में 16 मेडिकल केन्द्रों, पाँच प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों और अल-अवदा व कमाल अदवान अस्पतालों पर असर हुआ है.

नौ लाख विस्थापन के लिए मजबूर

इस बीच, मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) ने बताया कि इसराइली सैन्य अभियान और जगह ख़ाली करने के आदेश की वजह से पिछले दो हफ़्तों में अब तक नौ लाख से अधिक ग़ाज़ावासी विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं.

इनमें आठ लाख 12 हज़ार लोग रफ़ाह से और उत्तरी ग़ाज़ा में एक लाख विस्थापित हैं. हिंसा के बीच लाखों लोग भयावह परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर हैं.

यूएन कार्यालय के अनुसार, मानवीय सहायता साझेदार संगठन ग़ाज़ा में विस्थापितों को आश्रय प्रदान करने में जुटे हैं मगर वितरण के लिए टैंट और अन्य प्रकार के सामान की बड़ी क़िल्लत हो गई है.

सड़कें बनीं आश्रय स्थल

रफ़ाह से विस्थापित हुए लोगों ने फ़िलहाल ख़ान यूनिस और डेयर अल बालाह में सड़कों, खेतों और अन्य खुले स्थानों में शरण ली है. कुछ लोग क्षतिग्रस्त इमारतों में भी रह रहे हैं.

अब तक, ग़ाज़ा पट्टी के 75 फ़ीसदी से अधिक, यानि 285 वर्ग किलोमीटर, के इलाक़े में बेदख़ली आदेश जारी किए गए हैं. 

अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत आम नागरिकों की हर हाल में सुरक्षा सुनिश्चित की जानी होगी, भले ही वे ग़ाज़ा में कहीं भी हों. साथ ही, भोजन, शरण, जल, स्वास्थ्य समेत उनकी अति-आवश्यक ज़रूरतों को पूरा किया जाना होगा. 

हिंसा में कोई कमी नहीं

ग़ाज़ा पट्टी में हिंसक टकराव में तेज़ी आने से पोषण समर्थन सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, और केवल रफ़ाह इलाक़े में 100 से अधिक खाद्य वितरण केन्द्र पहुँच से बाहर हो गए हैं. 

ग़ाज़ा में मानवीय राहत प्रदान करने में जुटे साझेदार संगठनों ने जल भरने के लिए बर्तन और स्वच्छता सामग्री की क़िल्लत होने की बात कही है. ये सभी सामान विस्थापित होने वाले लोगों के लिए बेहद अहम हैं.

पिछले सात महीनों से जारी लड़ाई के कारण, बुनियादी सेवाओं की भीषण क़िल्लत होने की वजह से ग़ाज़ा में कुपोषण मामलों में उछाल दर्ज किया गया है.

इसके अलावा संचारी, संक्रामक रोगों के फैलने का ख़तरा है और बड़ी संख्या में लोगों को पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल पा रहा है.