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 विश्व बैंक की APART परियोजना, कृषि एवं उद्यम विकास पर केंद्रित है.

भारत: सफलता की कहानी रचते, असम के कृषि उद्यमी

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विश्व बैंक की APART परियोजना, कृषि एवं उद्यम विकास पर केंद्रित है.

भारत: सफलता की कहानी रचते, असम के कृषि उद्यमी

आर्थिक विकास

भारत के असम राज्य में 2017 में 'असम कृषि व्यवसाय और ग्रामीण परिवर्तन परियोजना' (APART) को मंज़ूरी दी गई थी. 20 करोड़ डॉलर लागत की इस परियोजना के तहत, चावलडेयरीमत्स्य पालनपशुधन और रेशम जैसे क्षेत्रों में पाँच लाख से अधिक किसानों को समर्थन दिया गया है, और अतिरिक्त एक लाख किसानों तक पहुँचने की योजना है. उद्यम विकास के क्षेत्र मेंइस परियोजना ने दो हज़ार से अधिक उद्यमों की सूरत ही बदल दी है. 

दिसम्बर की एक सुहानी सुबह है. 37 वर्षीय किसान, कमल कुमारी, पूर्वोत्तर राज्य असम के अपने गाँव की सीमा से लगे खेतों की ओर जा रही हैं. धान और सरसों के विशाल खेतों से गुज़रते समय, उन्हें दूर क्षितिज पर हिमालय की धुँधली छवि दिखाई दे रही है. 

कमल कुमारी को रास्ते में कुछ अन्य महिला किसान भी मिल गईं और वे एक साथ चलकर, एक बड़े भूखंड पर पहुँच गईं. कमल कुमारी ने बीज बोने की मशीन की कमान सम्भाली, और उनकी साथियों ने मशीन के पिछले हिस्से में आलू के बीज भर दिए. दिन भर वो सभी खेत में आलू के बीज बोने का काम करती रहीं.

ये महिला किसान, असम में तेजपुर स्थित सोनितपुर ज़िले के 25 गाँवों की 435 सदस्यों वाली, पूर्णतः महिला शेयरधारक कम्पनी, जॉयमती किसान उत्पादक कम्पनी की सदस्य हैं. वे साल भर खेती करके, धान, कद्दू, सरसों जैसी सब्जियाँ उगाते हैं.

इन महिला किसानों ने बताया, "पहले, हम अपनी व्यक्तिगत ज़मीन पर काम करते थे और अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के बाद ही उपज बेचते थे. इससे हमें जो आमदनी होती थी, उससे परिवार का मात्र गुज़र-बसर ही हो पाता था." 

"अब जब हम एक कम्पनी के रूप में एक साथ आए हैं, तो हम बाज़ार की माँग के आधार पर फ़सल उगाते हैं. इससे हमें बेहतर क़ीमत हासिल होती है और पूरा मुनाफ़ा बाँट लेते हैं. इससे हमारी आय दो से तीन गुना बढ़ गई है.''

2022 में उनकी मेहनत रंग लाई, जब एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी ने उन्हें आलू की खेती के लिए कॉन्ट्रैक्ट की पेशकश की. आलू को सफलतापूर्वक बेचने के बाद, उनकी किसान उत्पादक कम्पनी (FPC) ने लगभग 20 लाख रुपये का मुनाफ़ा कमाया, जिसे किसानों के बीच वितरित किया गया. FPC की अध्यक्ष कमल कुमारी गर्व से कहती हैं, "हम हमेशा किसान रहे हैं, लेकिन अपनी कम्पनी के साथ हमें कृषि उद्यमी का दर्जा मिल गया है."

विश्व बैंक की APART परियोजना के तहत, किसान उत्पादक कम्पनियों को साझा सेवा केन्द्र स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता मिलती है, जहाँ से सदस्य मछली चारा, बीज, उर्वरक और कृषि उपकरण जैसी आवश्यक कृषि सामग्री ले सकते हैं.
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APART परियोजना से मदद

विश्व बैंक की असम कृषि व्यवसाय और ग्रामीण परिवर्तन परियोजना ((APART) असम में 125 ऐसे FPC समूहों का समर्थन कर रही है, जिसमें लगभग 20 हज़ार महिलाओं सहित 60 हज़ार से अधिक किसान शेयरधारक हैं.

FPC का गठन एक भौगोलिक क्लस्टर मॉडल का उपयोग करके किया जाता है, जिसके तहत कृषि-बागवानी या मत्स्य पालन और रेशम जैसी समान गतिविधियों में लगे सभी किसानों को एकजुट किया जाता है. 

