वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

पाकिस्तान: जलवायु परिवर्तन के अग्रिम मोर्चे पर बच्चों के लिए रक्षा उपायों का आग्रह

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के दादू जिले में ज़ांगी ब्रोही गांव के पास बाढ़ के दूषित पानी से भरे एक तालाब के किनारे बच्चे बैठे हैं।
© UNICEF/Arsalan Butt पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बाढ़ के दूषित पानी के तालाब के पास बैठे बच्चे.

पाकिस्तान: जलवायु परिवर्तन के अग्रिम मोर्चे पर बच्चों के लिए रक्षा उपायों का आग्रह

जलवायु और पर्यावरण

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के वरिष्ठ अधिकारी अब्दुल्लाह फ़ादिल ने पाकिस्तान में हुई बेमौसम, मूसलाधार बारिश के मद्देनज़र आगाह किया है कि जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों से बच्चों के जीवन पर जोखिम मंडरा रहा है, जिससे निपटने के लिए बच्चों के स्वास्थ्य व कल्याण में निवेश और जलवायु कार्रवाई की तत्काल ज़रूरत है.

पाकिस्तान के लिए यूनीसेफ़ के प्रतिनिधि अब्दुल्लाह फ़ादिल ने सोमवार, 22 अप्रैल को ‘पृथ्वी दिवस’ के अवसर पर ध्यान दिलाया कि वर्ष 2022 में दक्षिणी सिन्ध के गाँवों में कुछ ही समय में 10 साल की मात्रा जितनी भीषण बारिश व बाढ़ की वजह से कम से कम 500 बच्चों की मौत हो गई थी. 

“मैंने प्रत्यक्ष रूप से देखा कि बच्चे किस तरह कुपोषित थे और उनके पास जो कुछ भी था वो बह गया. उनके स्कूल, उनकी आशाएँ और भविष्य.”

यूएन एजेंसी प्रमुख के अनुसार, बड़े पैमाने पर राहत प्रयासों के बावजूद, बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में दिसम्बर 2023 तक 96 लाख बच्चों को अब भी मानवीय सहायता की आवश्यकता थी. 

Tweet URL

अब्दुल्लाह फ़ादिल ने बताया कि हर साल बीतने के साथ, पाकिस्तान सूखे और बाढ़ के घातक चक्र में फँसता जा रहा है, जिससे बच्चों के लिए सर्वाधिक जोखिम है.

उन्होंने कहा कि बचपन से वयस्क होने तक, बच्चों का स्वास्थ्य व उनके मस्तिष्क, फेफड़े और प्रतिरोधक क्षमता का विकास, नज़दीकी पर्यावरण से प्रभावित होता है.

फ़िलहाल वैश्विक जलवायु वित्त पोषण का केवल 2.4 प्रतिशत ही बच्चों के लिए आवंटित किया जाता है.

पाकिस्तान में बच्चों पर जलवायु संकट के असर से प्रभावित होने का जोखिम बहुत अधिक है. देश के सामने जलवायु परिवर्तन से बचाव के लिए अनुकूलन उपाय करने और वैश्विक उत्सर्जनों में कमी लाने की चुनौती है. 

जलवायु परिवर्तन का बच्चों पर असर

यूनीसेफ़ के अनुसार, अपने साथ विनाश लेकर आने वाली ये बाढ़ की घटनाएँ दर्शाती हैं कि जलवायु परिवर्तन व प्रदूषण के कारण पाकिस्तान में बच्चों का स्वास्थ्य किस तरह से प्रभावित हो रहा है.

रिकॉर्ध ध्वस्त कर देने वाले तापमान से पाकिस्तान में बच्चों पर ताप लहर से पीड़ित होने का जोखिम भी है. वहीं वायु प्रदूषण की वजह से वयस्कों की तुलना में बच्चों का स्वास्थ्य अधिक प्रभावित होता है, और वे जीवन पर ख़तरा बनने वाले श्वसन तंत्र रोगों का शिकार हो सकते हैं.

एक अनुमान के अनुसार, पाकिस्तान में पाँच वर्ष से कम आयु वर्ग में होने वाली मौतों में 12 फ़ीसदी के लिए वायु प्रदूषण ज़िम्मेदार है.

यूनीसेफ़ प्रतिनिधि ने सचेत किया है कि इतना कुछ दाँव पर लगा होने के बावजूद, पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में फ़िलहाल विफलता ही हाथ लग रही है.

“बलशाली सिन्धु नदी पाकिस्तान के लोगों व बच्चों के लिए जीवनरेखा है, मगर अब इस पर जलवायु परिवर्तन, उपेक्षा, ग़लत इस्तेमाल, प्रदूषण, अत्यधिक दोहन और ज़हरीले कचरे को फेंके जाने से जोखिम है.”

इसके मद्देनज़र, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पाकिस्तान में बच्चों को जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और अन्य आपदाओं से बचाने के लिए प्रयासों को दोगुना किया जाना होगा.  

प्लास्टिक और अन्य कचरे की मोटी परत से ढका एक नदी तट, जिसके पृष्ठभूमि में प्रदूषित जल निकाय और बिजली के टावर दिखाई दे रहे हैं।
Muhammad Faisal

महत्वपूर्ण उपाय

यूनीसेफ़ प्रतिनिधि ने कहा कि जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती लाई जानी होगी.

साथ ही, प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार कारणों पर सामूहिक ज़िम्मेदारी ली जानी ज़रूरी है. इसके अलावा, ऊर्जा की बचत के उपाय किए जाने होंगे, और सौर ऊर्जा जैसे समाधानों को अपनाया जाना होगा. 

अब्दुलाह फ़ादिल ने ऐसी नीतियों व क़ानूनों पर बल दिया है जिससे बच्चों व महिलाओं पर जलवायु परिवर्तन के ग़ैर-आनुपातिक असर से निपटा जा सके. बाढ़ और चक्रवाती तूफ़ान को सहन करने में सक्षण स्कूलों, स्वास्थ्य केन्द्रों, शौचालयों व नलकों का निर्माण किया जाना होगा. 

उनके अनुसार, बाल स्वास्थ्य व कल्याण में निवेश और ज़हरीली धातुओं, रसायनों, ख़तरनाक कचरे और वायु प्रदूषण से बच्चों की रक्षा किया जाना, सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.