वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

फ़लस्तीनी पत्रकार, यूनेस्को प्रैस स्वतंत्रता सम्मान के विजेताओं में शामिल

गाजा में एक वीडियो कैमरे के बगल में प्रेस वेस्ट और हेलमेट पहने एक फिलिस्तीनी पत्रकार माइक्रोफोन में बोल रहे हैं।
© UNDP PAPP/Abed Zagout ग़ाज़ा के फ़लस्तीनी टीवी पत्रकार मुस्तफ़ाह अल बायेद को, यूनेस्को प्रैस स्वतंत्रता पुरस्कार (2024) से सम्मानित किया गया है.

फ़लस्तीनी पत्रकार, यूनेस्को प्रैस स्वतंत्रता सम्मान के विजेताओं में शामिल

शान्ति और सुरक्षा

ग़ाज़ा में विनाशकारी युद्ध की कवरेज करने वाले फ़लस्तीनी पत्रकारों को, यूनेस्को/गुइलरमो कैनो विश्व प्रैस स्वतंत्रता पुरस्कार के विजेताओं में चुना गया है.

गुरूवार को इस पुरस्कार की घोषणा की गई और इसके लिए फ़लस्तीनी पत्रकारों के नाम, मीडिया पेशेवरों की एक अन्तरराष्ट्रीय जूरी की सिफ़ारिश पर शामिल किए गए हैं.

Tweet URL

इन फ़लस्तीनी पत्रकारों ने, ग़ाज़ा में इसराइल की ताबड़तोड़ बमबारी में अपनी गृहभूमि के एक बड़े हिस्से को तबाह होते हुए देखा है.

जूरी के अध्यक्ष मॉरीशियो वीबेल का कहना था, “अन्धकार और निराशा के इस दौर में, हम उन फ़लस्तीनी पत्रकारों को पहचान देने और उनके साथ एकजुटता व्यक्त करने का मज़बूत सन्देश फैलाना चाहते हैं, जो इन ख़तरनाक परिस्थितियों में भी ग़ाज़ा संकट की कवरेज कर रहे हैं.”

उनके साहस और समर्पण के भारी क़र्ज़दार

उन्होंने कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए, उनके साहस और समर्पण के लिए, हम विशाल रूप में उनके क़र्ज़दार हैं.”

संयुक्त राष्ट्र की विज्ञान, शिक्षा और संस्कृति एजेंसी – (UNESCO) की प्रमुख ऑड्री अज़ूले का कहना है कि यह पुरस्कर हर किसी को, “यह सुनिश्चित करने की सामूहिक कार्रवाई की महत्ता की याद दिलाता है कि दुनिया भर के पत्रकार, सूचना देने और जाँच-पड़ताल करने का अपना अनिवार्य कार्य जारी रख सकते हैं”.

ग़ाज़ा में जारी युद्ध के, पत्रकारों के लिए बहुत घातक परिणाम हुए हैं. 

यूनेस्को के अनुसार, 7 अक्टूबर (2023) के बाद से, 26 पत्रकार और मीडियाकर्मी, अपना काम करते हुए मारे गए हैं और यूनेस्को ने उनकी मौत की निन्दा और भर्त्सना की है. यूनेस्को को यह जानकारी उसके अन्तरराष्ट्रीय NGO साझीदारों से प्राप्त हुई है.

यूनेस्को उन पत्रकारों को समर्थन मुहैया कराता है जो टकरावों, युद्धों और संकटों की परिस्थितियों से रिपोर्टिंग करते हैं.

इस सहायता में, ग़ाज़ा में पत्रकारों को ज़रूरी सामान मुहैया कराया जा रहा है. साथ ही सुरक्षित कामकाजी स्थल स्थापित किए गए हैं.

यूक्रेन और सूडान में भी पत्रकारों को आपदा अनुदान यानि वित्तीय सहायता मुहैया कराई गई है.