प्रत्येक किसान शेयरधारक बनने के लिए एक हज़ार रुपये का योगदान देता है. एक पंजीकृत FPC के रूप में, कम्पनी को परियोजना से तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ-साथ, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों से वित्त पोषण तक पहुँच भी हासिल होती है.

किसानों का सशक्तिकरण

APART के ज़रिए, FPC को साझा सेवा केंद्र व ऐसे केन्द्र खोलने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है, जिनसे सदस्यों को मछली चारा, बीज, उर्वरक और कृषि उपकरण जैसी कृषि सामग्री मिल सके. 

किसानों को फ़सल प्रबंधन और सब्ज़ी की खेती समेत, समस्त नवीन एवं उन्नत कृषि तकनीकों की भी जानकारी दी जाती है. मत्स्य पालन में लगे लोगों को उत्कृष्ट एवं स्वच्छ मछली पालन तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें बाज़ार की माँग अनुसार, मूल्यवर्धित उत्पादों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.

नलबाड़ी ज़िले के चेंगनोई गाँव की निवासी, 50 वर्षीय प्रोनोती गोस्वामी अपने छोटे से तालाब में मछली पालती थीं और घरेलू उपभोग के बाद बची हुई मछलियों को स्थानीय बाज़ार में बेचकर अपने परिवार का गुज़ारा करती थीं. 

अब उनके मत्स्य पालन व्यवसाय में विविधता आ गई है. चेंगनोई FPC के शेयरधारक के तौर पर, उन्हें मछली बीज खेती के उद्यम के लिए प्रशिक्षण व संसाधन प्राप्त हुए. 

“प्रशिक्षण के बाद मुझे अहसास हुआ कि मैं तालाबों व मछली फार्मों में अंडे के रूप में इस्तेमाल होने वाले मछली के बीज की खेती के ज़रिए अधिक धन कमा सकती हूँ. इसकी माँग साल भर रहती है. मेरी आमदनी 50 हज़ार रुपये से छह गुना बढ़कर अब तीन लाख हो गई है.”

APART परियोजना से मिले प्रशिक्षण के बाद इलाक़े की महिलाएँ, मत्स्य पालन व्यवसाय में विविधता ला रही हैं.
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इसी गाँव की 30 वर्षीय स्नातक, लविता डेक्का गोस्वामी ने अपने मछली पालन व्यवसाय का विस्तार करके उसमें, सूखी मछली, मछली का अचार और सरसों के पेस्ट जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों को शामिल किया. APART के तहत दिए गए प्रशिक्षण के कारण अब लविता इन उत्पादों को स्थानीय बाज़ार व सुपरमार्केट में बेचती हैं. 

“30 हज़ार रुपये के मेरे छोटे से निवेश से, अब मुझे लगभग 10 से 15 हज़ार रुपये मिल रहे हैं.” लविता अब अन्य महिला किसानों को भी प्रशिक्षित कर रही हैं. उन्हें उम्मीद है कि ज़िले के सुपरमार्केट में वो ज़्यादा से ज़्यादा उत्पाद बेच पाएँगी. 

महिला नेतृत्व को बढ़ावा

APART परियोजना का एक अभिन्न अंग है, असम एग्रीबिज़नेस ग्रोथ लैब. इस पहल में, कृषि और सम्बद्ध क्षेत्रों में उद्यमों का समर्थन किया जाता है, जिसमें महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है. 

ऐसी ही सफलता की कहानी 33 वर्षीय स्नातक और पूर्व शिक्षक मायाश्री बरुआ की है, जो गुवाहाटी के बाहरी इलाक़े में एक सफल सूक्ष्म उद्यम चलाती हैं.

मायाश्री ने विवाह के बाद अपनी उद्यमशीलता यात्रा शुरू की. उनके उत्पाद, रासायनिक और प्रैज़रवेटिव-मुक्त मुरमुरे स्नैक्स, तेज़ी से लोकप्रिय हुए. 2020 से पहले, वह लगभग पाँच लाख रुपये का वार्षिक मुनाफ़ा कमाती थीं. इसके बाद उन्होंने अपने स्नैक में बाजरे से बनी चीज़ें भी शामिल कीं, जिन्हें वो किसानों से ख़रीदती हैं.

मायाश्री ने कहा, "एग्रीबिज़नेस ग्रोथ लैब के ज़रिए मुझे जो प्रशिक्षण व मदद मिली, उससे मुझे अपने सूक्ष्म उद्यम को बढ़ाने के लिए आवश्यक ज्ञान एवं कौशल प्राप्त हुआ. 2022-23 में मेरा टर्नओवर दोगुना होकर लगभग 13 लाख रुपये हो गया." 

"अब, मैं अपनी उत्पाद श्रृँखला में विविधता लाकर, असम के अन्य इलाक़ों के बाज़ारों में भी अपने उत्पाद बेचने के प्रयास कर रही हूँ. मुझे विश्वास है कि 2023-24 में मेरा टर्नओवर 25 लाख तक पहुँच जाएगा."

APART से प्राप्त ज्ञान और संसाधनों के ज़रिए, किसान अब उद्यमियों की तरह सोचने लगे हैं.
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बैंकिग व वित्तीय जानकारी 

APART के तहत, अन्य कई तरह की गतिविधियाँ शुरू की गई हैं, जिनमें असम के किसानों व कृषि से सम्बन्धित छोटे व मध्यम उद्योगों की वित्तीय सहायता तक पहुँच और कौशल बढ़ाया जाता है. 

APART ने एक चुनौती कोष, Xamahar भी स्थापित किया है, जो वित्तीय सेवा प्रदाताओं को, राज्य में किसानों एवं कृषि व्यवसाय सम्बन्धी लाभ के लिए नवीन उपायों को बड़े स्तर पर लागू करने हेतु अनुदान प्रदान करता है.

किसानों को Krisarthak नामक डिजिटल वित्तीय शिक्षा एवं परामर्श मंच तक पहुँच भी हासिल है जो उनकी वित्तीय साक्षरता को बढ़ाने, उन्हें जानकारी लेकर सही निर्णय लेने और अपने वित्त को प्रभावी ढंग से प्रबन्धित करने में मदद करता है.

कृषि व्यवसाय और सम्बद्ध क्षेत्रों में छोटे एवं मध्यम आकार के उद्यमों (SMEs) के लिए दीर्घकालिक पूँजी जुटाने इरादे से, APART एक असम कृषि व्यवसाय निवेश कोष शुरू कर रहा है. यह कोष, कृषि क्षेत्र में विकासोन्मुख उद्यमों में निवेश करेगा, जिससे कृषि व्यवसाय उद्यमों के विकास तथा विस्तार के लिए आवश्यक दीर्घकालिक पूँजी उपलब्ध हो सकेगी.

पारम्परिक खेती से परे 

APART के ज़रिए प्राप्त ज्ञान और उपलब्ध कराए गए संसाधनों की वजह से, अब किसान उद्यमियों की तरह सोचने लगे हैं. वे अपनी उत्पाद श्रृँखला का विस्तार करने, नए बाज़ार तलाशने और अपने उत्पादों के ब्राँड बनाने के लिए उत्सुक हैं.

जॉयमती FPC की कमल कुमारी मुस्कुराते हुए कहती हैं, "हमें विश्वास है कि 2023-24 में हमारा कारोबार दो करोड़ रुपये से अधिक तक बढ़ जाएगा. अब हमारी योजना सरसों की फ़सल से तेल तैयार करने के लिए एक तेल मिल ख़रीदने की है. हम इसे पैकेज करके, पूरे राज्य और उसके बाहर अपने ब्रैंड नाम से बेचेंगे.''

इस बीच, मायाश्री वर्तमान में अपने स्वामित्व वाली फर्म को एक प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी में बदलने की योजना बना रही हैं. "एक बार मेरी कम्पनी स्थापित हो जाए, तो मैं अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए ऋण और अनुदान के अवसर तलाश सकती हूँ. मैं अपने वितरण नेटवर्क को बढ़ाना चाहती हूँ और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में अधिक ग्राहकों तक पहुँचना चाहती हूँ."

विश्व बैंक की APART परियोजना किसानों को ज्ञान और संसाधनों से सशक्त बना रही है, उन्हें पारम्परिक खेती से परे सोचने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.
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जीवन में बदलाव

इस परियोजना से ना केवल किसानों को आर्थिक लाभ मिला है, बल्कि अब वो अपने समुदाय में अधिक सम्मान पाते हैं. 30 साल की उम्र की रंजू गोआला का अधिकाँश जीवन अपने घर और परिवार की देखभाल में बीता. 

लेकिन जॉयमती FPC में शामिल होने के बाद उनके जीवन में अहम बदलाव आया. रंजू बताती हैं, "पहले, मैं कभी भी लोगों के सामने खड़े होकर बात नहीं कर पाती थी. आज, मैं बाहरी लोगों के साथ बातचीत करने, व्यावसायिक चर्चाओं में शामिल होने और अपनी राय रखने में सक्षम हूँ. अब मेरी एक पहचान है और मैं सशक्त महसूस करती हूँ."

सोनितपुर में क्षितिज पर सूरज अस्त हो रहा था, और खेतों में उसकी सुनहरी चमक फैली हुई थी. जॉयमती FPC की महिला किसान आलू के खेत में अपना काम ख़त्म करके, थककर घर लौट रहीं थीं, चेहरों पर इत्मीनान की मुस्कुराहट लेकर! 

यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.